भारत के सबसे मुश्किल Trekking Places, जहां पहुंचना हर किसी के लिए आसान नहीं

ट्रेकिंग केवल एडवेंचर पसंद करने वाले लोग ही नहीं चुनते बल्कि आजकल के युवा, कपल्स, सोलो ट्रैवलर्स और यहां तक कि कई परिवार भी छुट्टियों में ट्रेकिंग का प्लान बनाने लगे हैं। इसकी खास बात यह है कि आपको ट्रेकिंग के समय प्रकृति को करीब से देखने का मौका मिलता है। जब आप कई किलोमीटर पैदल चलकर किसी पहाड़ी की चोटी तक पहुंचते हैं, तो वहां से दिखाई देने वाला नजारा आप कभी भूला नहीं पाते। हालांकि, कुछ जगहें ऐसी हैं जिन्हें भारत में डरावना भी माना जाता है। यह जगहें कठिन रास्तों और डरावनी कहानियों की वजह से चर्चा में रहते हैं। आज के इस आर्टिकल में हम आपको इन जगहों के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे।
Roopkund ट्रेकिंग को क्यों माना जाता है मुश्किल?
उत्तराखंड के चमोली में स्थित इस जगह को स्केलेटन लेक के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि यहां झील के किनारे और आसपास सैकड़ों मानव कंकाल मिले थे। समुद्र तल से लगभग 5,029 मीटर ऊंचाई पर स्थित है। रूपकुंड ट्रेक की शुरुआत लोहाजंग गांव से होती है, जो चमोली जिले में स्थित है। यह ट्रेक केवल अच्छी शारीरिक फिटनेस वाले लोग ही कर पाते हैं, क्योंकि इतनी चढ़ाई करना आसान नहीं होता।
- ऊंचाई अधिक होने के कारण ऑक्सीजन की कमी महसूस हो सकती है।
- यहां कभी भी मौसम बिगड़ सकता है, जिससे ट्रेकिंग के दौरान पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
- कई बार लोग अकेले सफर करते हैं और हादसे का शिकार हो जाता है, ऐसे में उनकी बॉडी मिलना भी मुश्किल हो जाता है।
Friendship Peak ट्रेकिंग को माना जाता है कठिन
हिमाचल प्रदेश के चम्बा और लाहौल-स्पीति जिलों में स्थित पीर पंजाल रेंज में यह ट्रेक आता है। इसकी ऊंचाई लगभग 5,289 मीटर है। इसकी यात्रा ज्यादातर लोग मनाली के पास स्थित सोलंग वैली से करते हैं। सोलंग वैली से धुंडी, बकरथाच और लेडी लेग से होते हुए फ्रेंडशिप पीक समिट तक जाते हैं। यह ट्रेक लगभग 7 दिनों का होता है, यहां तक पहुंचना आसान नहीं होता। ऐसा इसलिए, क्योंकि अंत में आते-आते बर्फ और ग्लेशियर पर चढ़ाई करनी पड़ती है, जो इस सफर को और भी ज्यादा मुश्किल बनाती है।

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स्टोक कांगरी ट्रेक
लद्दाख क्षेत्र में स्थित यह एक एसी चोटी है, जहां जाना तो बहुत लोग चाहते हैं, लेकिन आधे रास्ते में ही हार मानकर वापस आ जाते हैं। इसकी ऊंचाई लगभग 6,153 मीटर है। इस ट्रेक को खत्म करने में कई लोगों को 9 से 10 दिन भी लग जाते हैं। इस यात्रा की शुरुआत लेह से लगभग 15 से 20 किमी दूर स्टोक गांव से होती है। तेज ठंडी हवाएं और कम तापमान की वजह से लगभग हर किसी के लिए यह ट्रेक पूरा करना मुश्किल होता है।
अगर आप पहली बार ट्रेकिंग करने जा रहे हैं, तो सीधे कठिन ट्रेक न चुनें। ऊंचे पहाड़ों और कठिन रास्तों का रोमांच हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करता है, लेकिन ऐसे ट्रेक हर व्यक्ति के लिए आसान नहीं है। अगर आपकी फिटनेस अच्छी है और पहले भी टेकिंग कर चुकी हैं, तो ही इन जगहों पर जाने का प्लान करें।
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