आषाढ़ अमावस्या के दिन इस विधि से करे पितरों की पूजा, पितृदोष से मिल सकता है छुटकारा

हिंदू धर्म में आषाढ़ अमावस्या के दिन पितरों यानी पूर्वजों की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन उनका श्राद्ध और तर्पण करने का भी विधान है। इस लेख में हम पितरों की पूजा विधि के बारे में विस्तार से जानेंगे।
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हिंदू धर्म में आषाढ़ अमावस्या का दिन पितरों की पूजा के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन पितरों की आत्मा की शांति और उनका आशीर्वाद पाने के लिए अत्यंत शुभ होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या तिथि पर पितर पृथ्वी पर आते हैं, और श्रद्धापूर्वक किया गया तर्पण उन्हें संतुष्ट करता है। इससे पितृदोष से छुटकारा मिल सकता है और जीवन में आ रही सभी समस्याएं दूर हो सकती है।
इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान, और दान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है, और उनकी आत्मा को शांति व मोक्ष की प्राप्ति होती है। तो आइए, इस लेख में ज्योतिषाचार्य पंडित अरविंद त्रिपाठी से विस्तार से जानते हैं कि आषाढ़ अमावस्या के दिन पितरों की पूजा किस विधि से करने पर अधिक लाभ मिल सकता है।

आषाढ़ अमावस्या के दिन पितरों की पूजा किस विधि से करें?

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आषाढ़ अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें, अन्यथा घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
एक तांबे के लोटे में शुद्ध जल, काले तिल, जौ और थोड़ा गंगाजल मिलाएं। अपनी अनामिका उंगली में कुश की अंगूठी धारण करें या हाथ में कुश पकड़ें।
तर्पण करते समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें, क्योंकि यह पितरों की दिशा मानी जाती है। अपने हाथ में जल, कुश और काले तिल लेकर पितरों का तर्पण करने का संकल्प लें।
ऊं आगच्छन्तु में पितर एवं ग्रहन्तु जलान्जलिम या ऊं पितृभ्यः नमः मंत्र का जाप करते हुए पितरों का स्मरण करें और धीरे-धीरे जल अर्पित करें। पितरों को अर्पित किए जाने वाले जल में कुश, तिल और फूल मिश्रित करने चाहिए।
यदि संभव हो तो इस दिन पितरों के निमित्त पिंडदान करें। यह कार्य किसी योग्य ब्राह्मण से करवाना उचित होता है।
पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं और सात बार उसकी परिक्रमा करें। पीपल में पितरों का वास माना जाता है।
भगवान शिव और भगवान विष्णु की आराधना करें। शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी फलदायी होता है।
घर की दक्षिण दिशा में काले तिल डालकर सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
आषाढ़ अमावस्या के दिन दान का विशेष महत्व है। अन्न, वस्त्र, तिल, आटा, गुड़ और दक्षिणा का दान गरीबों, ब्राह्मणों, गायों और जरूरतमंदों को करें।
पितृ स्तोत्र का पाठ करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

आषाढ़ अमावस्या के दिन पितरों की पूजा का महत्व

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ऐसी मान्यता है कि इस दिन पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से पितरों का श्राद्ध करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है और वे जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाते हैं। जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है, उनके लिए यह दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इस दिन पितरों की पूजा और तर्पण करने से पितृ दोष के नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है। यदि किसी पूर्वज की आत्मा अतृप्त रह जाती है, तो वह श्राप का कारण बन सकती है। आषाढ़ अमावस्या पर श्राद्ध करने से ऐसे किसी भी श्राप से मुक्ति मिलती है।

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FAQ

  • पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए क्या उपाय हैं?

    आपकी कुंडली में पितृ ऋण दिखता है, तो सबसे पहले गलत आचरण से बचें। पितरों का तर्पण और श्राद्ध करें, संतान को धार्मिक संस्कार दें और नियमित रूप से हनुमान जी की पूजा करें। दान-पुण्य करें और गरीबों की मदद करें।
  • कैसे पता करें कि घर में पितृदोष है?

    घर के आंगन, घर की दरारों या टूटे गमलों में बिना आपके लगाए पीपल का पौधा उग रहा है तो यह पितृ दोष का लक्षण है। कड़ी मेहनत के बाद भी नौकरी और व्यापार में परेशानी आ रही है, तरक्की नहीं हो रही है तो यह पितृ दोष का संकेत हो सकता है। पितृ दोष होने पर तरक्की नहीं मिलती है।
  • आषाढ़ अमावस्या के दिन कौन सा मंत्र जपना चाहिए?

    ॐ आद्य-भूताय विद्महे सर्व-सेव्याय धीमहि। शिव-शक्ति-स्वरूपेण पितृ-देव प्रचोदयात्। गंगा जलं वा तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः
  • आषाढ़ अमावस्या पर क्या करना चाहिए?

    आषाढ़ अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान, पूजा-पाठ व दान-पुण्य करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। इस साल आषाढ़ अमावस्या 25 जून, बुधवार को है। मान्यता है कि इस दिन विधिवत पूजा-अर्चना करने व दान करने से पापों से मुक्ति मिलती है और धन-धान्य में वृद्धि होती है।
  • पितृ को जल देते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए?

    पितृ पक्ष के दौरान पितरों को जल देते समय ॐ देवताभ्य: पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च मंत्र का जाप करें।