January Skanda Sashti 2025: जनवरी में कब है स्कंद षष्ठी, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार, षष्ठी तिथि के दिन स्कंद षष्ठी का व्रत रखा जाता है। इस दिन कार्तिकेय की पूजा करने का विधान है। अब ऐसे में स्कंद षष्ठी का व्रत कब रखा जाएगा। इसके बारे में विस्तार से जानते हैं। 
 january skanda sashti 2025 date shubh muhurat and significance
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हिंदू धर्म में स्कंद षष्ठी के दिन व्रत रखने का विशेष महत्व है। पंचांग के हिसाह से य़ह पर्व हर माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि के दिन पड़ता है। इस दिन भगवान शिव के बड़े पुत्र पुत्र कार्तिकेय की पूजा की जाती है। भगवान कार्तिकेय को देवताओं का सेनापति कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कार्तिकेय ने तारकासुर का वध किया था। इससे तीनों लोकों को वज्रांग के असुर पुत्र से मुक्ति मिली थी। भगवान कार्तिकेय की पूजा विशेष रूप से दक्षिण भारत की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि भगवान कार्तिकेय की पूजा करने से व्यक्ति को सभी समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है। अब ऐसे में जनवरी में स्कंद षष्ठी का व्रत कब रखा जाएगा। पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व क्या है। इसके बारे में ज्योतिषाचार्य पंडित अरविंद त्रिपाठी से विस्तार से जानते हैं।

स्कंद षष्ठी का व्रत कब रखा जाएगा?

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वैदिक पंचांग के हिसाब से पौष माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि का आरंभ 04 जनवरी को रात 10 बजे से आरंभ हो रहा है और इसका समापन 05 जनवरी को रात 08 बजकर 15 मिनट पर होगा। इसलिए उदया तिथि के हिसाब से स्कंद षष्ठी का व्रत 05 जनवरी को रखा जाएगा।

स्कंद षष्ठी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त कब है?

पंचांग के अनुसार, पौष माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि 04 जनवरी को देर रात 10 बजे से आरंभ होने जा रहा है और 05 जनवरी को रात 08 बजकर 15 मिनट पर इसकी समाप्ति होगी। साधक इस दौरान विधिवत रूप से पूजा-पाठ कर सकते हैं।

स्कंद षष्ठी के दिन शुभ योग का हो रहा है निर्माण

ज्योतिष की मानें, तो पौष माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि के दिन रवि योग बन रहेा है। इस योग का संयोग सुबह 07 बजकर 15 मिनट से हो रहा है और इसका समापन रात 08 बजकर 18 मिनट तक है। साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग पूरी रात रहने वाला है। उसके बाद त्रिपुष्कर योग और अभिजीत मुहूर्त हैं।
इस दिन शिवावास योग रात 08 बजकर 18 मिनट तक रहने वाला है। इस दौरान विधिवत रूप से कार्तिकेय भगवान की पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

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स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा करने का महत्व है?

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स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को सभी समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है और व्यक्ति को अमोघ फल की भी प्राप्ति हो सकती है। भगवान कार्तिकेय की पूजा करने से सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलती है। वे अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और उन्हें सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं। जो दंपत्ति संतानहीन होते हैं, वे स्कंद षष्ठी का व्रत रखकर भगवान कार्तिकेय की पूजा करते हैं। मान्यता है कि इससे संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। भगवान कार्तिकेय की पूजा करने से रोगों से मुक्ति मिलती है और स्वास्थ्य लाभ होता है।

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Image Credit- HerZindagi

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