भारत के सबसे प्रसिद्ध द्वादश ज्योतिर्लिंग यानि 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ओमकारेश्वर मध्यप्रदेश में स्थित है। ये ज्योतिर्लिंग उज्जैन के महाकाल के पास है और इस तरह से दो बड़े तीर्थ स्थल मध्यप्रदेश में आपको आस-पास ही मिल जाएंगे। ओमकारेश्वर जाना बहुत आसान है और ये ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के किनारे बसा हुआ है। मंदिर से लेकर यात्रा तक का सफर भी बहुत मनोरम है। मैं हाल ही में ओमकारेश्वर के दर्शन करके आई हूं और आपसे अपनी यात्रा के बारे में कुछ डिटेल्स शेयर करने वाली हूं। दरअसल, ये कुछ टिप्स हैं जो आपकी इस तीर्थ यात्रा को मनोरम बनाएंगे और साथ ही साथ इस यात्रा में आई कठिनाइयों को भी दूर करेंगे। 

अगर आप पहली बार किसी ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने जा रहे हैं तो यकीनन आपको इनमें से कुछ चीज़ों का ध्यान रखना होगा और जो परेशानियां अक्सर टूरिस्ट्स को आती हैं वो आपको देखनी होंगी। 

1. टूरिस्ट ट्रैप्स से सावधान-

मंदिर को आस-पास आपको बहुत सारे टूरिस्ट्स ट्रैप्स मिलेंगे। जैसे कई पंडित वहां घूमते रहते हैं जो पैसों के बदले में स्पेशल पूजा और वीआईपी गेट से दर्शन करने को बोलते हैं, लेकिन उन लोगों को भी नॉर्मल गेट से ही एंट्री करवाई जाती है। अगर मंदिर परिसर में बहुत भीड़ है तो ऐसे लोग आपको जल्दी दर्शन करवाने का दावा करते हैं पर आपको इनसे सावधान रहना होगा। 

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2. माथे पर टीका लगाने के लिए भी लंगेंगे पैसे-

आपको मंदिर परिसर में कई ऐसे बच्चे मिल जाएंगे जो हाथ में टीका लिए घूम रहे होंगे। वो आपके पीछे पड़ जाएंगे कि आपको माथे पर टीका लगवाना जरूरी है और उस टीके के लिए आपको बहुत सारे पैसे चुकाने होंगे। इस तरह आप 10 रुपए से लेकर 200 रुपए तक ठगे जा सकते हैं। इसलिए अगर आपका मन करे तभी टीका लगवाएं नहीं तो इन बच्चों को इग्नोर करें। 

3. परिक्रमा लगाने जाने से पहले रखें इस बात का ध्यान-

कई लोग ओमकारेश्वर जाते हैं तो उन्हें लगता है कि सिर्फ मंदिर की ही परिक्रमा लगानी होगी और वो परिक्रमा मार्ग पर चलने लगते हैं। पर ऐसा नहीं है। वो पूरे ओमकार पर्वत की परिक्रमा का मार्ग है और आपको ध्यान ये रखना होगा कि ये पूरा मार्ग 7 किलोमीटर लंबा है और आधे रास्ते यानि 3.5 किलोमीटर पर ऋणमुक्तेश्वर मंदिर आता है। कई लोग सिर्फ इसी जगह तक परिक्रमा करते हैं। अगर आप परिक्रमा मार्ग पर जा रहे हैं तो पहले जूस या कुछ ले लें क्योंकि ये काफी लंबा रास्ता है और वैसे तो गर्मियों में यहां जगह-जगह पर प्याऊ आदि मिल जाएंगे, लेकिन फिर भी आपकी तबियत खराब हो सकती है। इस मार्ग पर बहुत से आश्रम और मंदिर आदि बने हुए हैं। यहां गायत्री मंदिर भी है। 

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4. संगम घाट-

कई बार नाव वाले आपको गलत बोलकर संगम घाट तक लाते हैं। उनका कहना होता है कि आप पैदल चलकर यहां नहीं जा सकते और इस तरह से वो आपसे 200-500 रुपए तक ऐंठ सकते हैं जबकि ऐसा नहीं है। संगम घाट सिर्फ 2 किलोमीटर दूर है और आप आराम से यहां तक मंदिर से पैदल चलकर आ सकते हैं। 

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5. मंदिर बंद होने के समय का ध्यान रखें- 

मंदिर दिन में तीन बार बंद होता है। सुबह की आरती के समय (सुबह 7.00-8.00 तक), दोपहर में मध्यान भोज के समय (12.20-1.20 तक) और संध्यान श्रृंगार (4.00-5.00 तक) के समय। ये तीनों समय 1-1 घंटे के लिए मंदिर के अंदर प्रवेश वर्जित रहता है। अगर आपको कोई ट्रेन पकड़नी है या उसी दिन वापस जाना है जिस दिन आप आए हैं तो इन समय का ध्यान रखें।  

ओमकारेश्वर के आस-पास आपको बहुत सारे अन्य मंदिर भी बन जाएंगे और यहां पर पांडवों के समय की कथा कहने के लिए बहुत से लोग मौजूद होंगे। आपको ध्यान ये रखना है कि यहां जगह-जगह पर टूरिस्ट ट्रैप्स मौजूद होते हैं और लोग किसी न किसी तरह से पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं। बाकी यहां बहुत सी चीज़ें मौजूद हैं जिन्हें एक्सप्लोर किया जा सकता है।  

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