हिंदू धर्म में नवरात्रि का बहुत अधिक महत्व माना जाता है। 9 दिनों तक चलने वाला यह पावन पर्व माता दुर्गा के 9 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना को दर्शाता है। ऐसे में भक्त पूरे नौ दिनों तक अपने घर को सजाते हैं और बड़े ही उत्साह के साथ त्योहार मनाते हैं। अगर आप भी हर साल घर सजाने के लिए केवल आम के पत्तों और गेंदे के फूलों से बंदनवार बनाती हैं, तो इस बार नौ दिनों के लिए अलग-अलग प्राकृतिक पत्तों और खूबसूरत फूलों से इको-फ्रेंडली तोरण तैयार कर सकती हैं।

नवरात्रि के 9 दिनों के लिए 9 प्राकृतिक तोरण

घर की चौखट पर लगा एक जैसा आम के पत्तों वाला तोरण थोड़ा बोरिंग हो सकता है। ऐसे में अलग-अलग प्राकृतिक पत्तों और रंग-बिरंगे फूलों से बने यह तोरण न सिर्फ आपके घर की खूबसूरती बढ़ाएंगे, बल्कि पूरे घर को ताजगी से भी भर देंगे।

पहला दिन - आम के पत्ते और पीला गेंदा

नवरात्रि के पहले दिन आप पारंपरिक आम के पत्तों और पीले गेंदे के फूलों से तोरण बना सकती हैं। इसके लिए आम के पत्तों को सुंदर आकार में मोड़कर उनके बीच में गेंदे के फूल पिरोएं और एक लंबे धागे में पिरोकर मुख्य द्वार पर सजाएं।

दूसरा दिन - अशोक के पत्ते और लाल गुलाब

दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। इस दिन को खास बनाने के लिए आप अशोक के पत्तों और लाल गुलाब के फूलों का तोरण तैयार कर सकती हैं। इन्हें एक-एक करके लंबे धागे में पिरोकर दरवाजे पर बांधें। यह तोरण देखने में बेहद आकर्षक लगता है।

तीसरा दिन - नीम के पत्ते और सफेद मोगरा

तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा के दौरान आप अपने घर की चौखट पर नीम के पत्तों और सफेद मोगरे या चमेली के फूलों से बना खास तोरण लगा सकती हैं। नीम की छोटी टहनियां और पत्ते सफेद मोगरे के साथ बेहद खूबसूरत लगेंगे, जो घर में आध्यात्मिक शांति और ताजगी लाएंगे।  

चौथा दिन - पान के पत्ते और नारंगी गेंदा

चौथे दिन मां कुष्मांडा की उपासना के दिन आप पान के पत्तों और नारंगी गेंदे के फूलों का इस्तेमाल कर सकती हैं। पान के पत्तों पर आप चाहें तो रोली से 'स्वास्तिक' या 'ओम' का चिन्ह भी बना सकती हैं। यह तोरण आपके मुख्य द्वार को बेहद पवित्र और आकर्षक लुक देगा।  

पांचवां दिन - केले के पत्ते और लाल गुड़हल

पंचमी तिथि यानी मां स्कंदमाता की पूजा के दौरान बाजार से प्लास्टिक के तोरण लाने के बजाय केले के पत्तों और लाल गुड़हल के फूलों से तोरण बनाएं। गहरे हरे केले के पत्तों के साथ लाल गुड़हल का कॉम्बिनेशन आपके प्रवेश द्वार की शोभा में चार चांद लगा देगा।

छठा दिन - पीपल के पत्ते और नीला अपराजिता

छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा पर आप पीपल के पत्तों और अपराजिता के नीले फूलों से खास तोरण तैयार कर सकती हैं। इस तरह का तोरण बनाने में समय और मेहनत कम लगती है और यह कम खर्चे में बहुत ही सुंदर और मानसिक शांति देने वाला लुक देता है।

सातवां दिन - शमी के पत्ते और रजनीगंधा

सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा के दौरान शमी के पत्तों और रजनीगंधा या चांदनी के फूलों से बना तोरण सबसे बेस्ट माना जाता है। शमी के पत्ते भगवान शिव और माता को बेहद प्रिय हैं, वहीं खुशबूदार रजनीगंधा की लड़ियां आपके पूरे घर को प्राकृतिक सुगंध से महका देंगी।  

आठवां दिन - बेलपत्र और कनेर के फूल

महाअष्टमी के खास मौके पर आप तीन पत्तियों वाले बेलपत्र और कनेर के पीले व लाल फूलों का तोरण बना सकती हैं। महागौरी पूजन के दिन मुख्य द्वार पर बेलपत्र और कनेर का तोरण लगाने से घर में सुख, समृद्धि, शांति और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति मानी जाती है।

नौवां दिन- मौलश्री के पत्ते और नवरंग फूल

नवरात्रि के आखिरी दिन यानी महानवमी पर मां सिद्धिदात्री को प्रसन्न करने के लिए आप मौलश्री या कनेर के पत्तों के साथ पांच रंगों के फूलों का तोरण तैयार कर सकती हैं। यह तोरण नवरात्रि के आखिरी उत्सव को बेहद भव्य और मंगलमय लुक देगा।

निष्कर्ष: अगर आप भी नर्सरी या पौधों से ये पत्ते और फूल आसानी से जुटा सकती हैं, तो इस नवरात्रि बाजार के प्लास्टिक तोरण पर फिजूल खर्च करने के बजाय घर पर ही खुद अपने हाथों से यह बेहतरीन, कम खर्चे वाले और ईको-फ्रेंडली तोरण जरूर बनाएं।  यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से।   

(image credit: AI)