9 नवंबर को ऐतिहासिक काम होने वाला है। दरअसल, 9 नवंबर को भारत-पाकिस्तान के बीच शुरू होने वाले करतारपुर कॉरिडोर का इनॉगरेशन होने वाला है। इस दिन पहला जत्था करतारपुर की ओर जाएगा। श्रद्धालुओं के इस जत्थे में एक्टर सनी देवल भी होंगे। यही नहीं करतारपुर कॉरिडोर को लेकर नवजोत सिंह सिद्धु भी काफी चर्चा में हैं क्योंकि वो भी करतारपुर जाना चाहते हैं। करतारपुर कॉरिडोर को लेकर 1999 से ही बातें चल रही हैं और पहली बार अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में ही इस कॉरिडोर को लेकर मांग शुरू हुई थी, लेकिन ये अब पूरी हुई है। तो क्या है ये करतारपुर कॉरिडोर जिसे लेकर इतने सालों से विवाद चल रहा है और क्या आप वहां जा सकती हैं? चलिए आज बात करते हैं इसी पर।  

क्यों जरूरी है करतारपुर कॉरिडोर- 

करतारपुर कॉरिडोर असल में सिख धर्म का तीर्थ स्थान जाने के लिए बनने वाला एक 4 लेन हाईवे है। ये करतारपुर तक जाता है जहां गुरुद्वारा दरबार साहिब है जो पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में है। इसे करतारपुर साहिब भी कहा जाता है जो पूरी दुनिया का सबसे बड़ा गुरुद्वारा है। यहीं गुरु नानक ने सिख धर्म की शुरुआत की थी और मौजूदा गुरुद्वारा वहां स्थित है जहां गुरु नानक जी ने आखिरी सांस ली थी। ये पाकिस्तान और भारत की बॉर्डर पर स्थित है और इसीलिए इसका महत्व बहुत ज्यादा है। क्योंकि ये गुरु नानक का मृत्यु स्थान है इसलिए काफी समय से सिख धर्म के लोग यहां पर जाने के लिए इजाजत मांग रहे हैं। 

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कितना लंबा है ये कॉरिडोर- 

करतारपुर गुरुद्वारा और डेरा बाबा नानक साहिब (भारत, पंजाब में स्थित) के बीच एक कॉरिडोर बनाया जाना है जिसके लिए पाकिस्तान और भारत बॉर्डर पर 4.7 किलोमीटर का ये कॉरिडोर बनाया जाएगा जिसकी मदद से तीर्थ यात्री बिना वीज़ा के पाकिस्तान जा सकेंगे। 

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इसे जब सबसे पहले अटल बिहारी वाजपेयी और नवाज़ शरीफ के बीच इस समझौते की बात हुई थी। इसे दिल्ली-लाहौर बस सर्विस के बीच में एक और राजनायिक काम माना जा रहा था, लेकिन तब से लेकर अब तक इसपर कोई भी फैसला नहीं आ सका था। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस कॉरिडोर का उद्घाटन करने की बात सामने आई है।  

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कब शुरू हुआ काम-  

26 नवंबर 2018 को करतारपुर कॉरिडोर का काम शुरू हुआ था। सबसे पहले उद्घाटन पाकिस्तान की तरफ हुआ था और दो दिन बाद भारत में। ये कॉरिडोर सिख तीर्थ स्थल के लिए गुरु नानक के 550वें जन्मदिन पर शुरू होगा जो 12 नवंबर 2019 को है। इसी दिन कार्तिक पूर्णिमा भी है।  

भारतीय बॉर्डर से दिखता है गुरुद्वारा- 

इस कॉरिडोर के बनने के बाद सिख तीर्थ यात्रियों की लंबी यात्रा खत्म हो जाएगी। अभी करतारपुर गुरुद्वारा जाने के लिए यात्रियों को पहले लाहौर जाना होता है और उसके बाद बस के जरिए 125 किलोमीटर लंबी यात्रा करनी होती है। जब्कि आप भारत की बॉर्डर से करतारपुर गुरुद्वारे को दूरबीन की मदद से देख सकते हैं ये इतना पास है। 

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कैसे जा सकते हैं करतारपुर-

करतारपुर साहिब एक टूरिस्ट डेस्टिनेशन नहीं बल्कि एक तीर्थ स्थान है इसलिए इसके लिए सरकार ने खास तरह के इंतज़ाम किए हैं। अभी तक https://prakashpurb550.mha.gov.in/kpr/ वेबसाइट पर लॉगइन कर आप रजिस्ट्रेशन करवा सकती थीं। हालांकि, अभी ये रजिस्ट्रेशन बंद हैं और पहले जत्थे के सफलता पूर्वक जाने के बाद ही इसके बारे में आगे डिटेल्स दी जाएंगी। 

इसके अलावा, कुछ आधिकारिक टूर ऑपरेटर्स भी इस कॉरिडोर के लिए टूर करवा सकते हैं हालांकि, उन्हें पाकिस्तान सरकार से NOC लेना होगा और इसीलिए हर टूर ऑपरेटर इसे नहीं करवा सकता है। भारतीय टूरिस्ट के लिए वीजा की जरूरत नहीं है। हालांकि, अगर कोई सिख किसी और देश से आ रहा है तो उसे लाहौर से वीजा लेना होगा।