9 छेदों वाली 'कनकना किंडी' से पूजे जाते हैं श्रीकृष्ण, अनोखी है उडुपी के कृष्ण मठ की कहानी

आप सभी ने भगवान कृष्ण के अलग-अलग मंदिरों में दर्शन किए होंगे, लेकिन कनार्टक के उडुपी में श्रीकृष्ण के दर्शन करने का तरीका अपने आपमें काफी खास है। यहां भगवान कृष्ण की मूर्ति को सीधे सामने से नहीं देखा जाता बल्कि एक खास खिड़की के जरिए उनके दर्शन किए जाते हैं। इस खिड़की को नवग्रह किटिकी कहा जाता है और इसमें नौ छेद हैं। यही वजह है कि उडुपी का श्रीकृष्ण मठ बाकी कृष्ण मंदिरों से अलग है।
इसके अलावा मंदिर से जुड़ी कनकदास की कहानी भी काफी दिलचस्प है। कहा जाता है कि भगवान कृष्ण ने अपने भक्त कनकदास को दर्शन देने के लिए अपना मुख खिड़की की तरफ कर लिया था। ऐसे में हम आपको जन्माष्टमी के मौके पर उडुपी के इस अनोखे कृष्ण मंदिर की पूरी कहानी बता रहे हैं। आइए जानते हैं-
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9 छेदों वाली खिड़की से होते हैं श्रीकृष्ण के दर्शन
उडुपी के श्रीकृष्ण मंदिर की सबसे खास बात यहां भगवान के दर्शन का तरीका ही है। मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की बाल रूप में पूजा की जाती है। यहां पर भक्त उन्हें सीधे सामने से नहीं देखते है बल्कि उन्हें नौ छेद वाली खिड़की के जरिए दर्शन कराया जाता है। इस खिड़की को नवग्रह किटिकी कहा जाता है। यह खिड़की भी बहुत खूबसूरत है और इस पर चांदी की लेयर चढ़ाई हुई है।
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क्या है कनकना किंडी की कहानी?
इस मंदिर से जुड़ी एक और कहानी भक्त कनकदास से जुड़ी है। बताया जाता है कि 16वीं सदी में कनकदास भगवान कृष्ण के दर्शन करने के लिए उडुपी पहुंचे थे। उस समय उन्हें मंदिर के अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली। इसके बाद कनकदास मंदिर के पीछे जाकर भगवान की भक्ति करने लगे। कहा जाता है कि उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर ही भगवान कृष्ण की मूर्ति घूम गई और उन्होंने पीछे की ओर बनी एक छोटी सी जगह से कनकदास को दर्शन दिए। इसी खिड़की को बाद में कनकना किंडी के नाम से जाना जाने लगा।
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श्रीकृष्ण की मूर्ती उडुपी कैसे पहुंची?
उडुपी के श्रीकृष्ण मठ की कहानी संत श्री माध्वाचार्य से भी जुड़ी हुई है। बताया जाता है कि एक बार समुद्र में एक जहाज तेज तूफान में फंस गया था। उस जहाज में चंदन की एक शिला थी, जिसमें श्रीकृष्ण की मूर्ति थी। माना जाता है कि श्री माध्वाचार्य ने अपनी आध्यात्मिक शक्ति से तूफान को शांत कराया और जहाज को सुरक्षित किनारे तक पहुंचा दिया।
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इसके बाद जहाज के कैप्टन ने उन्हें अपनी पसंद की कोई चीज लेने को कहा। तब उन्होंने उस चंदन की शिला को ले लिया। इसी के बाद उस मूर्ति को उडुपी लाया गया और मंदिर में स्थापित कर दिया गया। वहां जिस तालाब में मूर्ति को स्नान कराया गया, वह माधव सरोवर के नाम से फेमस हो गया।
उडुपी में नहीं है सिर्फ एक मंदिर
आपको बता दें कि श्रीकृष्ण मठ के आसपास कई दूसरे पुराने मंदिर भी हैं। इनमें अनंतेश्वर मंदिर और चंद्रमौलेश्वर मंदिर शामिल हैं। उडुपी की खास बात यह है कि यहां कई मंदिर एक-दूसरे के काफी पास हैं, इसलिए लोग एक ही ट्रिप में कई जगहों पर दर्शन करने चले जाते हैं। उडुपी के श्रीकृष्ण मठ की बात करें तो यह सिर्फ पूजा की जगह नहीं है। यह लंबे समय से धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों से जुड़ा रहा है। मंदिर के साथ आठ मठ भी हैं, जिन्हें अष्ट मठ कहा जाता है। ये मठ बारी-बारी से मंदिर की जिम्मेदारी संभालते हैं।
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अगर उडुपी जा रहे हैं तो ऐसे करें प्लान
अगर आप श्री कृष्ण मठ के दर्शन के लिए उडुपी जाने का प्लान बना रही हैं, तो मंदिर के साथ आसपास की जगहें भी देख सकती हैं। जैसे-
- श्रीकृष्ण मंदिर: सबसे पहले यहां भगवान कृष्ण के बाल रूप के दर्शन करें।
- अनंतेश्वर मंदिर: यह मंदिर कृष्ण मंदिर के आसपास ही है।
- चंद्रमौलेश्वर मंदिर: इसे भी उडुपी की मंदिर ट्रिप में शामिल कर सकती हैं।
- मालपे बीच: मंदिर दर्शन के बाद समुद्र किनारे समय बिताने के लिए जा सकती हैं।
- सेंट मैरी आइलैंड: मालपे से आगे इस जगह को भी एक्स्प्लोर कर सकती हैं।
मालपे बीच उडुपी से करीब 6 किलोमीटर की दूरी पर है और सेंट मैरी आइलैंड समेत कई जगहें उडुपी के आसपास ही घूमने के लिए बेस्ट हैं।
उडुपी कैसे पहुंचें?
उडुपी कर्नाटक राज्य में है। यहां पहुंचने के लिए आप ट्रेन और सड़क दोनों रास्ते जा सकती हैं। सबसे नजदीकी एयरपोर्ट मैंगलोर इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जो उडुपी से करीब 60 किलोमीटर दूर है। वहां से भी आप कैब या टैक्सी लेकर उडुपी पहुंच सकती हैं। अगर ट्रेन से जाना चाहती हैं तो उडुपी रेलवे स्टेशन भी है।
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Source-
https://karnatakatourism.org/en/attractions/udupi-sri-krishna-temple/
https://udipikrishnamutt.com/article/id/734/-shree-krishna-mutt-temple
Image Credit- AI/Karnataka Tourism
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