बॉलीवुड में पिछले कुछ सालों में कई तरह के बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। अब फिल्में सिर्फ मुंबई, बेंगलुरु और पुणे जैसे बड़े शहरों की कहानियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि छोटे शहरों और गांव की गलियों तक भी पहुंच गई हैं। हम बात कर रहे हैं भारत के दिल यानी मध्य प्रदेश की। बॉलीवुड फिल्मों में अब मध्य प्रदेश की समृद्ध संस्कृति, स्थानीय भाषा और ऐतिहासिक जगहों को बहुत ही खूबसूरती से दर्शाया जा रहा है।

मालवा की अल्हड़ तासीर हो या बुंदेलखंड की ठेठ बोली, आज बॉलीवुड के बड़े-बड़े निर्देशक और निर्माता अपनी फिल्मों की शूटिंग के लिए मध्य प्रदेश को चुन रहे हैं। भोपाल की नवाबियत से लेकर चंबल की घाटियों तक, एमपी का कल्चर अब बॉलीवुड सिनेमा का मुख्य हिस्सा बन चुका है। आइए जानते हैं कि कैसे मध्य प्रदेश की माटी और यहाँ की बोलियां बॉलीवुड की कहानियों का अटूट हिस्सा बन गईं।

मध्य प्रदेश की खूबसूरत लोकेशंस 

मध्य प्रदेश के छोटे शहरों और कस्बों में एक अलग ही सादगी देखने को मिलती है, जो अब सिनेमाघरों के बड़े पर्दे तक पहुंच चुकी है। महेश्वर के पावन घाट, ओरछा के प्राचीन मंदिर, ग्वालियर का भव्य किला और भोपाल की खूबसूरत झीलें कई सुपरहिट बॉलीवुड फिल्मों में दिखाई गई हैं। इसके अलावा, मध्य प्रदेश सरकार द्वारा फिल्म शूटिंग के लिए दी जाने वाली सिंगल विंडो क्लियरेंस अनुमति और आकर्षक सब्सिडी ने फिल्म मेकर्स के लिए यहां आकर काम करना और भी आसान बना दिया है।

मालवी, बुंदेलखंडी और निमाड़ी बोलियों का जादू

मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड और फिल्म सुविधा प्रकोष्ठ (Film Facilitation Cell) के आधिकारिक पोर्टल के अनुसार बॉलीवुड की फिल्मों में अब हीरो-हीरोइन केवल किताबी हिंदी या अंग्रेजी बोलने के बजाय मालवी, बुंदेलखंडी और निमाड़ी जैसी स्थानीय बोलियों में बातचीत करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर देखा जाए तो स्त्री जैसी सुपरहिट हॉरर-कॉमेडी फिल्मों में स्थानीय बोली और लहजे को बहुत तवज्जो दी गई है, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया।

मध्य प्रदेश की बैकग्राउंड पर बनीं मशहूर फिल्में

पिछले कुछ सालों से मध्य प्रदेश की संस्कृति और समाज को ध्यान में रखते हुए कई शानदार फिल्में बनाई गई हैं -

  • महेश्वर के पारंपरिक बुनकरों की जिंदगी और उनके संघर्ष को बड़े पर्दे पर दिखाते हुए 'सुई धागा' फिल्म रिलीज की गई थी।
  • चंबल की घाटियों और बुंदेलखंड के वास्तविक परिवेश को दर्शाते हुए 'पान सिंह तोमर' और 'सोनचिरैया' जैसी फिल्में सामने आईं।
  • मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक चंदेरी शहर की पृष्ठभूमि पर बनी 'स्त्री' और 'स्त्री 2' ने तो बॉक्स ऑफिस पर सफलता के झंडे ही गाड़ दिए।

बॉलीवुड में आए सकारात्मक बदलाव और टूरिज्म को बढ़ावा

मध्य प्रदेश के कल्चर के प्रभाव से हिंदी सिनेमा में कई पॉजिटिव बदलाव देखने को मिले हैं -

  • मध्य प्रदेश के स्थानीय कलाकारों और थिएटर से जुड़े कलाकारों को बॉलीवुड की बड़ी फिल्मों में काम करने के बेहतरीन अवसर मिले हैं।
  • फिल्मों के जरिए जब देश-विदेश के लोग मध्य प्रदेश की खूबसूरती को देखते हैं, तो इससे राज्य के टूरिज्म में काफी बढ़ोतरी हुई है।

निष्कर्ष: हिंदी सिनेमा भारत के छोटे-छोटे शहरों के दिलों की धड़कन को महसूस कराता है। वहीं बात करें मध्य प्रदेश की, तो बॉलीवुड में मध्य प्रदेश की संस्कृति और बोलियों का दबदबा बढ़ता जा रहा है। आने वाले समय में यह ट्रेंड न केवल बॉलीवुड को और अधिक समृद्ध बनाएगा, बल्कि एमपी की सांस्कृतिक पहचान को ऊंचाई तक पहुंचाएगा। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से। 

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