हेल्दी शरीर के लिए रीढ़ की मजबूती जितनी जरूरी है, कूल्हे भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं, लेकिन अक्सर हम कूल्हे और उसकी मसल्स को नजरअंदाज कर देते हैं। क्या आप जानती हैं, कूल्हे के मजबूत मसल्स आपको लंबी उम्र का वरदान दे सकते हैं। दोनों के बीच का संबंध और मसल्स को मजबूत करने के लिए क्या करना चाहिए? आइए इसके बारे में नोएडा ऑर्थोपेडिक सेंटर के ऑर्थोपेडिक डॉ. अमित अग्रवाल से समझते हैं।
हमारे कूल्हे के मसल्स (ग्लूट्स) शरीर को संतुलन और ताकत देने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। ये मसल्स चलने, सीढ़ियां चढ़ने और बैठने-उठने में मदद करते हैं। अगर ये कमजोर हो जाएं, तो कमर दर्द और शरीर का संतुलन बिगड़ने लगता है, जिससे कहीं भी लड़खड़ाकर गिर जाने का खतरा बढ़ सकता है। खासकर उम्र बढ़ने के साथ इन्हें मजबूत रखना बहुत जरूरी है ताकि लंबे समय तक बिना सहारे रोजमर्रा के काम आसानी से किए जा सके।
युवाओं में हो रही है ज्यादा दिक्कत
अक्सर हमें लगता है कि उम्र बढ़ने से ही कूल्हे कमजोर होने लगते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। आजकल अधिकांश युवा और युवतियां कूल्हे में दर्द की शिकायत से परेशान हैं, उन्हें चलने-दौड़ने या फिर ज्यादा देर बैठे रहने में दिक्कत हो रही है। यही नहीं, कूल्हे का दर्द नीचे पैरों तक चले जाने से चलने में भी दर्द होता है।
क्यों कमजोर हो रही हैं मसल्स?
कूल्हे के दर्द के पीछे केवल उम्र को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। इसके पीछे कई अहम कारण हैं। अगर किसी का वजन ज्यादा है तो कूल्हे पर बोझ पड़ता है और उसका सीधा असर घुटनों पर होने लगता है।
लंबे समय तक बैठे रहने या फिर गाड़ी चलाने से भी कूल्हों पर जोर पड़ता है, इससे साइटिका की मसल्स दबती हैं और फिर उम्र बढ़ने के साथ दिक्कतें और बढ़ने लगती हैं। कई लोग हिप्स में दर्द की शिकायत भी करते हैं, लेकिन उन्हें यह समझ नहीं आता कि यह दर्द कहां से आ रहा है। दरअसल, रीढ़ का दर्द पीठ के निचले हिस्से से होकर कूल्हे और फिर पैरों तक जाता है। यह दर्द केवल कूल्हे तक नहीं रहता बल्कि पूरे हिप्स जॉइंट तक पहुंच जाता है।
कूल्हे के दर्द और साइटिका में अंतर
साइटिका और कूल्हे का दर्द अक्सर आपस में जुड़े होते हैं, क्योंकि साइटिका नस पीठ के निचले हिस्से से निकलकर कूल्हे के माध्यम से पैरों तक जाती है। यह दर्द तेज, जलन, या सुन्नता के रूप में महसूस होता है जो आमतौर पर रीढ़ की हड्डी में नस दबने (हर्नियेटेड डिस्क या स्पाइनल स्टेनोसिस) के कारण होता है। यह समस्या कमर, नितंबों और पैरों को प्रभावित कर सकती है।
ऐसा अक्सर देखा जाता है कि कूल्हे के दर्द वालों को साइटिका नस में भी दर्द रहता है। दरअसल, दोनों एक तरह का दर्द ही है, जिससे चलने या सीढ़ियां चढ़ने जैसी कुछ गतिविधियों को करने में कठिनाई होती है। कूल्हे की मसल्स में कमजोरी व्यक्ति के शारीरिक हावभाव और चलने के तरीके को प्रभावित कर सकती है।
कैसे मजबूत हों मसल्स?
इस दर्द का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन अगर कूल्हे की मसल्स मजबूत रहती हैं तो दर्द कम होता है। इसके लिए सबसे पहले बैठने और चलने की पोजीशन चेक करनी चाहिए। बीच-बीच में सीट से उठने का प्रयास करना चाहिए। लगातार बैठे रहने से कूल्हे पर जोर पड़ता है। इसके साथ ही बीच-बीच में टहलना चाहिए और स्ट्रेचिंग भी करनी चाहिए। इसके अलावा रोजाना सुबह-शाम शारीरिक गतिविधियां करें ताकि शरीर एक्टिव रहे। साथ ही सीढ़ियां चढ़ना और उतरना भी जरूरी अभ्यास है। इससे पूरा शरीर संतुलित रहता है।
ये हैं जरूरी एक्सरसाइज
- स्क्वाट्स- यह कूल्हे और जांघों को मजबूत करने के लिए बेहतरीन एक्सरसाइज है।
- ब्रिज- पीठ के बल लेटकर कूल्हों को ऊपर की ओर उठाने की एक्सरसाइज करनी चाहिए।
- साइड लेग रेज- करवट लेकर पैर ऊपर करके उठाना।
आप भी इन टिप्स की मदद से कूल्हों की मसल्स को मजबूत बना सकती हैं। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
लेखक- सुमन अग्रवाल
Image Credit: Shutterstock
