Fri Sep 11, 2026 | Updated 07:26 PM IST

चूहा मरा तो देना होगा सोना, जानिए राजस्थान के इस अजूबे मंदिर का सबसे बड़ा रहस्य

घर में अगर एक चूहा आ जाए, तो हम उसे बाहर निकालने के हजार तरीके आजमाते हैं। मगर जानकर हैरानी होगी कि भारत में एक ऐसा मंदिर है जहां पर चूहों को राजसी ठाठ से रखा जाता है। साथ ही इनकी विशेष रुप से पूजा की जाती है। नीचे लेख में जानें पूरी कहानी।
Updated:- 2026-07-31, 19:10 IST
Karni Mata Temple History

राजस्थान के बीकानेर के पास देशनोक में स्थित करणी माता मंदिर भारत के सबसे रहस्यमयी और अनोखे धार्मिक स्थलों में से एक है। इसे मुख्य रूप से चूहों वाले मंदिर के रूप में दुनिया भर में जाना जाता है। यहां पर 1 नहीं बल्कि 25 हजार चूहे हैं, जिनके बीच से होते हुए आपको मंदिर के दर्शन करने होते हैं। खास बात, जिसे जानने के बाद आप सोच में पड़ जाएंगी और वह है कि अगर इस दौरान पैर पड़ने से किसी चूहे की मौत हो जाती है, तो आपको सोना चढ़ाना पड़ता है। इस पावन स्थल पर हर साल देश-विदेश से लाखों पर्यटक और श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते हैं। नीचे लेख में जानें इसके पीछे की कहानी और इस मंदिर का इतिहास।

करणी माता मंदिर का पौराणिक इतिहास

किंवदंतियों के अनुसार, करणी माता एक महान संत थीं, जिन्होंने चौदहवीं शताब्दी में अपना जीवन लोक कल्याण और चमत्कारिक कार्यों के लिए समर्पित किया था।

karani mata mandir

कथा के अनुसार, माता के एक भक्त बच्चे की मृत्यु हो जाने पर उन्होंने उसे जीवित करने का प्रयास किया था। जब वह असफल रहीं, तो उन्होंने मृत्यु के देवता यमराज से विनती की। यमराज ने इस शर्त पर बच्चे का जीवन लौटाया कि उनके सभी भक्त अगली योनि में चूहों के रूप में करणी माता के मंदिर में निवास करेंगे। तभी से इस पवित्र स्थान पर हजारों चूहे रहते हैं।

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करणी माता मंदिर में कितने चूहे हैं?

बीकानेर स्थित करणी माता चूहा मंदिर में 25,000 से अधिक चूहे रहते हैं। मंदिर में प्रवेश करते ही आपको वे लगभग हर जगह नजर आएंगे। तारों पर लटके हुए, दरवाजों के किनारे, फर्श पर इधर-उधर भागते हुए हर जगह नजर आते हैं।

rajasthan miracle temple

  • राजस्थान में करणी माता के कई अन्य मंदिर भी हैं। मगर वास्तव में उदयपुर और अलवर के करणी माता मंदिर काफी लोकप्रिय हैं। हालांकि, देशनोक स्थित मंदिर इन सभी मंदिरों में एकमात्र चूहे की आकृति वाला मंदिर है।
  • ऐसा कहा जाता है कि करणी माता ने जोधपुर के प्रसिद्ध मेहरानगढ़ किले और बीकानेर के जूनागढ़ किले की नींव रखी थी ।
  • देशनोक करणी माता मंदिर के अंदर बड़ी संख्या में चूहे होने के बावजूद, मंदिर परिसर के बाहर एक भी चूहा नहीं पाया जाता है। वे सभी मंदिर के अंदर ही रहते हैं।
  • देशनोक स्थित इस करणी माता मंदिर में ठोस चांदी के दरवाजे और खिड़कियां हैं।

चूहे की अगर पैर से दब कर मौत हो जाए, चढ़ना होता है सोना? 

यदि आप गलती से किसी चूहे को कुचल दें या मार दें, तो आपको प्रायश्चित के रूप में शुद्ध सोने का एक चूहा दान करना होगा। और वह भी, उसका आकार मरे हुए चूहे के आकार के बराबर होना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि इन चूहों को जो भी भोजन अर्पित किया जाता है और बच जाता है, वह बहुत शुभ होता है और भक्त वास्तव में उसे वापस ले जाकर खा लेते हैं।

मंदिर के पवित्र चूहे और उनकी अनोखी मान्यताएं

इस मंदिर में रहने वाले चूहों को स्थानीय भाषा में 'काबा' कहा जाता है। मंदिर के पुजारी और यहां आने वाले श्रद्धालु इन चूहों को दूध, अनाज और प्रसाद खिलाकर इनकी देखभाल करते हैं। इन चूहों को देखना या इनका पैरों के ऊपर से गुजरना बेहद शुभ और सौभाग्यशाली माना जाता है। मान्यता है कि यदि किसी को दुर्लभ सफेद चूहा दिख जाए, तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

karni mata mandir rats care

राजस्थानी वास्तुकला और मंदिर परिसर की विशेषताएं

मंदिर की बाहरी और भीतरी बनावट राजस्थानी स्थापत्य कला का उदाहरण है, जिसमें शानदार संगमरमर का काम, खूबसूरत नक्काशी और भव्य चांदी के दरवाजे शामिल हैं। मंदिर परिसर के निकट ही कपिल सरोवर नाम का पवित्र कुंड मौजूद है, जिसके जल में चमत्कारिक और औषधीय गुण होने की मान्यता है।

मंदिर घूमने आने वाले पर्यटकों के लिए जरूरी निर्देश

मंदिर के पवित्र और धार्मिक माहौल को बनाए रखने के लिए परिसर के अंदर प्रवेश करने से पहले सभी सैलानियों को अपने जूते-चप्पल बाहर ही उतारने होते हैं। मंदिर के भीतर श्रद्धा और सम्मान प्रकट करने के लिए आगंतुकों को अपना सिर ढककर रखना उचित माना जाता है।

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करणी माता का यह ऐतिहासिक मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन परंपराओं और अटूट विश्वास का जीता-जागता प्रतीक है। यहां का माहौल और चूहों के प्रति लोगों की अनोखी भक्ति इसे दुनिया भर के पर्यटकों के लिए एक यादगार और कभी न भूलने वाला अनुभव बनाती है। अगर आपको यह लेख अच्छा है, तो इसे शेयर करें। मंदिर के रहस्य से जुड़े आर्टिकल के बारे में जानने के लिए जुड़े रहे हरजिंदगी के साथ।

 Image Credit- Rajasthan tourism website, wikipedia


FAQ
करणी माता मंदिर में चूहों को मारने पर पाबंदी क्यों है और इन्हें क्या कहा जाता है?
 मंदिर के चूहों को स्थानीय भाषा में काबा कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, ये चूहे करणी माता के परिवार और चारण वंश के लोग हैं, जिन्हें पुनर्जन्म में यह योनि प्राप्त हुई है।
क्या चूहों का जूठा प्रसाद खाने से लोग बीमार नहीं पड़ते?  
इस मंदिर में चूहों द्वारा खाया या कुतरा गया प्रसाद ही भक्तों में बांटा जाता है। चमत्कारिक रूप से, इतनी बड़ी संख्या में चूहों के बीच रहने और उनका जूठा प्रसाद ग्रहण करने के बावजूद आज तक कोई भी श्रद्धालु यहां बीमार नहीं पड़ा है।
 करणी माता का मंदिर कितने बजे बंद होता है?
करणी माता मंदिर सामान्य दिनों में रात को 10:00 बजे बंद होता है। यह मंदिर प्रतिदिन सुबह 4:00 बजे खुलता है और रात 10:00 बजे तक दर्शन के लिए खुला रहता है।
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