आज के समय में बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा बहुत अहम हो गया है। पेरेंट्स बच्चों को यथासंभव सेफ माहौल देना चाहते हैं, लेकिन इसमें बच्चों को सोशलाइज करना कैसे सिखाएं, यह पेरेंट्स समझ नहीं पाते। बाहरी लोगों से बच्चे कैसे सही तरीके से बात करें, इस बारे में सिखाना कई बार पेरेंट्स के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण हो जाता है। अगर वे बच्चों को बाहरी लोगों से बात करने से मना करते हैं तो बच्चे बाहरी लोगों से जिम्मेदारी से बात करना सीख ही नहीं पाएंगे। अगर आप भी इसी टेंशन से जूझ रही हैं तो आज पेरेंटिंग एक्सपर्ट नियति शाह आपको कुछ आसान से तरीके बता रही हैं, जिनके जरिए आप बाहरी लोगों के साथ बच्चों को सही तरीके से सोशलाइज करना सिखा सकती हैं-

ऐसी हो बच्चे की बॉडी लैंग्वेज

चाहें आस-पड़ोस के लोग हों या फिर पूरी तरह अपरिचित, बच्चे अगर किसी बाहरी व्यक्ति से बात कर रहे हों तो आप उन्हें बॉडी लैंग्वेज अच्छी रखने से जुड़ी कुछ सामान्य चीजें जरूर सिखा सकती हैं। इसमें सबसे अहम है आई कॉन्टैक्ट। जब बच्चे बाहरी व्यक्ति से बात करें तो वे आंखों में आंखें डाल कर बात करें। सामने वाला व्यक्ति अगर आसपास रहता है तो उससे बच्चा हैंडशेक कर सकता है। इस दौरान ध्यान दें कि बच्चा सही तरीके से हाथ मिलाए। ना तो उसका हाथ बहुत ढीला होना चाहिए और ना ही बहुत कड़ा। बच्चा जब बात कर रहा हो, तो उसके कंधे बिल्कुल सीधे होने चाहिए। एक और चीज जो बहुत महत्वपूर्ण है, वह है चेहरे पर मुस्कान। बच्चा जो भी कहे, प्यार से कहे। उसके शब्दों में रूखापन या अवहेलना नहीं होनी चाहिए। इससे बच्चे से मिलने वाला व्यक्ति बहुत खुश होता है। 

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इन चीजों का रखें विशेष ध्यान

जब बच्चे बाहरी लोगों से बात कर रहे हों तो आपको कुछ और अहम चीजों के बारे में बच्चों को जानकारी जरूर देनी चाहिए जैसे कि पर्सनल चीजों के बारे में किसी को ना बताएं। दूसरा, उन्हें बातचीत करते हुए एक हाथ का डिस्टेंस मेंटेन करने के लिए कहें। बच्चे घर की अहम और संवेदनशील जानकारी अनजाने में बाहरी लोगों को ना बता दें, इसके लिए आप उन्हें प्यार से सिखा सकती हैं। मसलन उन्हें कहें कि वे आम चीजों पर बातें करें, घर की पर्सनल चीजों के बारे में ना बताएं। मुमकिन है कि बच्चा इसे आसानी से ना समझ पाए। पर्सनल चीजों के बारे में बच्चों को थोड़ा डीटेल में बताने की जरूरत है यानी उन्हें समझाएं कि पर्सनल चीजों के तहत क्या-क्या आता है जैसे कि आपके घर का पता, फोन नंबर, घर में आपके मम्मी-पापा का रिलेशन कैसा है आदि। अगर बच्चों से पर्सनल सवाल पूछा जा रहा है तो वे कह सकते हैं, 'मम्मी को पूछा, मुझे नहीं मालूम'। अगर बच्चों से साधारण सवाल किए जा रहे हैं, तो उन्हें उसके जवाब जरूर देने चाहिए जैसे कि आपका फेवरेट कलर कौन सा है, आपका पसंदीदा विषय कौन सा है आदि। 

इस तरह आप बच्चों को काफी हद तक बाहरी लोगों को हैंडल करने के गुर सिखा सकती हैं। इससे बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वह जिम्मेदार भी बनेगा। इस तरह की ट्रेनिंग देने से घर की संवेदनशील जानकारी बाहर नहीं जाएगी और आपका घर-परिवार भी सुरक्षित रहेगा।