
कात्यायनी चालीसा
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दोहा
जय कात्यायनी मां, जय महिषासुर मारिणी।
सुर नर मुनि आराधित, जय मंगल करिणी॥
चौपाई
जय-जय अंबे जय कात्यायनी।
जय महिषासुर घातिनी दानी।।
ब्रह्मा, विष्णु, शिव जी ध्यावैं।
शक्ति शक्ति सब जगत बनावैं॥
रक्तदंतिका और अन्नपूर्णा।
मां कात्यायनी हैं सम्पूर्णा॥
कात्यायन ऋषि मुनि के आश्रय।
कात्यायनी मां सबके बासय॥
भय, संकट हरिणी तुही माता।
भक्तों के दुःख हरती आपा॥
जो कोई तेरी शरण में आवे।
मनवांछित फल वह नर पावे॥
ध्यान धार जो कोई नारी।
कात्यायनी पूर्ण सुखकारी।।
कुमारी पुजा जो नित ध्यावें।
अविवाहित जीवन न बितावे॥
हर युग में मां तू सहाय।
जो भी भक्त करे मन लाय॥
कात्यानी मां तेरी महिमा।
सतयुमग त्रेता हो या द्वापर।।
सिंह सवारी मां भवानी।
जय-जय-जय अंबे भवानी॥
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