'बाजरे दा सिट्टा, वे असां तल्ली ते मरोड़या...' इस पंजाबी लोकगीत के पीछे छिपा है प्यार और तकरार का मतलब

पंजाबी गाने लोगों को खूब पसंद आते हैं। आपने बाजरे दा सि‍ट्टा गाना जरूर सुना होगा, लेक‍िन क्‍या आप इसे गीत का मतलब जानती हैं? हम आपको इसके बारे में व‍िस्‍तार से बता रहे हैं।
Updated:- 2026-09-14, 14:11 IST
punjabi lokgeet bajre da sitta meaning

आजकल पंजाबी गाने का क्रेज कुछ ज्‍यादा ही बढ़ गया है। क‍िसी की शादी हो, दोस्‍त की पार्टी हो या फि‍र सोशल मीड‍िया की रील ही क्‍यों न हो, हर जगह पंजाबी गाने सुनाई दे ही जाते हैं। इन्‍हीं में से एक गाना 'बाजरे दा सि‍ट्टा' है। इस गाने को आपने इंस्‍टाग्राम पर रील में सुना होगा, लेक‍िन क्‍या आप जानती हैं क‍ि यह एक पंजाबी लोकगी‍त है? जी हां, इस लोकगीत में पंजाब के गांवों की पुरानी ज‍िंदगी, खेती के काम और र‍िश्‍ताें की प्‍यारी सी तकरार भी छ‍िपी हुई है।

इसकी सबसे फेमस लाइन में बाजरे की बाली और हथेली का ज‍िक्र होता है। यह लाइनें आपको भले ही नॉर्मल लगती हों, लेक‍िन जब आप इनका मतलब समझेंगी तो पता लगेगा क‍ि इस लोकगीत में प्‍यार और रूठने-मनाने की बात क‍ितने द‍िलचस्‍प तरीके से कही गई है। आइए इसके बारे में व‍िस्‍तार से जानते हैं-

punjabi lokgeet bajre da sitta meaning (1)

Image Credit- Pexels

क्या होता है 'बाजरे दा सिट्टा'?

सबसे पहले ताे यह जान लेते हैं क‍ि बाजरे दा स‍िट्टा का मतलब क्‍या होता है? आपको बता दें क‍ि पुराने समय में फसल के दौरान मह‍िलाएं अपने हाथों से अनाज को अलग करती थीं। रोजाना के इसी काम से इस गाने की यह लाइन जुड़ी हुई है।

यह भी पढ़ें- धीरे-धीरे खत्म हो रही हैं छत्तीसगढ़ की ये खूबसूरत लोककलाएं, क्या आपने देखी हैं?

गीत की जो फेमस पंक्‍त‍ि है 'बाजरे दा स‍िट्टा, वे असां तल्‍ली ते मरोड़या', उसमें 'स‍िट्टा' बाजरे की बाली और 'तल्‍ली' का इस्‍तेमाल हथेली यानी हाथ के ल‍िए क‍िया गया है। यानी इसमें बताया गया है क‍ि बाजरे की बाली को हाथ पर रखकर मरोड़ा गया है, ताक‍ि उसके दाने अलग हो जाएं।

प्‍यार और तकरार की आती है बात

इस लोकगीत की अगली लाइन कहानी को खेती से न‍िकालकर प्‍यार तक ले जाती है। इसमें अपने प्‍यार के रूठकर जाने और उसे वापस मनाने का जि‍क्र क‍िया गया है। जब आप 'रुठड़ा जांदा माह‍िया, वे असां गली व‍िचों मोड़ेया' लाइन को ध्‍यान से सुनेंगी तो मतलब समझ आएगा कि‍ इसमें प्रेमी नाराज होकर जा रहा था, लेक‍िन गली में ही मनाकर राेक लि‍या गया।

यह भी पढ़ें- Hanuman Ansh Parvati Song के पीछे यह है कहानी, क्यों माता पार्वती की परीक्षा लेने पहुंचे थे सप्तऋषि?

बाजरे की बाली को हाथों से मसलकर दाने निकालने की मेहनत और रूठे हुए पार्टनर को मनाने का तरीका बिल्कुल एक जैसा है। जैसे बाजरे को छिलके से अलग करने के लिए थोड़ा जोर लगाना पड़ता है, वैसे ही प्यार के रिश्ते में थोड़ी-बहुत नोंकझोंक और कोशिश तो चलती ही रहती है।

महिलाओं की बैठकी में गूंजता था गीत

बताया जाता है क‍ि पंजाब के गांवों मंं मह‍िलाएं एक साथ बैठती थीं, तो ऐसे ही लोकगीत गाए जाते थे। चाहे कोई गैदर‍िंग हो या कोई फंक्‍शन, ढोलक बजाकर ऐसे ही लोकगीत गाए जाते थे।

यह भी पढ़ें- Parvati Song Meaning: 'काय जि‍द कर रही, काय को मर रही' हनुमान अंश के भजन 'पार्वती' का क्या है ह‍िंदी मतलब?

अब रील में सुनाई देती है यह लोकगीत

आज के समय में आपको यह गाना इंस्‍टाग्राम या यूट्यूब पर रील में सुनाई दि‍या होगा। साल 2021 में जब इसका रीम‍िक्‍स वर्जन आया था तो यह खूब वायरल हुआ था।

अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

Cover Image Credit- AI

Disclaimer

हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia.com पर हमसे संपर्क करें।