बदलते मौसम और बढ़ते प्रदूषण से त्वचा को रखें सुरक्षित, ऐसे करें अपनी स्किन को तैयार

प्रदूषण की मार झेलने के लिए शरीर के साथ-साथ त्वचा को भी तैयार करना जरूरी है। प्रदूषण न सिर्फ त्वचा को बेजान करता है बल्कि उसकी प्राकृतिक सुरक्षा परत को कमजोर करके झुर्रियां, मुंहासे जैसी कई समस्याएं पैदा करता है। ब्यूटी एक्सपर्ट डा.ब्लासम कोचर से जानें, कैसे प्रदूषण के प्रभाव से त्वचा को सुरक्षित रखा जाए।
Updated:- 2026-11-04, 20:08 IST
How niacinamide protects skin from pollution

प्रदूषण न केवल लोगों के स्वास्थ्य पर असर डालता है, बल्कि त्वचा को भी बेजान और बीमार कर डालता है। भारतीय त्वचा पर प्रदूषण का दुष्प्रभाव साफ दिखता है। धूल-मिट्टी और गंदगी के कारण चेहरे पर दाग-धब्बे, झुर्रियां, मुंहासे, रूखापन आदि होने लगते हैं। ऐसे समय पर त्वचा को खास देखभाल की जरूरत होती है, जो केवल प्राकृतिक सुरक्षा परत को मजबूत बनाने से संभव है। ऊपरी परत पर आप जितने भी अच्छे उत्पाद क्यों ना लगा लें, त्वचा को अंदरुनी सुरक्षा की जरूरत होती है।

इसलिए एक्सपर्ट स्किन केयर के अंतर्गत आने वाले स्टेप्स में क्लींजिंग, मॉइश्चराइजिंग और सनस्क्रीन में नियासिनामाइड (विटामिन बी3) नामक प्राकृतिक इंग्रेडिएंट की मौजूदगी को सुनिश्चित करने की सलाह देते हैं। दरअसल, यह विटामिन त्वचा के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम करता है।

क्या है नियासिनामाइड?

आपकी त्वचा एक दीवार की तरह है, जो बाहरी प्रदूषकों और मौसम के बदलावों से रक्षा करती है। नियासिनामाइड इस दीवार को 'सेरामाइड्स' बनाने में मदद करता है, जो त्वचा को अंदर से हाइड्रेट और सुरक्षित रखने में मदद करता है। यह विटामिन बी3 का एक घुलनशील रूप है। यह नमी बरकरार रखने और अतिरिक्त तेल को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।

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इसकी खासियत यह है कि इसे त्वचा की अलग-अलग जरूरतों के अनुसार तैयार किए गए स्किनकेयर फार्मूलेशन में शामिल किया जा सकता है। यह गर्मियों में नमी और सर्दियों में रूखेपन पर भी बहुत असरदार है। जिनके नाक और माथे पर तेल ज्यादा निकलता है, उसे नियंत्रित करने में मददगार है। इससे चेहरे पर लगा फाउंडेशन या मेकअप जल्दी पिघलता नहीं है और चेहरा चिपचिपा भी नहीं लगता।

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बाहरी तनाव से सुरक्षा करना- व्यस्त दिनचर्या में त्वचा का प्राकृतिक बैरियर कमजोर हो जाता है। नियासिनामाइड त्वचा में सेरामाइड्स के उत्पादन को बढ़ाकर इस सुरक्षा परत को मजबूत करता है। इससे बुढ़ापा जल्दी नहीं आता और चेहरे पर झुर्रियां नहीं दिखतीं।

अतिरिक्त तेल नियंत्रित करना- तैलीय त्वचा वाले लोगों के लिए नियासिनामाइड उपयोगी हो सकता है। इसके इस्तेमाल से त्वचा कम तैलीय होती है, जिससे चेहरे पर पिंपल, दाने कम निकलते हैं और रोमछिद्र भी खुले रहते हैं।

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स्किन टोन बराबर रखना- नियासिनामाइड त्वचा में मेलेनिन के स्थानांतरण को प्रभावित करके डार्क स्पॉट्स और असमान स्किन टोन की दिखावट कम करने में मदद कर सकता है। नियमित इस्तेमाल से त्वचा अधिक समान और स्वस्थ दिख सकती है। हालांकि, इसके परिणाम धीरे-धीरे दिखाई देते हैं।

स्किन की देखभाल के दौरान इन बातों का भी रखें ध्यान 

  • नए प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करना चाहिए।
  • गर्दन के पीछे लगाकर ही टेस्ट करें, अगर जलन हो तो उस उत्पाद का इस्तेमाल न करें।
  • जरूरी नहीं है कि हर स्किन केयर उत्पाद में नियासिनामाइड मौजूद हो। इसलिए पहले इंग्रेडिएंट पढ़ें और फिर खरीदें।

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लेखिका- सुमन अग्रवाल

ऊपर लेख में बताई गई जानकारी के अनुसार आप प्रदूषण के बीच भी अपनी स्किन की देखभाल आसानी से कर सकती हैं। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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