Diwali 2026: रंगोली और दीयों से अलग है भारत के इन शहरों का दिवाली जश्न, एक बार जरूर करें एक्सप्लोर
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दिवाली आते ही पूरे देश में त्योहार की रौनक देखने को मिलती है। कहीं घरों में दीये जलाए जाते हैं, तो कहीं रंगोली और रंग-बिरंगी लाइट्स से सजावट होती है। बाजारों में भी खूब चहल-पहल रहती है, लेकिन भारत में कुछ शहर ऐसे हैं, जहां दिवाली मनाने का तरीका बाकी जगहों से थोड़ा अलग है।
यहां त्योहार सिर्फ घरों को डेकोरेट करने, पटाखे फोड़ने और मिठाइयां बांटने तक ही नहीं सीमित रहता बल्कि इससे जुड़ी खास परंपराएं भी देखने को मिलती हैं। कहीं बड़े से पुतले जलाए जाते हैं, तो कहीं पूरा शहर रोशनी से जगमगा उठता है।
भारत के इन शहरों की दिवाली होती है खास
अगर आप इस बार दिवाली पर कहीं घूमने का प्लान बना रही हैं, तो हम भारत की कुछ खास जगहों के बारे में आपको बता रहे हैं। आप यहां पर घूमने के लिए जा सकती हैं।
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1. अयोध्या, उत्तर प्रदेश
अयोध्या का नाम सबसे पहले आता है। भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या में दिवाली की रौनक देखने लायक होती है। मान्यता है कि भगवान राम के 14 साल का वनवास पूरा करके अयोध्या लौटने की खुशी में लोगों ने पूरे शहर में दीये जलाए थे। इसी परंपरा को आज भी यहां खास तरीके से मनाया जाता है।
- साल 2017 से अयोध्या में दीपोत्सव का आयोजन हो रहा है।
- इस दौरान सरयू नदी के घाटों पर लाखों दीये जलाए जाते हैं।
- घाटों पर एक साथ जलते दीयों का नजारा देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।
2. वाराणसी, उत्तर प्रदेश
वाराणसी में दिवाली की रौनक देखने लायक होती है। यहां गंगा के घाटों पर शाम होते ही दीयों की रोशनी और आरती का नजारा काफी खूबसूरत हो जाता है। गंगा आरती के दौरान घाटों पर काफी भीड़ होती है। इसके अलावा, वाराणसी की देव दीपावली भी काफी मशहूर है। इस मौके पर घाटों को हजारों दीयों से सजाया जाता है।
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3. जयपुर, राजस्थान
राजस्थान की पिंक सिटी जयपुर दिवाली पर अपनी खूबसूरत सजावट के लिए जानी जाती है। त्योहार के समय यहां के बाजार और सड़कें रंग-बिरंगी लाइट्स से जगमगा उठती हैं।
- हवा महल के आसपास का इलाका रोशनी से सजा नजर आता है।
- जौहरी बाजार में दिवाली की खास रौनक देखने को मिलती है।
- नाहरगढ़ किले से रात में रोशनी से चमकते जयपुर का खूबसूरत नजारा दिखाई देता है।
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4. अमृतसर, पंजाब
पंजाब के अमृतसर में दिवाली को लेकर एक अलग ही उत्साह रहता है। यहां दिवाली के दिन बंदी छोड़ दिवस भी मनाया जाता है। इस दिन स्वर्ण मंदिर को बहुत ही खूबसूरती से सजाया जाता है। इसके पीछे एक इतिहास भी है। माना जाता है कि सिखों के छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब मुगल बादशाह जहांगीर की कैद से 52 राजाओं को छुड़ाकर इसी दिन अमृतसर लौटे थे। इसी खुशी में यह दिन बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाया जाता है। स्वर्ण मंदिर की रोशनी और वहां का माहौल इस दिन देखने लायक होता है।
5. कोलकाता, वेस्ट बंगाल
दिवाली के दिन देश के कई हिस्सों में भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है, लेकिन कोलकाता में इस दिन मां काली की पूजा की जाती है। यहां काली पूजा के लिए बड़े-बड़े पंडाल सजाए जाते हैं।
- मां काली की सुंदर मूर्तियां देखने को मिलती हैं।
- पंडालों में पूजा और दूसरे धार्मिक कार्यक्रम होते हैं।
- कई जगहों पर नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
6. गोवा में जलाए जाते हैं नरकासुर के विशाल पुतले
गोवा में दिवाली का जश्न भी एक खास परंपरा के साथ शुरू होता है। यहां दिवाली से एक रात पहले नरक चतुर्दशी पर नरकासुर के बड़े-बड़े पुतले बनाए जाते हैं। इन्हें बांस, कागज और कपड़े जैसी चीजों से तैयार किया जाता है।
- इन पुतलों को सड़कों और कॉलोनी में दिखाया जाता है।
- रातभर लोग इन्हें देखने के लिए जुटते हैं।
- सुबह होने से पहले इन पुतलों को जलाया जाता है।
गोवा में पणजी, तालेगांव और आसपास के इलाकों में यह नजारा खास तौर पर देखने को मिलता है।
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7. उदयपुर में झीलों के किनारे दिखता है जगमगाता शहर
सिटी ऑफ लेक्स उदयपुर भी दिवाली पर किसी स्वर्ग से कम नहीं नजर आता है। यहां पिछोला लेक के आसपास बने घाट, पुरानी हवेलियां और सिटी पैलेस रोशनी से जगमगाए हुए दिखाई देते हैं। दिवाली के समय आप यहां इन जगहों पर घूम सकती हैं-
- पिछोला झील के पास बने गणगौर घाट और लाल घाट।
- अंब्राई घाट, जहां से सिटी पैलेस का सुंदर नजारा दिखाई देता है।
- जगदीश मंदिर के आसपास की पुरानी गलियां।
यहां दिवाली के दौरान बाजारों में भी खूब रौनक रहती है।
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- अमृतसर में दिवाली के दिन 'बंदी छोड़ दिवस' क्यों मनाया जाता है?
- इस दिन सिखों के छठे गुरु, श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी, मुगल बादशाह जहांगीर की कैद से 52 राजाओं को छुड़ाकर वापस अमृतसर लौटे थे।
- कोलकाता में दिवाली पर किस देवी की पूजा होती है?
- कोलकाता और पश्चिम बंगाल में दिवाली के दिन भगवान गणेश-लक्ष्मी के बजाय मां काली की पूजा (काली पूजा) की जाती है और भव्य पंडाल सजाए जाते हैं।
- गोवा में दिवाली पर कौन सी अनोखी परंपरा निभाई जाती है?
- गोवा में दिवाली (नरक चतुर्दशी) से एक रात पहले बुराई के प्रतीक नरकासुर के विशाल पुतले बनाए जाते हैं और तड़के सुबह उनका दहन किया जाता है।
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