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Janmashtami 2026: जन्माष्टमी पर करें महाराष्ट्र के पंढरपुर धाम के दर्शन, पढ़ें ईंट पर खड़े भगवान विट्ठल की गाथा

Janmashtami 2026 पर महाराष्ट्र के सोलापुर स्थित पंढरपुर धाम के दर्शन जरूर करें, जो भगवान विट्ठल और देवी रुक्मिणी का पवित्र स्थल है। जानते हैं, इसके बारे में सबकुछ...
Updated:- 2026-09-01, 21:38 IST
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जन्माष्टमी का पावन पर्व भगवान श्री कृष्ण की भक्ति में डूबने का सबसे श्रेष्ठ समय माना जाता है। यदि आप इस जन्माष्टमी किसी विशेष और दिव्य स्थान के दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में स्थित पंढरपुर धाम एक बेहतरीन ऑप्शन है। चंद्रभागा नदी के सुरम्य तट पर बसा पंढरपुर, भगवान विट्ठल और उनकी पत्नी देवी रुक्मिणी का आराधना केंद्र है। भगवान विट्ठल को श्री हरि विष्णु और बाल गोपाल कृष्ण का ही एक रूप माना जाता है। मराठी संस्कृति में इन्हें 'विठोबा' भी कहा जाता है। मान्यता है कि चंद्रभागा नदी में डुबकी लगाने से भक्तों के समस्त पाप धुल जाते हैं। जानते हैं, इस मंदिर के बारे में सबकुछ...

ईंट पर क्यों खड़े हैं भगवान विट्ठल?

भगवान विट्ठल के ईंट पर विराजमान होने के पीछे प्रसंग छिपा है। पौराणिक कथा के अनुसार, पुंडलिक नाम के एक परम भक्त अपने माता-पिता की सेवा में पूरी तरह लीन रहते थे। उनकी सेवा भावना से प्रसन्न होकर स्वयं भगवान श्री कृष्ण उनके द्वार पर प्रकट हुए। जब भगवान पहुंचे, तब पुंडलिक अपने पिता के पैर दबा रहे थे। ईश्वर के आने पर भी उन्होंने अपने माता-पिता की सेवा को बीच में छोड़ना उचित नहीं समझा।

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पुंडलिक ने भगवान के खड़े होने के लिए पास में रखी एक ईंट उनकी ओर खिसका दी और निवेदन किया कि वे तब तक इसी ईंट पर प्रतीक्षा करें जब तक कि वे अपने माता-पिता की सेवा पूरी न कर लें। भगवान अपने भक्त की इस निस्वार्थ सेवा से इतने प्रसन्न हुए कि वे दोनों हाथ कमर पर रखकर उसी ईंट पर मुस्कुराते हुए खड़े हो गए। तब से लेकर आज तक भगवान विट्ठल अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए उसी ईंट पर विराजमान हैं।

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वारकरी संप्रदाय और पांडुरंग भक्ति

पंढरपुर का आध्यात्मिक वातावरण सदियों पुरानी भक्ति परंपराओं, अभंगों और वारकरी आंदोलन से जीवंत रहता है।

  • वारकरी परंपरा: महाराष्ट्र में वारकरी संप्रदाय के लोग हर वर्ष पैदल यात्रा करके पंढरपुर पहुंचते हैं। हाथ में ताल-मंजीरे लिए और सिर पर तुलसी का पौधा रखे हजारों श्रद्धालु 'ज्ञानबा-तुकाराम' और 'विट्ठल-विट्ठल' का कीर्तन करते हुए आगे बढ़ते हैं। वारकरी यात्रा में जाति, धर्म या अमीर-गरीब का कोई भेदभाव नहीं होता। हर कोई एक-दूसरे के चरण स्पर्श करता है क्योंकि सबमें विट्ठल का ही रूप देखा जाता है।
  • आषाढ़ी और कार्तिकी एकादशी: वैसे तो पूरे साल पंढरपुर में भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन आषाढ़ी और कार्तिकी एकादशी के अवसर पर यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु एकत्रित होते हैं।

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पंढरपुर यात्रा की योजना कैसे बनाएं?

यदि आप परिवार या बुजुर्गों के साथ पंढरपुर धाम जा रहे हैं, तो यात्रा को सुखद बनाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:

  • यात्रा शुरू करने से पहले मंदिर प्रशासन के ताजा नियमों और आरती के समय की जानकारी जरूर लें।
  • भीड़भाड़ वाले दिनों में सुरक्षा जांच और कतार प्रणाली का पालन करें।
  • बुजुर्गों और बच्चों के स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए आवश्यक दवाएं और पानी साथ रखें।

रुकने और खाने की व्यवस्था

मंदिर के पास कई धर्मशालाएं, भक्त निवास और निजी होटल उपलब्ध हैं। आषाढ़ी एकादशी या जन्माष्टमी जैसे बड़े त्योहारों के दौरान कमरे की बुकिंग पहले से करा लेना समझदारी होगी। शहर में सात्विक और पारंपरिक महाराष्ट्रीयन भोजन आसानी से मिल जाता है।

कैसे पहुंचे पंढरपुर?

मंदिर तक पहुंचने के लिए आप ट्रेन और प्राइवेट व्हीकल दोनों के जरिये यहां पहुंच सकते हैं-

  • रेल मार्ग: पंढरपुर का अपना रेलवे स्टेशन है जो महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
  • सड़क मार्ग: सोलापुर, पुणे, मुंबई और कोल्हापुर से पंढरपुर के लिए नियमित बसें और टैक्सी सेवाएं उपलब्ध हैं।

निष्कर्ष

पंढरपुर का विट्ठल रुक्मिणी मंदिर केवल एक दर्शनीय स्थल नहीं है, बल्कि यह भक्ति, सेवा और समर्पण का केंद्र है। ईंट पर खड़े भगवान विट्ठल हमें सिखाते हैं कि माता-पिता की सेवा ही ईश्वर की सबसे बड़ी पूजा है।

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Images: vitthalrukminimandir.org

FAQ
भगवान विट्ठल ईंट पर क्यों खड़े हैं?
भक्त पुंडलिक की माता-पिता भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान प्रकट हुए थे और उनके द्वारा दी गई ईंट पर ही विराजमान हो गए।
पंढरपुर वारी यात्रा क्या है?
वारकरी संप्रदाय के श्रद्धालुओं द्वारा हर साल विट्ठल नाम का कीर्तन करते हुए पंढरपुर तक की जाने वाली पैदल यात्रा को 'वारी' कहते हैं।
पंढरपुर मंदिर में दर्शन का समय क्या है?
सामान्य दिनों में पंढरपुर मंदिर में दर्शन सुबह 4:00 बजे से लेकर रात 11:00 बजे तक किए जा सकते हैं।
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