How to recite Dwadash Jyotirlinga Stotram

शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते वक्त करें इस स्तोत्र का पाठ, मिलता है 12 ज्योतिर्लिंग की पूजा का फल

सावन में शिवलिंग पूजा और बेल पत्र चढ़ाने का विशेष महत्व है।&nbsp; ऐसे में शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते वक्त इस स्तोत्र का पाठ करें, इससे आपको 12 ज्योतिर्लिंग की पूजा का फल मिलेगा। <div>&nbsp;</div>
Editorial
Updated:- 2024-07-26, 20:29 IST

सावन का यह पावन महीना चल रहा है, इस दौरान सिव पूजा का विशेष महत्व है। सावन में लोग भगवान शिव के मंदिर में जाकर जल अर्पित करते हैं, जिसे जलाभिषेक कहा जाता है। इसके अलावा पूजा, आरती और भोग भी लगाते हैं। बहुत से लोगों के घर में भी शिवलिंग होती है और बहुत से लोग घर पर ही मिट्टी से पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजा करते हैं। सावन पूजा में अभिषेक और बेल पत्र चढ़ाने का विशेष महत्व है, ऐसे में यदि आप बेलपत्र चढ़ाकर ही 12 ज्योतिर्लिंग की पूजा का फल पाना चाहते हैं, तो इस स्तोत्र का पाठ करें। हमारे एस्ट्रो एक्सपर्ट शिवम पाठक ने पूजा के दौरान द्वादश ज्योतिर्लिंग पाठ के फायदे के बारे में बताया है। 

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र

Dwadash Jyotirlinga Stotram benefits

सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम् ।

भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये ॥1

श्रीशैलशृङ्गे विबुधातिसङ्गे तुलाद्रितुङ्गेऽपि मुदा वसन्तम् ।

तमर्जुनं मल्लिकपूर्वमेकं नमामि संसारसमुद्रसेतुम् ॥2

अवन्तिकायां विहितावतारं मुक्तिप्रदानाय च सज्जनानाम् ।

अकालमृत्योः परिरक्षणार्थं वन्दे महाकालमहासुरेशम् ॥3

कावेरिकानर्मदयोः पवित्रे समागमे सज्जनतारणाय ।

सदैवमान्धातृपुरे वसन्तमोङ्कारमीशं शिवमेकमीडे ॥4

पूर्वोत्तरे प्रज्वलिकानिधाने सदा वसन्तं गिरिजासमेतम् ।

सुरासुराराधितपादपद्मं श्रीवैद्यनाथं तमहं नमामि ॥5

याम्ये सदङ्गे नगरेऽतिरम्ये विभूषिताङ्गं विविधैश्च भोगैः ।

सद्भक्तिमुक्तिप्रदमीशमेकं श्रीनागनाथं शरणं प्रपद्ये ॥6

महाद्रिपार्श्वे च तटे रमन्तं सम्पूज्यमानं सततं मुनीन्द्रैः ।

सुरासुरैर्यक्ष महोरगाढ्यैः केदारमीशं शिवमेकमीडे ॥7

सह्याद्रिशीर्षे विमले वसन्तं गोदावरितीरपवित्रदेशे ।

यद्धर्शनात्पातकमाशु नाशं प्रयाति तं त्र्यम्बकमीशमीडे ॥8

सुताम्रपर्णीजलराशियोगे निबध्य सेतुं विशिखैरसंख्यैः ।

श्रीरामचन्द्रेण समर्पितं तं रामेश्वराख्यं नियतं नमामि ॥9

यं डाकिनिशाकिनिकासमाजे निषेव्यमाणं पिशिताशनैश्च ।

सदैव भीमादिपदप्रसिद्दं तं शङ्करं भक्तहितं नमामि ॥10

सानन्दमानन्दवने वसन्तमानन्दकन्दं हतपापवृन्दम् ।

वाराणसीनाथमनाथनाथं श्रीविश्वनाथं शरणं प्रपद्ये ॥11

इलापुरे रम्यविशालकेऽस्मिन् समुल्लसन्तं च जगद्वरेण्यम् ।

वन्दे महोदारतरस्वभावं घृष्णेश्वराख्यं शरणम् प्रपद्ये ॥12

ज्योतिर्मयद्वादशलिङ्गकानां शिवात्मनां प्रोक्तमिदं क्रमेण ।

स्तोत्रं पठित्वा मनुजोऽतिभक्त्या फलं तदालोक्य निजं भजेच्च ॥13

॥ इति द्वादश ज्योतिर्लिङ्गस्तोत्रं संपूर्णम् ॥

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Image Credit: shiv_k_lover- Instagram

 

 

 

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