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क्या सूर्यास्त के बाद शंख बजाना ठीक है?

घर में शंख रखना तो शुभ माना ही जाता है और इसे किसी भी पूजा के दौरान बजाने से घर की समृद्धि बनी रहती है। पूजा-पाठ के आरंभ से लेकर इसके समापन तक के लिए शंख बजाना जरूरी है।   
Updated:- 2024-08-08, 14:57 IST
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भारतीय संस्कृति में शंख को पूजा की एक महत्वपूर्ण सामग्री माना जाता है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत हमेशा शंखनाद से की जाती है। मान्यता है कि यदि किसी भी काम की शुरुआत में शंखनाद किया जाता है तो ये कार्य सिद्धि के संकेत देता है। यही नहीं शंख को शुभ, मंगलकारी और बहुत पवित्र माना जाता है। सदियों से ही शंख नाद न केवल धार्मिक अनुष्ठानों का अभिन्न हिस्सा रहा है, बल्कि यह सकारात्मक ऊर्जा और शांति का प्रतीक भी है।

जब भी हम किसी धार्मिक अनुष्ठान, पूजन या विशेष अवसर की बात करते हैं, तो शंख नाद का उल्लेख अवश्य मिलता है, लेकिन अक्सर हमारे मन में यह सवाल उठता है कि क्या सूर्यास्त के बाद शंख बजाना ठीक है? कई बार हम ऐसा सुनते हैं कि शंखनाद ईश्वर को जागृत करने की एक युक्ति है, इसलिए इसे रात के समय नहीं करना चाहिए। यदि हम इस प्रश्न के उत्तर की बात करते हैं तो इसके कारणों का पता लगाना जरूरी है। आइए ज्योतिषाचार्य पंडित अनिल चंद्र डौर्बी पराशर से इस प्रश्न का उत्तर जानें कि सूर्यास्त के बाद शंख बजाना उचित है या नहीं। 

शंखनाद का धार्मिक महत्व

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धार्मिक दृष्टिकोण से शंखनाद को अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना गया है। यह माना जाता है कि शंख की ध्वनि भगवान को प्रसन्न करती है और हमारे आस-पास के वातावरण को शुद्ध करती है। किसी भी मंगल पूजा में, चाहे वह दिन में हो या रात में हो शंख नाद को अनिवार्य माना जाता है।

ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि शंख नाद के बिना पूजा अधूरी होती है। यदि हम रात के समय हवन आदि कर रहे हैं या फिर ईश्वर का आह्वान कर रहे हैं तो शंख बजाना शुभ होता है। इससे आपको पूजा का पूर्ण फल भी मिलता है। किसी भी समय की गई पूजा के समय शंखनाद करना एक शुभ प्रक्रिया है जिसका पालन जरूरी होता है। 

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क्या सूर्यास्त के बाद शंखनाद करना ठीक है 

यदि आप रात्रि के समय कोई भी पूजा-पाठ करती हैं तो आप उसके आरंभ या समापन में शंख नाद कर सकते हैं। कई तरह के पूजन जैसे रात्रि के समय माता रानी का जागरण एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है।

इस अनुष्ठान में भक्तगण पूरी रात जागकर माता रानी की आराधना करते हैं और इस दौरान शंखनाद भी किया जाता है। शंख की ध्वनि से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है और भक्तों को विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है। यह दर्शाता है कि शंख नाद का समय सीमित नहीं है, बल्कि यह दिन और रात किसी भी समय किया जा सकता है। शंखनाद को ईश्वर को जागृत रखने का एक साधन माना जाता है, इसलिए जागरण में शंख नाद जरूर किया जाता है। 

शादियों के दौरान रात्रि के समय किया जाता है शंखनाद 

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शंखनाद का महत्व रात्रि में होने वाली शादियों में भी देखा जा सकता है। शादी के दौरान विभिन्न पूजन होते हैं और इन पूजनों के समय शंखनाद किया जाता है। शादी के दौरान शंख बजाना बहुत जरूरी माना जाता है यह न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह शादी की पवित्रता और शुभता को भी बढ़ाता है।

शंखनाद से विवाह समारोह और भी भव्य और मंगलकारी हो जाता है और बिना शंख बजाए शादी को पूर्णता नहीं मिलती है। इस दौरान रात्रि में शंख बजाने को बहुत शुभ माना जाता है। 

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विशेष अवसरों पर शंख बजाना शुभ माना जाता है 

जागरण और शादी-विवाह के आलावा भी शंख बजाना कई विशेष अवसरों पर बहुत शुभ माना जाता है। कई विशेष दिवसों पर जैसे नवरात्रि, शिवरात्रि, दिवाली या अन्य प्रमुख पर्वों में रात भर चलने वाले अनुष्ठानों में शंख बजाने का महत्व और भी बढ़ जाता है। इन रात्रि पूजनों में शंख नाद करना एक सामान्य और आवश्यक प्रक्रिया मानी होती है। इस दौरान शंख की ध्वनि से वातावरण पवित्र होता है और भक्तों को एक अनूठी आध्यात्मिक अनुभूति होती है। जिससे भक्तों के मन-मस्तिष्क पर सकारात्मक असर होता है। 

शुभ अवसरों पर शंख बजाना सदियों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा 

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सदियों से ही शंख नाद की परंपरा को बड़े आदर और श्रद्धा के साथ निभाया जाता है। आधुनिक जीवन की भागदौड़ में भी लोग धार्मिक अनुष्ठानों और पूजाओं के दौरान शंख नाद को विशेष महत्व देते हैं। यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था को बनाए रखने में सहायक है, बल्कि यह समाज में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करती है। 

इस प्रकार शंख बजाने की प्रक्रिया को बहुत शुभ माना जाता है और इसे एक निश्चित समय में बजाने को शुभ माना जाता है। आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है! हमारे इस रीडर सर्वे को भरने के लिए थोड़ा समय जरूर निकालें। इससे हमें आपकी प्राथमिकताओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। यहां क्लिक करें

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