Thu Oct 8, 2026 | Updated 12:25 AM IST
ब्रह्मचारिणी चालीसा

ब्रह्मचारिणी चालीसा

~~~ ✦✦ ~~ ✦ ~~ ✦✦ ~~~
दोहा कोटि कोटि नमन मात पिता को, जिसने दिया ये शरीरबलिहारी जाऊँ गुरू देव ने, दिया हरि भजन में सीरस्तुति चन्द्र तपे सूरज तपे, और तपे आकाश इन सब से बढकर तपे,माताऒ का सुप्रकाशमेरा अपना कुछ नहीं, जो कुछ है सो तेरा तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा ॥पद्म कमण्डल अक्ष, कर ब्रह्मचारिणी रूपहंस वाहिनी कृपा करो, पडू नहीं भव कूप ॥जय जय श्री ब्रह्माणी, सत्य पुंज आधार चरण कमल धरि ध्यान में, प्रणबहुं मां बारम्बार ॥चौपाई जय जय जग मात ब्रह्माणी, भक्ति मुक्ति विश्व कल्याणीवीणा पुस्तक कर में सोहे, शारदा सब जग सोहेहंस वाहिनी जय जग माता, भक्त जनन की हो सुख दाताब्रह्माणी ब्रह्मा लोक से आई, मात लोक की करो सहाईक्षीर सिन्धु में प्रकटी जब ही, देवों ने जय बोली तब हीचतुर्दश रतनों में मानी, अद॒भुत माया वेद बखानीचार वेद षट शास्त्र कि गाथा, शिव ब्रह्मा कोई पार न पाताआदि शक्ति अवतार भवानी, भक्त जनों की मां कल्याणीजब-जब पाप बढे अति भारी, माता शस्त्र कर में धारीपाप विनाशिनी तू जगदम्बा, धर्म हेतु ना करी विलम्बानमो: नमो: ब्रह्मी सुखकारी, ब्रह्मा विष्णु शिव तोहे मानीतेरी लीला अजब निराली, सहाय करो माँ पल्लू वालीदुःख चिन्ता सब बाधा हरणी, अमंगल में मंगल करणीअन्न पूरणा हो अन्न की दाता, सब जग पालन करती मातासर्व व्यापिनी असंख्या रूपा, तो कृपा से टरता भव कूपाचंद्र बिंब आनन सुखकारी, अक्ष माल युत हंस सवारीपवन पुत्र की करी सहाई, लंक जार अनल सित लाईकोप किया दश कन्ध पे भारी, कुटुम्ब संहारा सेना भारीतु ही मात विधी हरि हर देवा, सुर नर मुनी सब करते सेवादेव दानव का हुआ सम्वादा, मारे पापी मेटी बाधाश्री नारायण अंग समाई, मोहनी रूप धरा तू माईदेव दैत्यों की पंक्ति बनाई, देवों को मां सुधा पिलाईचतुराई कर के महा माई, असुरों को तू दिया मिटाईनौ खण्ङ मांही नेजा फरके, भागे दुष्ट अधम जन डर केतेरह सौ पेंसठ की साला, आस्विन मास पख उजियालारवि सुत बार अष्टमी ज्वाला, हंस आरूढ कर लेकर भालानगर कोट से किया पयाना, पल्लू कोट भया अस्थानाचौसठ योगिनी बावन बीरा, संग में ले आई रणधीराबैठ भवन में न्याय चुकाणी, द्वारपाल सादुल अगवाणीसांझ सवेरे बजे नगारा, उठता भक्तों का जयकारामढ़ के बीच खड़ी मां ब्रह्माणी, सुन्दर छवि होंठो की लाली पास में बैठी मां वीणा वाली, उतरी मढ़ बैठी महाकाली लाल ध्वजा तेरे मंदिर फरके, मन हर्षाता दर्शन करकेदूर दूर से आते रेला, चैत आसोज में लगता मेलाकोई संग में, कोई अकेला, जयकारो का देता हेलाकंचन कलश शोभा दे भारी, दिव्य पताका चमके न्यारीसीस झुका जन श्रद्धा देते, आशीष से झोली भर लेतेतीन लोकों की करता भरता, नाम लिए सब कारज सरता मुझ बालक पे कृपा कीज्यो, भुल चूक सब माफी दीज्योमन्द मति जय दास तुम्हारा, दो मां अपनी भक्ती अपारा जब लगि जिऊ दया फल पाऊं, तुम्हरो जस मैं सदा सुनाऊंश्री ब्रह्माणी चालीसा जो कोई गावे, सब सुख भोग परम सुख पावे दोहा राग द्वेष में लिप्त मन, मैं कुटिल बुद्धि अज्ञान भव से पार करो मातेश्वरी, अपना अनुगत जान ॥
~~~ ✦✦ ~~ ✦ ~~ ✦✦ ~~~

सभी प्रसिद्ध चालीसा

गणेश जी से हनुमान जी तक, सभी प्रसिद्ध चालीसाओं का पावन संग्रह अब एक ही स्थान पर। इनके पाठ से भक्ति का अनुभव करें, मन को शांति दें और अपनी श्रद्धा को दें एक नया आयाम।

चुनें अपना राशिफल

जानिए अपने आने वाले भविष्य से जुड़ी सारी जानकारी। आपकी जन्मतिथि के अनुसार हम बताएंगे आपका राशिफल, एस्ट्रो रेमेडीज और एक्सपर्ट टिप्स।

Disclaimer

हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia.com पर हमसे संपर्क करें।