Ujjain Mahakal Holi: रंग-गुलाल नहीं, बाबा महाकाल की भस्म से शुरू होती है होली; जानें क्यों खास है उज्जैन का ये उत्सव?

Holi 2026: होली का त्योहार पूरी दुनिया में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस बार होली 4 मार्च को मनाई जा रही है। भारत में ऐसी कई जगहें हैं जहां पर होली अपने अंदाज में मनाई जाती है। बरसाने की होली तो पूरी दुनिया में बहुत फेमस है। इस दौरान दुनिया भर के लोग बरसाना पहुंचते हैं। वहीं, बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में भी होली की अलग रौनक देखने को मिलती है, लेकिन क्या आप जानती हैं कि सबसे पहली होली उज्जैन में ही खेली जाती है?
इसके पीछे एक बड़ी कहानी है। अगर आप अभी तक इसके बारे में नहीं जानती थीं, तो हम आपको इसके बारे में पूरी जानकारी देने जा रहे हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से -
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उज्जैन में होली का क्या महत्व है?
आपको बता दें कि उज्जैन में महाकाल मंदिर में होली खेलने का धार्मिक महत्व है। ये मंदिर 12 ज्योर्तिलिंगों में से एक है। यहां पर भस्म से होली खेली जाती है। इसी वजह से इसकी धार्मिक मान्यता बहुत ज्यादा है। यहां पर होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि भक्ति और आस्था से जुड़ा एक खास उत्सव है।
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यहां सबसे पहले क्यों शुरू होती है होली?
ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव समय के भी स्वामी हैं। किसी भी शुभ काम की शुरुआत भाेलेनाथ से आशीर्वाद लेकर ही की जाती है। यही कारण है कि होली की शुरुआत बाबा के दरबार से ही होती है। यहां पर होली की शुरुआत फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी से ही हो जाती है। इस दिन खास तरीके से बाबा महाकाल की आरती की जाती है, जिसे रंग और भस्म के साथ किया जाता है। यही कारण है कि उज्जैन की होली को देश में सबसे अलग माना जाता है।
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भस्म आरती की है खास परंपरा
जैसा कि आप सभी जानते हैं कि बाबा महाकाल के मंदिर में रोजाना सुबह भस्म आरती होती है, लेकिन होली के समय ये आरती और भी खास बन जाती है। इस दौरान बाबा महाकाल को पहले भस्म लगाया जाता है। उसके बाद चंदन, अबीर, गुलाल और फूलों से उनका श्रृंगार किया जाता है।
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देखने लायक होती है आस्था
रंग लगाने से पहले बाबा को भस्म इसलिए लगाया जाता है क्योंकि भगवान शिव को भस्म बहुत पसंद है। ये जीवन और मृत्यु के सत्य की याद दिलाती है। होली के मौके पर उज्जैन में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस दौरान ढोल-नगाड़ों की आवाज, हर हर महादेव के जयकारे और भक्ति का रंग देखने लायक होता है। अगर आप भी होली पर यहां जाना चाहती हैं तो जरूर जाएं।
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तो अगर आप होली को सिर्फ रंगों का त्योहार मानती हैं, तो एक बार उज्जैन की महाकाल होली देखने जरूर जाएं। यहां होली मस्ती के साथ-साथ आस्था, परंपरा और भगवान शिव के प्रति गहरे विश्वास का प्रतीक भी मानी जाती है।
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