Madhubani Saree: असली मधुबनी साड़ी की पहचान कैसे करें? खरीदने से पहले जरूर परखें ये 5 चीजें

हमारे यहां भारत के ज्यादातर राज्यों में साड़ियां वहां की संस्कृति की झलक दिखाती हैं। ऐसे में अगर आपको हैंडमेड और ट्रेडिशनल साड़ियों का शौक है, तो मधुबनी साड़ी का नाम तो आपने जरूर ही सुना होगा। पहली नजर में ये साड़ी इतनी खूबसूरत लगती है कि कोई भी बिना इसे खरीदे रह ही न पाए, लेकिन कई लोग इसकी असली-नकली में पहचान नहीं कर पाते हैं। इससे पैसे तो खर्च होते ही हैं, साड़ी भी आपको नकली मिल जाती है।
मार्केट में अब मधुबनी के नाम पर कई प्रिंटेड और मशीन से बनी साड़ियां भी मिलने लगी हैं, जो दिखने में तो मिलती-जुलती हैं, लेकिन असली मधुबनी नहीं होती हैं। असल बात तो ये है कि असली मधुबनी साड़ी की पहचान थोड़ी अलग होती है। अगर आप भी असली साड़ी खरीदना चाहती हैं, तो हम आपको इसके बारे में बारीकी से जानकारी दे रहे हैं। आइए जानते हैं-
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Image Credit- Pinterest/Etsy
मधुबनी साड़ी होती क्या है?
मधुबनी नाम सुनकर आपके मन में भी बिहार का ही ख्याल आ रहा होगा। जी हां, आप बिल्कुल सही सोच रही हैं। इस साड़ी का इतिहास बिहार के मिथिला इलाके से जुड़ा है। इन साड़ियों पर मधुबनी पेंटिंग की जाती है, जो एक बहुत पुरानी कला है और अभी तक चली आ रही है। मधुबनी साड़ियां हस्तकला का खूबसूरत उदाहरण हैं, जिसमें कपड़े पर सीधे पेंटिंग की जाती है। पहले ये कला दीवारों पर बनाई जाती थी, लेकिन धीरे-धीरे इसे कपड़ों, खासकर साड़ियों पर भी बनाया जाने लगा।
कैसे बनती है असली मधुबनी साड़ी? पूरा प्रॉसेस समझें
- सबसे पहले कपड़े (जैसे कॉटन या सिल्क) को लिया जाता है
- अब उसे साफ करके सुखाया जाता है
- फिर कलाकार पेंसिल या सीधे ब्रश से डिजाइन बनाते हैं
- इसके बाद नेचुरल या फैब्रिक कलर से हाथ से पेंटिंग की जाती है
- कलर करने में बहुत बारीकी रखी जाती है
- पूरी साड़ी बनाने में कई दिन या कभी-कभी हफ्ते लग जाते हैं
मधुबनी प्रिंट की खासियत क्या है?
इसमें ज्यादातर देवी-देवता, पेड़-पौधे, जानवर, सूरज-चांद जैसे डिजाइन बनाए जाते हैं। खास बात ये है कि डिजाइन में खाली जगह बहुत कम छोड़ी जाती है और हर हिस्सा छोटे-छोटे पैटर्न से भरा हुआ नजर आता है। इसके अलावा रंग ज्यादा चटकीले और कॉन्ट्रास्ट में यूज किए जाते हैं। बॉर्डर और अंदर के डिजाइन की बात करें तो ये बहुत डिटेल में बने होते हैं।
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बाकी से क्यों अलग होती हैं मधुबनी साड़ियां?
आपको बता दें कि ये साड़ियां सबसे अलग इसलिए होती हैं क्योंकि ये मशीन से प्रिंट नहीं होतीं, बल्कि हैंडमेड होती हैं। हर डिजाइन में कलाकारों की मेहनत और कहानी साफ दिखाई देती है। इसमें ट्रेडिशन और कला दोनों नजर आते हैं। आज के समय में भी मधुबनी साड़ियां सिर्फ फैशन नहीं, बल्कि एक कल्चर का हिस्सा हैं।
नेचुरल कलर्स का होता है इस्तेमाल
एक अच्छी मधुबनी साड़ी पहनने में बहुत कंफर्टेबल होती है और दिखने में भी बहुत रॉयल लगती है। असली मधुबनी साड़ी की चमक इसलिए अलग होती है क्योंकि इसमें नेचुरल कलर्स यानी पेड़-पौधों से निकले रंगों का इस्तेमाल होता है।
खरीदते समय कैसे करें असली मधुबनी साड़ी की पहचान?
हाथ से बनी फिनिश दिखेगी
असली मधुबनी साड़ी में आपको हल्की-हल्की असमान लाइनें दिखेंगी। ब्रश के निशानों पर भी ध्यान दें। अगर ये बहुत साफ नजर आ रहे हैं तो समझ जाएं कि ये असली है। ये साड़ी मशीन प्रिंट की तरह परफेक्ट नहीं होती है।
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Image Credit-Pinterest
पीछे की तरफ भी रंग दिखेगा
अगर साड़ी हैंड पेंटेड है, तो रंग कपड़े के पीछे भी हल्का-हल्का नजर आएगा। आपने नोटिस किया होगा कि जो साड़ियां मशीन प्रिंटेड होती हैं, उसमें पीछे का हिस्सा साफ या फीका होता है।
डिजाइन यूनिक लगेगा
अगर आपको दो साड़ियां बिल्कुल एक जैसी लग रही हैं तो समझ जाइए कि ये मशीन प्रिंटेड है, क्योंकि मशीन प्रिंट में ही सब कुछ परफेक्ट लगता है।
रंगों पर ध्यान दें
असली मधुबनी साड़ी खरीदने के लिए रंगों पर भी ध्यान देना जरूरी है। दरअसल इसके रंग नेचुरल और गहरे नजर आते हैं। नकली साड़ी में कलर्स काफी शाइनी होते हैं।
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कीमत जरूर देखें
मधुबनी साड़ियां हैंडमेड होती हैं, इसलिए इनकी कीमतें थोड़ी ज्यादा होती हैं। अगर आपको बहुत सस्ती साड़ी मिल रही है, तो खरीदने से पहले सोचें जरूर।
इन बातों का रखें ध्यान
- हमेशा किसी आर्टिस्ट से ही साड़ी खरीदें
- किसी सरकारी गवर्नमेंट हैंडलूम से साड़ियां खरीदें, ताकि आपको असली साड़ियां मिल सके
- शोरूम से खरीदने से बचें, वरना आपको डिजिटल प्रिंंटेड साड़ियां मिल सकती हैं
तो अगर आप भी मधुबनी साड़ी खरीदने की सोच रही हैं तो ऊपर बताई गई बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। मधुबनी साड़ियां सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि एक खूबसूरत कला है, जिसमें मेहनत, समय और परंपरा छिपी होती है। ऐसे में जरूरी है कि खरीदते समय इसकी असली और नकली में पहचान कर ली जाए।
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