पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) एक ऐसी हेल्थ कंडीशन है, जो हार्मोनल असंतुलन, अनियमित पीरियड्स, थकान, मेटाबॉलिक से जुड़ी समस्याओं और संपूर्ण हेल्थ में बदलाव का कारण बनती है। ऐसे में परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि आज हम आपको उष्ट्रासन, प्रसारित पादोत्तानासन, नौकासन और परिवृत्त उत्कटासन जैसे 4 योगासनों के बारे में बता रहे हैं, जो पीसीओएस को कंट्रोल कर सकते हैं। इसकी जानकारी अक्षर योग केंद्र के फाउंडर और योग एवं आध्यात्मिक गुरु हिमालयन सिद्धा अक्षर शेयर ने शेयर की है।
पीसीओएस को कंट्रोल करने वाले 4 योगासन
योग जागरूकता, सही तरीके से सांस लेने, शरीर में लचीलापन और ताकत बढ़ाने के साथ ही शरीर को आराम देता है। इसे डॉक्टर की सलाह और सही इलाज के साथ एक एक्स्ट्रा अभ्यास के रूप में किया जा सकता है। योग करने से व्यक्ति अपने शरीर को बेहतर तरीके से समझ और महसूस कर सकता है। ये सात आसन अलग-अलग तरह के अभ्यास देते हैं, जिन्हें अपनी सुविधा, क्षमता और एक्सपर्ट की सलाह के अनुसार किया जा सकता है।
1. उष्ट्रासन- कैमल पोज
उष्ट्रासन एक बैक-बेंड आसन है, जो पेट और पेल्विक एरिया में स्ट्रेच लाकर पीओएस के लक्षणों को नेचुरली मैनेज करता है।
आसन की विधि
- इसे करने के लिए सबसे पहले घुटनों के बल बैठ जाएं।
- घुटनों के बीच हिप्स की चौड़ाई से ज्यादा दूरी बनाकर रखें।
- हाथों को हिप्स पर रखते हुए चेस्ट को धीरे-धीरे ऊपर की ओर उठाएं।
- इसके बाद, यदि आपको कंफर्टेबल महसूस हो, तो हाथों को एड़ियों की ओर लेकर जाएं।
- इस पोजीशन में कुछ देर रहने के बाद वापस पुरानी मुद्रा में आ जाएं।
उष्ट्रासन के फायदे
- यह आसन पीठ और पैरों की मसल्स को मजबूत करने और उनमें खिंचाव देने में मदद करता है।
- यह चेस्ट को खोलने, हिप्स के लचीलेपन को बढ़ाने और शरीर की मुद्रा को बेहतर बनाता है।
- यह आसान पेट और पेल्विक एरिया को खींचता है, जिससे यूट्रस और ओवरीज में ब्लड फ्लो तेज होता है।
2. प्रसारित पादोत्तानासन - वाइड लेग्ड फॉरवर्ड बेंड
प्रसारित पादोत्तानासन खड़े होकर और आगे की ओर झुककर किया जाने वाला आसन है, जिसमें शरीर के निचले हिस्से में खिंचाव आता है। इस योगासन में स्थिरता और संतुलन पर फोकस किया जाता है।
आसन की विधि
- इसे करने के लिए रीढ़ को सीधा और दोनों पैरों ज्यादा चौड़ा करके में खड़ी हो जाएं।
- इसके बाद हिप्स से धीरे-धीरे आगे की ओर झुकते हुए सिर को नीचे लाएं।
- हाथों को जमीन पर कंधों की सीध में रखें। अगर संभव हो, तो सिर के ऊपरी हिस्से को जमीन पर टिकाने की कोशिश करें।
- इस पोजीशन में नॉर्मल सांस लेते हुए कुछ सेकेंड के लिए रुकें।
प्रसारित पादोत्तानासन के फायदे
- यह आसन हैमस्ट्रिंग्स को स्ट्रेच करने और पैरों को मजबूत बनाने में मदद करता है।
- यह हिप्स तथा थाइज के अंदरूनी हिस्से में खिंचाव देता है और लचीलेपन, स्थिरता तथा शरीर के प्रति जागरूकता को बढ़ाता है।
- पीठ दर्द से राहत देता है।
- सिर की ओर ब्लड और ऑक्सीजन का फ्लो बढ़ाता है, जिससे मानसिक शांति मिलती है।
3. नौकासन-बोट पोज
इस योगासन को करते समय शरीर की आकृति नाव की तरह हो जाती है, इसलिए इसे नौकासन या बोट पोज के नाम से जानते हैं। यह ऐसा आसन है, जो शरीर की कोर मसल्स को मजबूत करने और पेल्विक एरिया में ब्लड फ्लो को बढ़ाने में मदद करता है।
आसन की विधि
- इसे करने के लिए मैट पर सीधा बैठ जाएं।
- अब दोनों घुटनों को मोड़कर पैरों को फर्श पर रखें।
- इसके बाद रीढ़ को लंबा रखते हुए शरीर को थोड़ा पीछे की ओर लेकर जाएं।
- फिर, पैरों को उठाकर क्षमता और सुविधानुसार सीधा करें।
- हाथों को सामने की ओर फैलाकर धीरे और समान रूप से सांस लेती रहें।
नौकासन के फायदे
- यह आसन कोर की ताकत को बढ़ाता है।
- पेट के हिस्से को स्थिर रखता है और पूरे शरीर के बैलेंस और कंट्रोल को बेहतर बनाने में सहायक है।
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4. परिवृत्त उत्कटासन- रिवाइटलाइज्ड चेयर पोज
परिवृत्त उत्कटासन एक पावरफुल आसन है, जिसमें बैलेंस के साथ हल्का ट्विस्ट शामिल होता है। यह पीसीओएस के लक्षणों को मैनेज करने और हार्मोनल बैलेंस को सुधारने में काफी असरदार है।
आसन की विधि
- इसमें अपनी सुविधानुसार पैरों में उचित दूर बनाकर खड़ी हो जाएं।
- घुटनों को मोड़ते हुए हिप्स को थोड़ा पीछे की ओर ले जाए, जैसे आप किसी चेयर पर बैठी हों।
- हथेलियों को चेस्ट के सामने रखें और स्थिरता बनाए रखते हुए सिर को धीरे-धीरे एक तरफ मोड़ें।
- कुछ देर इस पोजीशन में रहें। इस योगासन को कई बार दोहराएं।
परिवृत्त उत्कटासन के लाभ
- यह आसन थाइज और पैरों की शक्ति, संतुलन तथा शरीर के ऊपरी हिस्से की गतिशीलता बढ़ाता है।
- जब आप इस आसन में रीढ़ और पेट को ट्विस्ट करती हैं, तो पेट और निचले हिस्से के अंगों पर दबाव पड़ता है।
PCOS से जूझ रही महिलाओं और लड़कियां के लिए योग हेल्दी लाइफस्टाइल का हिस्सा होना चाहिए। हेल्दी रहने के लिए योगासन के साथ सही डाइट, पर्याप्त पानी, अच्छी नींद, रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी और सही मेडिकल केयर लेना भी जरूरी है। आवश्यकतानुसार योगासन में बदलाव किया जा सकता है और इन्हें धीरे-धीरे, अपनी सुविधा एवं क्षमता के अनुसार किया जाना चाहिए।
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