Janmashtami 2026: बांके बिहारी मंदिर में सिर्फ जन्माष्टमी की रात ही क्यों होती है मंगला आरती? जानें वजह

जन्माष्टमी आते ही मथुरा और वृंदावन में कृष्ण भक्ति का अलग ही रंग देखने को मिलता है। देशभर के कृष्ण मंदिरों में इस दिन खास पूजा और कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, लेकिन वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर की जन्माष्टमी कुछ खास मानी जाती है। यहां भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप यानी बांके बिहारी जी की पूजा की जाती है। खास बात यह है कि मंदिर में साल के बाकी दिनों में मंगला आरती नहीं होती, लेकिन जन्माष्टमी के मौके पर रात में मंगला आरती की जाती है।
यही वजह है कि इस आरती को देखने के लिए बड़ी संख्या में भक्त वृंदावन आते हैं। आखिर ऐसा क्यों है? जब रोज सुबह मंगला आरती नहीं होती, तो जन्माष्टमी पर रात में इसके लिए मंदिर के कपाट क्यों खोले जाते हैं? आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। हम आपको बांके बिहारी मंदिर से जुड़ी यह दिलचस्प बातें बता रहे हैं। आइए जानते हैं-
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बांके बिहारी मंदिर में मंगला आरती क्यों नहीं होती?
आपको बता दें कि बांके बिहारी मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा बच्चे के रूप में की जाती है। भक्त भी ठाकुर जी को एक छोटे बच्चे की तरह ही मानते हैं। इसी वजह से उनके रूटीन को लेकर भी बाल रूप से जुड़ी भावनाओं का ध्यान रखा जाता है। मंगला आरती आमतौर पर सुबह बहुत जल्दी होती है, लेकिन मान्यता है कि छोटे बच्चे को सुबह जल्दी उठाने के बजाय उसे आराम से सोने देना चाहिए। इसी वजह से बांके बिहारी जी को भी सुबह देर तक सोने दिया जाता है। यानी यहां भक्तों का भी यही मानना होता है कि सुबह की आरती के लिए बांके बिहारी की नींद न खराब हो। जब वह अपनी नींद पूरी करके उठें, तभी उनके दर्शन भक्तों को मिलें।
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निधिवन से भी जुड़ी है यह मान्यता
बांके बिहारी की मंगला आरती से जुड़ी एक दूसरी मान्यता भी है। माना जाता है कि रात के समय ठाकुर जी निधिवन चले जाते हैं और वहां गोपियों के साथ रास करते हैं। इसके बाद रात के आखिरी पहर में वह मंदिर लौटते हैं। मान्यता के मुताबिक, रात में रास के बाद ठाकुर जी बहुत थक जाते हैं। इसलिए उन्हें सुबह बहुत जल्दी उठाकर मंगला आरती नहीं की जाती है।
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जन्माष्टमी पर ही क्यों खुलते हैं कपाट?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर पूरे साल सुबह मंगला आरती नहीं होती, तो फिर जन्माष्टमी पर ही ऐसा क्यों होता है? आपको बता दें कि इसका सीधा संबंध भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से है। यह तो आप सभी जानती ही हैं कि भगवान कृष्ण का जन्म आधी रात को हुआ था। इसलिए जन्माष्टमी की रात को मंदिर में जन्म उत्सव मनाया जाता है। रात 12 बजे कृष्ण जन्म के बाद खास पूजा होती है और इसी मौके पर मंगला आरती भी की जाती है। इसलिए जन्माष्टमी की रात बांके बिहारी मंदिर में होने वाली मंगला आरती बाकी दिनों से अलग होती है।
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जन्माष्टमी पर कैसा होता है माहौल?
जन्माष्टमी के समय वृंदावन में देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग आते हैं। बांके बिहारी मंदिर में भी इस खास मौके पर काफी भीड़ रहती है। कृष्ण जन्म की खुशी में लोग रात तक मंदिर में रहते हैं। जब बाल गोपाल का जन्म हो जाता है तब उसके बाद बांके बिहारी का अभिषेक होता है और भोग लगाया जाता है। इसी दौरान मंगला आरती का आयोजन भी होता है।
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अगर जन्माष्टमी पर बांके बिहारी मंदिर जाएं तो क्या ध्यान रखें?
अगर आप इस खास मौके पर वृंदावन जाने का प्लान बना रही हैं, तो भीड़ को देखते हुए पहले से तैयारी कर लें। क्योंकि जन्माष्टमी पर बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं, इसलिए आखिरी समय में आपको दिक्कत हो सकती है।
यात्रा के लिए काम की बातें
अगर आप जन्माष्टमी पर बांके बिहारी मंदिर में दर्शन करने जा रही हैं, तो कुछ बातों का ध्यान जरूर रखें। जैसे-
- मंदिर जाने से पहले उस साल का ऑफिशियल मंदिर शेड्यूल जरूर चेक करें।
- जन्माष्टमी के दिन सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा भीड़ के लिए तैयार रहें।
- रात में होने वाली खास आरती के कारण वापसी और ठहरने की प्लानिंग पहले कर लें।
- मंदिर में दर्शन के दौरान वहां की व्यवस्था और सुरक्षा नियमों का पालन करें।
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Image Credit- Jagran
- बांके बिहारी मंदिर की स्थापना किसने की थी?
- बांके बिहारी मंदिर की स्थापना स्वामी हरिदास जी ने 1864 के आसपास की थी।
- बांके बिहारी जी को पर्दा क्यों लगाया जाता है?
- मान्यता है कि भक्त की गहरी भक्ति देखकर ठाकुर जी उनके साथ न चले जाएं।
- जन्माष्टमी पर बांके बिहारी का चरण दर्शन कब होता है?
- बांके बिहारी जी के श्रीचरणों के दर्शन केवल अक्षय तृतीया के दिन होते हैं।
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