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बिहार का वो अनोखा मंदिर, जहां देवी-देवता नहीं; पूजे जाते हैं सगे भाई-बहन

बिहार के सीवान जिले में एक ऐसा मंदिर पर जहां पर दुनियाभर के लोग भगवान की नहीं बल्कि भाई-बहन की पूजा के लिए आते हैं। नीचे पढ़ें इसके पीछे की कहानी।
Updated:- 2026-08-21, 19:33 IST
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Bhaiya Bahini Temple Story: बिहार के सीवान जिले के महाराजगंज में स्थित भैया-बहिनी मंदिर, भाई-बहन के अटूट प्रेम और बलिदान का प्रतीक है। इस मंदिर में रक्षाबंधन से एक दिन से हजारों की संख्या में भीड़ उमड़ती है। इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां किसी भी देवी-देवता की तस्वीर और मूर्ति नहीं है। नीचे में पढ़ें इसके पीछे की कहानी। आज के रक्षाबंधन स्पेशल स्टोरी में हम आपको भैया-बहिनी मंदिर की मान्यता, लोकेशन और कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं।

भैया-बहिनी मंदिर को लेकर पौराणिक कहानी क्या है?

पौराणिक कथा के अनुसार, मुगल काल में एक भाई अपनी बहन को उसके ससुराल से विदा कराकर अपने घर ले जा रहा था। रास्ते में कुछ मुगल सैनिकों की बुरी नजर उस बहन पर पड़ गई और वे उसके साथ बदतमीजी करने लगे। भाई ने अपनी बहन की इज्जत बचाने के लिए अकेले ही उन सैनिकों का डटकर मुकाबला किया।

bhaiya bahini mandir ki kahani

अकेले होने के कारण जब भाई को लगा कि वह हार रहा है, तब बहन ने अपनी पवित्रता बचाने के लिए धरती माता से प्रार्थना की। मान्यता है कि उसी समय धरती फट गई और भाई-बहन दोनों उसमें समा गए। बाद में उसी जगह पर दो बरगद के पेड़ उगे जो आपस में जुड़े हुए हैं।

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मिट्टी का टीला और बरगद के पेड़ की होती है पूजा

इस मंदिर के अंदर किसी भगवान की मूर्ति नहीं है बल्कि बीच में मिट्टी का एक पिंड या टीला बना हुआ है जिसे भाई-बहन का प्रतीक माना जाता है। मंदिर परिसर और उसके आसपास कई बड़े बरगद के पेड़ हैं, जो आपस में इस तरह लिपटे हुए हैं कि देखने वाले को ऐसा प्रतीत होता है जैसे वे एक-दूसरे की रक्षा कर रहे हों। स्थानीय लोग इन्हीं पेड़ों और मिट्टी के टीले को भाई-बहन का रूप मानकर पूरी श्रद्धा के साथ पूजते हैं।

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रक्षाबंधन से एक दिन पहले उमड़ती है भारी भीड़

रक्षाबंधन पर उमड़ती है भारी भीड़ भाई-बहन के इस पवित्र रिश्ते और बलिदान के प्रतीक इस स्थल पर रक्षाबंधन के पावन पर्व पर एक अलग ही रौनक देखने को मिलती है। इस दिन सीवान के अलावा बिहार के दूसरे जिलों और पड़ोसी राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश व झारखंड से भी हजारों की संख्या में बहनें यहां पहुंचती हैं।

बहनें मंदिर के इन पेड़ों और मिट्टी के टीले पर सबसे पहले राखी चढ़ाती हैं और फिर अपने भाइयों की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और जीवनभर की सुरक्षा की मन्नत मांगती हैं।

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भारत देश में ऐसे तमाम मंदिर हैं, जिनकी अपनी एक अलग मान्यता है। इसके बारे में जब हम पढ़ते या फिर सुनते हैं, तो हम हैरान हो जाते हैं। इसी में से एक है बिहार का भाइया-बहिनी मंदिर। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से।   

Image Credit- AI, Shutterstock


FAQ
रक्षाबंधन पर कौन सी कहानी है?
रक्षाबंधन के त्योहार से जुड़ी एक नहीं बल्कि कई प्रसिद्ध पौराणिक कहानियां जुड़ी हैं, जिनमें भगवान कृष्ण और द्रौपदी की कहानी, राजा बलि और माता लक्ष्मी की कथा जुड़ी है।
सबसे पहले राखी किसने बांधी थी?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सबसे पहले माता लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षा सूत्र बांधा था। 
भगवान गणेश को राखी किसने बांधी?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान गणेश को उनकी बहन मानसा देवीया मनसा देवी ने राखी बांधी थी।
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