बिहार का वो अनोखा मंदिर, जहां देवी-देवता नहीं; पूजे जाते हैं सगे भाई-बहन

Bhaiya Bahini Temple Story: बिहार के सीवान जिले के महाराजगंज में स्थित भैया-बहिनी मंदिर, भाई-बहन के अटूट प्रेम और बलिदान का प्रतीक है। इस मंदिर में रक्षाबंधन से एक दिन से हजारों की संख्या में भीड़ उमड़ती है। इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां किसी भी देवी-देवता की तस्वीर और मूर्ति नहीं है। नीचे में पढ़ें इसके पीछे की कहानी। आज के रक्षाबंधन स्पेशल स्टोरी में हम आपको भैया-बहिनी मंदिर की मान्यता, लोकेशन और कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं।
भैया-बहिनी मंदिर को लेकर पौराणिक कहानी क्या है?
पौराणिक कथा के अनुसार, मुगल काल में एक भाई अपनी बहन को उसके ससुराल से विदा कराकर अपने घर ले जा रहा था। रास्ते में कुछ मुगल सैनिकों की बुरी नजर उस बहन पर पड़ गई और वे उसके साथ बदतमीजी करने लगे। भाई ने अपनी बहन की इज्जत बचाने के लिए अकेले ही उन सैनिकों का डटकर मुकाबला किया।

अकेले होने के कारण जब भाई को लगा कि वह हार रहा है, तब बहन ने अपनी पवित्रता बचाने के लिए धरती माता से प्रार्थना की। मान्यता है कि उसी समय धरती फट गई और भाई-बहन दोनों उसमें समा गए। बाद में उसी जगह पर दो बरगद के पेड़ उगे जो आपस में जुड़े हुए हैं।
इसे भी पढ़ें- UP का अनोखा गांव, जहां रक्षाबंधन पर सूनी रहती हैं भाइयों की कलाइयां; जानें क्या है इसके पीछे का खौफ?
मिट्टी का टीला और बरगद के पेड़ की होती है पूजा
इस मंदिर के अंदर किसी भगवान की मूर्ति नहीं है बल्कि बीच में मिट्टी का एक पिंड या टीला बना हुआ है जिसे भाई-बहन का प्रतीक माना जाता है। मंदिर परिसर और उसके आसपास कई बड़े बरगद के पेड़ हैं, जो आपस में इस तरह लिपटे हुए हैं कि देखने वाले को ऐसा प्रतीत होता है जैसे वे एक-दूसरे की रक्षा कर रहे हों। स्थानीय लोग इन्हीं पेड़ों और मिट्टी के टीले को भाई-बहन का रूप मानकर पूरी श्रद्धा के साथ पूजते हैं।

रक्षाबंधन से एक दिन पहले उमड़ती है भारी भीड़
रक्षाबंधन पर उमड़ती है भारी भीड़ भाई-बहन के इस पवित्र रिश्ते और बलिदान के प्रतीक इस स्थल पर रक्षाबंधन के पावन पर्व पर एक अलग ही रौनक देखने को मिलती है। इस दिन सीवान के अलावा बिहार के दूसरे जिलों और पड़ोसी राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश व झारखंड से भी हजारों की संख्या में बहनें यहां पहुंचती हैं।
बहनें मंदिर के इन पेड़ों और मिट्टी के टीले पर सबसे पहले राखी चढ़ाती हैं और फिर अपने भाइयों की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और जीवनभर की सुरक्षा की मन्नत मांगती हैं।
इसे भी पढ़ें- फिल्मों में ही नहीं, अब हकीकत में देखें हवा में लटकता बांस का पुल, जानें इस अनोखी जगह के बारे में
भारत देश में ऐसे तमाम मंदिर हैं, जिनकी अपनी एक अलग मान्यता है। इसके बारे में जब हम पढ़ते या फिर सुनते हैं, तो हम हैरान हो जाते हैं। इसी में से एक है बिहार का भाइया-बहिनी मंदिर। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से।
Image Credit- AI, Shutterstock
- रक्षाबंधन पर कौन सी कहानी है?
- रक्षाबंधन के त्योहार से जुड़ी एक नहीं बल्कि कई प्रसिद्ध पौराणिक कहानियां जुड़ी हैं, जिनमें भगवान कृष्ण और द्रौपदी की कहानी, राजा बलि और माता लक्ष्मी की कथा जुड़ी है।
- सबसे पहले राखी किसने बांधी थी?
- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सबसे पहले माता लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षा सूत्र बांधा था।
- भगवान गणेश को राखी किसने बांधी?
- पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान गणेश को उनकी बहन मानसा देवीया मनसा देवी ने राखी बांधी थी।
हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia.com पर हमसे संपर्क करें।