Hanuman Ansh Parvati Song के पीछे यह है कहानी, क्यों माता पार्वती की परीक्षा लेने पहुंचे थे सप्तऋषि?

Hanuman Ansh का गाना Parvati इन दिनों काफी वायरल हो रहा है। इस गाने में शिव और पार्वती के विवाह से जुड़ी एक कथा का जिक्र है। जब मां पार्वती शिव जी को पति रूप में पाने की इच्छा लिए कठोर तप कर रही थीं, तब एक खास प्रयोजन से सप्तऋषि उनके पास पहुंचे थे। चलिए आपको सुनाते हैं यह कथा।
Updated:- 2026-09-10, 17:38 IST
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फिल्म 'हनुमान अंश' का गाना 'पार्वती' इन दिनों खूब चर्चा में है। सोशल मीडिया पर भी आपको इस गाने की कई रील्स मिल जाएंगी। इस बुंदेली गाने के बोल हैं 'काय जि‍द कर रही, काय को मर रही...।' इस गाने को साधु तिवारी ने गाया है, लिखा है और संगीत दिया है। गाने में माता पार्वती भगवान शिव से विवाह करने की जिद लिए तपस्या कर रही हैं और सप्तऋषि उनके पास पहुंचे हैं। इस गाने को आपने जरूर सुना होगा, हो सकता है इस पर रील भी बनाई हो, लेकिन क्या आपको इस गाने के पीछे की असली कहानी पता है? चलिए आपको इस पौराणिक प्रसंग के बारे में बताते हैं।

क्या है मां पार्वती और सप्तऋषियों से जुड़ी पौराणिक कथा?

'हनुमान अंश' फिल्म का वायरल बुंदेली गीत 'जब जिद पे आ गई पार्वती' माता पार्वती के अटूट संकल्प और भोलेनाथ को पति रूप में पाने की उनकी अडिग इच्छा की कहानी है। इस गाने के पीछे की पौराणिक कथा रामचरितमानस के बालकांड से जुड़ी हुई है। माता सती के देह त्याग के बाद उन्होंने पर्वतराज हिमालय और मैनावती के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया था। बचपन से ही देवी पार्वती का मन शिव भक्ति में लगता था। नारद जी ने पर्वतराज हिमालय के घर जाकर यह भविष्यवाणी की थी कि देवी पार्वती, सती का ही पुर्नजन्म है और इस जन्म में भी वह भगवान शिव को प्राप्त करेंगी व महादेव से उनका विवाह होना तय है।

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माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए शुरू की तपस्या

इसके बाद माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या करना शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने अन्न, फल और पानी तक का त्याग कर दिया था। उनकी तपस्या बेहद कठिन थी और उन्होंने भगवान शिव से विवाह को ही उनके जीवन का ध्येय बना लिया था। उनकी तपस्या ने देवलोक को भी हिलाकर रख दिया था।

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देवी पार्वती के पास पहुंचे थे सप्तऋषि

माता पार्वती की तपस्या देखकर सप्तऋषि उनके पास पहुंचे। कहा जाता है कि भगवान शिव ने ही सप्तऋषियों को उनके पास उनकी परीक्षा लेने भेजा था। वह देखना चाहते थे कि पार्वती का संकल्प कितना अटल है। सप्तऋषियों ने पार्वती के पास जाकर भोलेनाथ के रूप, वेशभूषा, रहन-सहन और जीवनशैली को लेकर कई ऐसी बातें कहीं, जिससे उनका मन बदल जाए। उन्होंने कहा कि भोलेनाथ के गले में सांप है, सिर पर गंगा है, उनके पास रहने के लिए कोई अच्छा महल भी नहीं है और वह अपने शरीर पर भस्म लगाते हैं। इन्हीं सब बातों का जिक्र 'हनुमान अंश' के पार्वती भजन में लोकभाषा में किया गया है। उन्हें भरोसा था कि शिव के कठिन और तपस्वी जीवन के बारे में सोचकर पार्वती अपना मन बदल लेंगी।

मां पार्वती ने सुनाया अपना फैसला

सप्तऋषियों की बात सुनने के बाद मां पार्वती टस से मस नहीं हुईं। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि उन्होंने मन से शिव जी को अपना पति मान लिया है और वह शिव के अलावा किसी अन्य से विवाह करने के बारे में सोच भी नहीं कर सकती हैं। वह शिव को ही पति रूप में प्राप्त करेंगी चाहे ऐसा करने के लिए उन्हें करोड़ों वर्ष तपस्या करनी पड़े या कई जन्म लेने पड़े। इसके बाद सप्तऋषि समझ गए कि मां गौरा का मन नहीं बदलने वाला है।

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शिव और पार्वती का विवाह हुआ संपन्न

इसके बाद भोलेनाथ समझ गए कि मां पार्वती भी उनकी तरह ही अडिग हैं और दोनों की जोड़ी अच्छी बनेगी। आखिरकार मां पार्वती और भोलेनाथ का विवाह हुआ और माता पार्वती की तपस्या पूरी हुई।


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FAQ
देवी सती ने देह त्याग क्यों किया था?
देवी सती ने अपने पिता प्रजापति दक्ष द्वारा भगवान शिव के अपमान से क्रोधित होकर यज्ञ कुंड की योग-अग्नि में अपने प्राण त्याग दिए थे।
भगवान शिव की कितनी पुत्रियां हैं?
पौराणिक कथाओं और लोक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव की प्रमुख रूप से अशोकसुंदरी और मनसा देवी सहित कुल पांच नाग कन्याओं (पुत्रियों) का वर्णन मिलता है। 
महादेव को भोलेनाथ क्यों कहते हैं
भगवान शिव के सरल और निष्कपट स्वाभाव की वजह से उन्हें भोलेनाथ कहा जाता है।
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