मानसून में भारत के इन 3 गांवों में घूमने का बना लें प्लान, नजारा दिखता है एकदम अलग

अगर आपको भीड़-भाड़ वाले हिल स्टेशन के बजाय ऐसी जगह घूमना पसंद हैं, जहां चारों ओर हरियाली, बादल, झरने और सुकून हो, तो इस बार आप मानसून में भारत के कुछ खूबसूरत गांव एक्सप्लोर कर सकती हैं। दरअसल, बारिश के मौसम में इन गांवों का नजारा पूरी तरह बदल जाता है। पहाड़ हरे रंग की चादर ओढ़ लेते हैं, बादल घरों के बीच से गुजरते नजर आते हैं और हर तरफ आपको ताजगी का एहसास हो सकता है।
यही वजह है कि हर साल मानसून में बड़ी संख्या में लोग इन जगहों की ओर रुख करते हैं। अगर आप भी इस बार कुछ अलग एक्सपीरियंस लेना चाहती हैं, तो मेघालय का मावल्यान्नॉन्ग, नागालैंड का खोनोमा और अरुणाचल प्रदेश की जीरो वैली आपके लिए बेस्ट रहेगी। आइए जानते हैं कि इन तीनों गांवों में ऐसा क्या खास है, जो इन्हें मानसून में और भी खूबसूरत बना देता है?
मावल्यान्नॉन्ग (मेघालय)
ये तो आपने जरूर सुना होगा या देखा भी होगा कि मेघालय का मावल्यान्नॉन्ग गांव अपनी साफ-सफाई के लिए पूरी दुनियाभर में फेमस है। इसकी गिनती एशिया के सबसे साफ गांवों में होती है। यहां के लोग पूरे गांव को मिलकर साफ रखते हैं। मानसून के दौरान यहां चारों तरफ हरियाली छा जाती है। पेड़-पौधे, फूल और बारिश से धुले रास्ते गांव की खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं। यहां देखने के लिए बहुत कुछ हैं। जैसे-
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- लिविंग रूट ब्रिज
- बांस से बना स्काई व्यू पॉइंट
- छोटे-छोटे झरने
- खासी गांव की लाइफस्टाइल
अगर आपको नेचर फोटोग्राफी पसंद है, तो यह गांव आपके लिए बेस्ट रहेगा।
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खोनोमा (नागालैंड)
नागालैंड का खोनोमा गांव भी अपनी नेचुरल ब्यूटी और पर्यावरण संरक्षण के लिए जाना जाता है। इसे भारत के पहले ग्रीन विलेज में भी गिना जाता है। बारिश के मौसम में यहां की सीढ़ीदार वाली खेती, पहाड़ और जंगल बहुत ही खूबसूरत नजर आने लगते हैं। बादलों से घिरे पहाड़ भी इस गांव की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं। यहां आप कई चीजें कर सकते हैं। जैसे-
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- गांव में पैदल वॉक करना
- सीढ़ीदार खेत देखना
- लोकर नागा कल्चर को करीब से जानना
- बर्ड वॉचिंग और नेचर वॉक
अगर आप शहर के शोर से दूर कुछ दिन शांति में बिताना चाहती हैं, तो बिना किसी झिझक के आप खोनोमा जा सकती हैं।
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जीरो (अरुणाचल प्रदेश)
अरुणाचल प्रदेश की जीरो वैली अपनी नेचुरल ब्यूटी और अपतानी जनजाति की अनोखी कल्चर के लिए मशहूर है। हालांकि लोग इसे अक्सर जीरो वैली कहते हैं, लेकिन यहां का गांव और आसपास का इलाका मानसून में बहुत ही सुंदर लगने लगता है। बारिश के दिनों में धान के खेत, पहाड़ और हल्का कोहरा मिलकर ऐसा नजारा बनाते हैं, जिसे देखकर मन एमदम खुश ही हो जाता है। यहां आप बहुत कुछ कर सकती हैं। जैसे-
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- हरे-भरे धान के खेतों को देखना
- अपतानी जनजाति के पारंपरिक गांव को एक्सप्लोर करना
- खूबसूरत पहाड़ी रास्ते
- लोकल बाजार और खाने का जायका लेना
अगर आपको भी खूबसूरत दुनिया देखनी है तो जीरो घूमने का प्लान बना लें।
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मानसून में इन गांवों की यात्रा करने से पहले जान लें ये बातें
मानसून में घूमना भले ही अच्छा लगता है, लेकिल इस दाैरान कुछ बातों का ध्यान भी आपको रखना चाहिए। जैसे-
- बारिश से बचने के लिए रेनकोट या अच्छी क्वालिटी की छतरी साथ रखें।
- फिसलन वाले रास्तों के लिए मजबूत ग्रिप वाले शूज ही पहनें।
- मौसम का अपडेट देखकर ही ट्रिप प्लान करें।
- पहाड़ी इलाकों में शाम जल्दी हो जाती है, इसलिए समय का भी ध्यान रखें।
- वहां के नियमों का पालन करें।
- प्लास्टिक या कचरा कहीं भी न फैलाएं, ताकि इन गांवों की सुंदरता बनी रहे।
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तो अगर आपका मन भी सिर्फ घूमने का नहीं, बल्कि नेचर के बीच कुछ शांत पल बिताने का है, तो मानसून में मावल्यान्नॉन्ग, खोनोमा और जीरो की ट्रिप प्लान कर सकती हैं। साथ ही अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
Image Credit- Incredible india/North East India Tourism
- पूर्वोत्तर भारत घूमने का बेस्ट टाइम?
- जुलाई से सितंबर मानसून के लिए बेस्ट है, लेकिन भारी बारिश का अपडेट देखकर ही निकलें।
- पूर्वोत्तर जाने के लिए परमिट चाहिए?
- हां, नागालैंड और अरुणाचल जाने के लिए भारतीय नागरिकों को भी ILP (परमिट) लेना पड़ता है।
- पूर्वोत्तर के गांवों में क्या खाएं?
- यहां उबली सब्जियां, चावल, सूप, बैम्बू शूट और ऑथेंटिक लोकल शाकाहारी-मांसाहारी खाना आसानी से मिलता है।
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