
30 नवंबर 2025 को रविवार का दिन रहेगा जो मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि है जो रात 09:29 बजे तक रहेगी और उसके बाद एकादशी तिथि शुरू हो जाएगी। इस दिन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि लगभग पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का शुभ संयोग बन रहा है जो किसी भी कार्य को शुरू करने या उसमें सफलता पाने के लिए बहुत ही उत्तम माना जाता है। इस दिन उत्तर भाद्रपद नक्षत्र प्रभावी रहेगा, जिसके बाद रेवती नक्षत्र शुरू होगा, और सुबह के समय वज्र योग समाप्त होकर दिन भर सिद्धि योग रहेगा। हालांकि, शुभ कार्य करते समय राहुकाल का ध्यान रखना आवश्यक है, जो शाम 04:04 बजे से 05:23 बजे तक रहेगा, इस समय को छोड़कर बाकी समय शुभ है। ऐसे में आइये जानते हैं एमपी, छिंदवाड़ा के ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ त्रिपाठी से आज का पंचांग।
| तिथि | नक्षत्र | दिन/वार | योग | करण |
| मार्गशीर्ष शुक्ल दशमी (रात्रि 09:29 बजे तक)/एकादशी | उत्तर भाद्रपद | रविवार | वज्र (सुबह 07:12 बजे तक)/सिद्धि | तैतिल |

| प्रहर | समय |
| सूर्योदय | सुबह 06:56 बजे |
| सूर्यास्त | शाम 05:24 बजे |
| चंद्रोदय | दोपहर 01:48 बजे |
| चंद्रास्त | मध्यरात्रि 02:33 बजे |
| मुहूर्त नाम | मुहूर्त समय |
| ब्रह्म मुहूर्त | सुबह 05:07 बजे से सुबह 05:51 बजे तक |
| अभिजीत मुहूर्त | सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक |
| गोधुली मुहूर्त | शाम 05:24 बजे से शाम 05:51 बजे तक |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 01:54 बजे से दोपहर 02:36 बजे तक |
| अमृत काल | रात्रि 08:37 बजे से रात्रि 10:08 बजे तक |
| सर्वार्थ सिद्धि योग | पूरे दिन |
| रवि योग | पूरे दिन |
| मुहूर्त नाम | मुहूर्त समय |
| राहु काल | शाम 04:05 बजे से शाम 05:24 बजे तक |
| गुलिक काल | दोपहर 02:47 बजे से शाम 04:05 बजे तक |
| यमगंड | दोपहर 12:10 बजे से दोपहर 01:28 बजे तक |
| वर्ज्यम | सुबह 11:30 बजे से दोपहर 01:01 बजे तक |

30 नवंबर 2025 को मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि है। इस तिथि पर कोई बड़ा व्रत या त्योहार नहीं होता है, लेकिन यह दिन भगवान सूर्यदेव की पूजा के लिए विशेष रूप से समर्पित होता है, क्योंकि यह रविवार है। इस दिन सूर्यदेव की उपासना करने से आरोग्य, तेज और यश की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, इस दिन रात 09:29 बजे के बाद उत्पन्ना एकादशी व्रत की शुरुआत हो जाएगी, हालांकि एकादशी का मुख्य व्रत अगले दिन रखा जाएगा। इसलिए, जो लोग एकादशी का व्रत रखते हैं, वे दशमी तिथि पर सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं और एकादशी के नियमों का पालन करना शुरू कर देते हैं।
इस दिन को और अधिक मंगलकारी बनाने के लिए आप भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा भी कर सकते हैं, क्योंकि अगहन (मार्गशीर्ष) मास विष्णु जी को प्रिय है। घर में सुख-शांति बनाए रखने के लिए, रविवार को गाय को गुड़ और रोटी खिलाना बहुत शुभ माना जाता है। दिन में सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग रहने के कारण, इस दिन आप बिना किसी मुहूर्त के भी कोई छोटा और शुभ कार्य जैसे- पूजा-पाठ शुरू करना या कोई नया संकल्प लेना कर सकते हैं, क्योंकि ये योग सभी कार्यों की सिद्धि के लिए बहुत अच्छे माने जाते हैं।
चूंकि 30 नवंबर को रविवार है, इसलिए इस दिन किए गए उपाय सूर्य देव को समर्पित होते हैं। सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना सबसे महत्वपूर्ण उपाय है। तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें लाल फूल, रोली या अक्षत डालकर 'ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः' मंत्र का जाप करते हुए सूर्य को जल अर्पित करें। इसके अलावा, इस दिन लाल और पीले वस्त्रों का प्रयोग करना शुभ माना जाता है। किसी जरूरतमंद व्यक्ति को गेहूं या गुड़ का दान करने से सूर्य मजबूत होता है, जिससे आत्मविश्वास, सम्मान और पिता से संबंध बेहतर होते हैं।
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