Fri Sep 11, 2026 | Updated 10:35 PM IST

त्र‍िपुरा के उनाकोटी में क्यों बनी हैं 99 लाख 99 हजार 999 मूर्तियां? चौंका देगी यह वजह

उनाकोटी त्रिपुरा के कैलाशहर में स्थित एक प्राचीन और रहस्यमयी शिव तीर्थ है। हम आपको इस जगह का इत‍िहास बता रहे हैं।
Updated:- 2026-08-11, 16:12 IST
unakoti temple history

अगर आपको ऐसी जगह घूमना पसंद है जहां इत‍िहास, धर्म और नेचर की खूबसूरती सब कुछ एक साथ देखने को म‍िले, तो त्र‍िपुरा का उनाकोटी आपके ल‍िए खास जगह हो सकती है। यहां पहाड़ों की चट्टानों पर भगवान श‍िव समेत कई देवी-देवताओं की मूर्तियां बनाई गई हैं। इसी कारण दूर-दूर से लोग इस जगह को देखने के ल‍िए आते हैं। उनाकोटी का नाम सुनते ही सबसे पहले द‍िमाग में एक ही बात आती है क‍ि यहां 99 लाख 99 हजार 999 मूर्तियां हैं। यानी एक करोड़ से सिर्फ एक कम।

इसकी कहानी बहुत ही द‍िलचस्‍प है। दरअसल, इतनी बड़ी संख्या वाली बात एक पुरानी लोककथा से जुड़ी है। इन मूर्तियों में भगवान शिव, गणेश, दुर्गा, गंगा और दूसरे देवी-देवताओं की आकृतियां देखने को मिलती हैं। आइए जानते हैं कि उनाकोटी आखिर इतना खास क्यों है और 99 लाख 99 हजार 999 मूर्तियों वाली कहानी कहां से आई।

उनाकोटी नाम का क्‍या है मतलब?

आपको बता दें क‍ि उनाकोटी नाम को लेकर ही इस जगह की सबसे बड़ी खासियत छिपी हुई है। ‘उना’ का मतलब होता है एक कम और ‘कोटी’ का मतलब करोड़ होता है। यानी उनाकोटी का सीधा मतलब हुआ एक करोड़ से एक कम। इसी नाम की वजह से यहां 99 लाख 99 हजार 999 मूर्तियों वाली बात काफी मशहूर हो गई, लेकिन इसे पुरातत्व विभाग द्वारा गिनकर साबित की गई मूर्तियों की संख्या नहीं माना जाता है। यह मुख्य रूप से इस जगह से जुड़ी पुरानी लोककथा का ही हिस्सा है।

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99 लाख 99 हजार 999 मूर्तियों की कहानी क्या है?

इन मूर्तियों को लेकर एक कहानी बताई जाती है। बताया जाता है क‍ि उनाकोटी से जुड़ी एक पुरानी कहानी भगवान शिव और दूसरे देवी-देवताओं को लेकर है। एक बार की बात है जब बहुत सारे देवी-देवता एक साथ यहां रुके थे। उन्हें किसी दूसरी जगह की ओर जाना था। ऐसे में चलते-चलते रात हो गई। तब भगवान शिव ने अपने साथ आए सभी देवी-देवताओं से कहा कि अभी यहां साे जाते हैं।

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देवी-देवताओं की हैं मूर्तियां

सुबह सूरज निकलने से पहले सभी को उठ जाना है, ताकि आगे की यात्रा शुरू की जा सके, लेकिन सुबह जब सूरज निकलने का समय हुआ तो भगवान शिव को छोड़कर बाकी कोई भी नहीं उठा। यह देखकर भगवान शिव नाराज हो गए। उन्होंने बाकी सभी को पत्थर बन जाने का श्राप दे दिया। इसी कहानी को उनाकोटी की 99 लाख 99 हजार 999 मूर्तियों से जोड़ा जाता है। यानी मान्यता है कि यहां मौजूद पत्थर की मूर्तियां उन्हीं देवी-देवताओं की हैं।

कहां है उनाकोटी?

उनाकोटी त्रिपुरा के उत्तर-पूर्वी (North-East) हिस्से में है। यह कैलाशहर से करीब 8 किलोमीटर की दूरी पर है। वहीं त्रिपुरा की राजधानी अगरतला से यह जगह करीब 185 किलोमीटर की दूरी पर है। बताया जाता है क‍ि यह पूरा इलाका पहाड़ों, पेड़ों और पानी की धाराओं से घिरा हुआ है। इसलिए यहां पहुंचने के बाद सिर्फ चट्टानों पर बनी मूर्तियां ही नहीं, बल्कि आसपास की नेचुरल ब्‍यूटी भी देखने को म‍िलती है।

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चट्टानों पर बनी हैं शिव की विशाल मूर्तियां

उनाकोटी की सबसे खास चीज यहां की बड़ी-बड़ी चट्टानों पर बनीं मूर्तियां हैं। यानी मूर्तियों को अलग से पत्थर लाकर नहीं बनाया गया बल्कि पहाड़ की चट्टानों को ही काटकर मूर्तियां बनाई गई हैं। यहां सबसे प्रमुख मूर्तियों में से एक भगवान शिव की विशाल प्रतिमा है, जिसे उनकोटिश्वर काल भैरव के नाम से जाना जाता है। इस मूर्ती की ऊंचाई करीब 30 फीट ऊंची बताई जाती है।

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भगवान श‍िव की बड़ी सी मूर्ती पर माथे पर तीसरी आंख दिखाई देती है। उनके सिर पर बना मुकुट और कानों के गहने भी खास तरह के हैं। इन चीजों में वहां के आदिवासी कला का भी असर देखने को मि‍लता है। ऐसा भी कहा जाता है क‍ि समय-समय पर भारी बारिश हुई और भूकंप भी आए लेक‍िन इन चट्टानों पर बनी मूर्तियों को कुछ नुकसान भी नहीं हुआ।

इन देवी-देवताओं की भी हैं मूर्तियां

अगर आपको लगता है क‍ि यहां स‍िर्फ भगवान शि‍न की मूर्ती है, तो ऐसा नहीं है। यहां और भी देवी-देवताओं की मूर्तियां देखने को मि‍लती हैं। जैसे-

  • उनाकोटी में भगवान गणेश जी की भी बड़ी-बड़ी मूर्तियां बनी हुई हैं। एक जगह पर गणेश जी की तीन विशाल आकृतियों का समूह दिखाई देता है। इनमें एक बैठी हुई गणेश की मूर्ति करीब 22 फीट ऊंची बताई गई है। बाकी दो हाथी के सिर वाली मूर्ती खड़ी हुई अवस्था में हैं।
  • भगवान गणेश के अलावा देवी दुर्गा की भी मूर्ती को यहां देखा जा स‍कता है। एक जगह उन्हें शेर पर खड़े हुए दिखाया गया है।
  • भगवान श‍िव, गणेश जी और मां दुर्गा के अलावा भगवान विष्णु, देवी गंगा और उमा-महेश्वर की मूर्तियां भी मौजूद हैं।

उनकोटी में द‍िखते हैं भगवान शिव के कई अलग रूप

उनकोटी में भगवान शि‍व के अलग-अलग रूपों की मूर्तियां भी बनाई गई हैं। ये द‍िखने में भी काफी सुंदर हैं।

  • एक बड़ी मूर्ती को गंगाधर शिव के रूप में पहचाना जाता है।
  • कुछ जगहों पर तीन आंखों वाले शिव के चेहरे भी बनाए गए हैं।
  • एक जगह भगवान शिव और माता पार्वती को अलग रूप में दिखाने वाली मूर्तियां भी हैं।
  • एक और चट्टान पर शिव द्वारा कामदेव को भस्म करने वाली कहानी से जुड़ा नजारा भी देखने को म‍िलता है।

यानी यहां घूमते समय आपको सिर्फ अलग-अलग मूर्तियां नहीं दिखतीं, बल्कि हिंदू धर्म से जुड़ी कई कहानियों को पत्थरों पर बने रूप में दि‍खाया जाता है।

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उनाकोटी कितनी पुरानी है?

UNESCO के मुताबिक, यहां पत्थरों को काटकर बनाई गई मुख्य मूर्तियां लगभग 8वीं से 9वीं सदी पुरानी की मानी जाती हैं। यह समय माणिक्य राजाओं के शासन से पहले का बताया जाता है। यानी इन चट्टानों पर बनी कला करीब 1200 साल या उससे भी पुरानी हैं।

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कई धर्मों की द‍िखती है झलक

उनाकोटी की मूर्तियों में अलग-अलग धर्मों और मान्यताओं की झलक देखने को मिलती है। यहां कुछ मूर्तियों पर बौद्ध कला की छाप साफ दिखाई देती है। जैसे उनके चेहरे का शांत भाव और ध्यान में बैठने का तरीका भगवान बुद्ध की मूर्तियों जैसा लगता है। इसके अलावा यहां देवी पूजा, तंत्र-मंत्र और नाथ योगी परंपराओं की झलक भी मिलती है। इससे पता चलता है कि यह इलाका पुराने समय में अलग-अलग धार्मिक परंपराओं के संपर्क में रहा होगा।

देखने लायक है यहां की खूबसूरती

उनाकोटी की खूबसूरती सिर्फ यहां की मूर्तियों की वजह से ही नहीं ह‍ै। ये सभी आकृतियां हरे-भरे पहाड़ी इलाके के बीच बनी हुई हैं। वहीं, पहाड़ों के बीच से एक छोटी पानी की धारा भी बहती है। नीचे की तरफ आकर यह पानी कुछ कुंडों में ग‍िरता है। यही वजह है कि यहां घूमते समय आपको एक तरफ बड़ी-बड़ी पत्थर की मूर्तियां दिखाई देती हैं और दूसरी तरफ हरियाली, पहाड़ और पानी का खूबसूरत नजारा भी देखने को मिलता है।

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उनाकोटी में हर साल लगता है बड़ा मेला

आपको बता दें क‍ि उनाकोटी में हर साल अशोकाष्टमी मेला लगता है। यह चैत्र महीने में होता है, जो आमतौर पर मार्च-अप्रैल के आसपास पड़ता है। इस मेले में बड़ी संख्या में लोग आते हैं।

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Source- https://whc.unesco.org/en/tentativelists/6628/

https://unakoti.nic.in/tourist-place/unakoti-heritage-site/

https://www.incredibleindia.gov.in/en/tripura/unakoti/rock-cut-heritage

Image Credit- UNESCO/Incredible India/Unakoti District

FAQ
उनाकोटी जाने का सही समय?
अक्टूबर से मार्च के बीच जाएं, इस दौरान मौसम सुहावना रहता है।
उनाकोटी में एंट्री फीस कितनी?
यहां प्रति व्यक्ति लगभग ₹20 की एंट्री टिकट लगती है। 
उनाकोटी में पास का रेलवे स्टेशन कौन-सा है?
कुमारघाट सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है, जो लगभग 20 किलोमीटर दूर है। 
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