हमारे यहां भारत में खाने-पीने की कई सारी वैरायटी देखने को मिलती है। हर सीजन में कुछ न कुछ नया आ जाता है। मानसून में भी एक चीज खाई जाती है जिसकी कीमत मटन से भी ज्यादा होती है। इसे रुगड़ा कहते हैं। वैसे तो रुगड़ा झारखंड में ज्यादा होता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों में भी यह मिल जाता है। इसकी कीमत 1100 से 1200 रुपये प्रति किलो होती है। इसके बाद भी इसे खरीदने वालों की कमी नहीं होती है।
रुगड़ा को वेज मटन क्यों कहा जाता है?
इसे लोग वेज मटन भी कहते हैं। जब इसे पकाकर खाया जाता है तो यह एकदम मटन जैसा ही स्वाद देता है। इसी कारण हम वेजिटेरियंस को यह खूब पसंद आता है। आइए जानते हैं कि यह रुगड़ा है क्या, यह इतना महंगा क्यों बिकता है और इसकी खासियत है?
क्या है रुगड़ा?
रुगड़ा एक तरह का जंगली फंगस है, जिसे मशरूम की एक खास किस्म माना जाता है। इसे खेतों में नहीं उगाया जाता है बल्कि मानसून के समय जंगलों में यह अपने आप निकलता है। झारखंड के कई इलाकों में इसे 'पुटू' नाम से भी जाना जाता है। जबकि यूपी में कुछ जगहों पर इसे कटरुआ, सेफड़ा जैसे नामों से भी जाना जाता है।
रुगड़ा को 'वेज मटन' क्यों कहा जाता है?
रुगड़ा पकने के बाद काफी गाढ़ा और दानेदार हो जाता है। इसका स्वाद और इसकी बनावट कई लोगों को मटन जैसी लगती है। इसी वजह से इसे वेज मटन भी कहा जाता है। हालांकि यह पूरी तरह शाकाहारी है।
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सिर्फ बारिश में ही क्यों मिलता है रुगड़ा?
रुगड़ा का सीजन बहुत छोटा होता है। मानसून की पहली अच्छी बारिश जब होती है तो यह जंगलों में निकलना शुरू हो जाता है और करीब 20 से 25 दिन तक ही मिलता है। जैसे-जैसे बारिश ज्यादा होने लगती है, इसकी कमी हो जाती है। इसलिए हर साल लोग इसका इंतजार करते हैं।
खेतों में इसकी खेती क्यों नहीं होती?
रुगड़ा पूरी तरह से नेचुरल है। यह खास तरह के जंगलों और मिट्टी में अपने आप निकलता है। अभी तक इसकी खेती बड़े स्तर पर सफल नहीं हो पाई है। यही वजह है कि इसकी सप्लाई कम ही रहती है और कीमत काफी ज्यादा होती है।
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कहां उगता है रुगड़ा?
रुगड़ा आमतौर पर सखुआ (साल) के पेड़ों की जड़ों के आसपास पाया जाता है। यह पेड़ों की जड़ों के साथ एक नेचुरल संबंध बनाकर बढ़ता है। जहां मिट्टी में नमी बनी रहती है, उसी कारण ये उगता है
जमीन के नीचे कैसे मिलता है रुगड़ा?
आपको बता दें कि रुगड़ा जमीन के ऊपर दिखाई नहीं देता है। यह मिट्टी के लगभग 2 से 3 इंच नीचे बनता है। जब इसका आकार बढ़ने लगता है, तो ऊपर की मिट्टी में थोड़ी दरारें दिखाई देने लगती हैं। जंगल की अच्छी जानकारी रखने वाले लोग इन्हीं दरारों को देखकर लकड़ी की मदद से इसे बाहर निकालते हैं।
रुगड़ा के कितने प्रकार होते हैं?
आमतौर पर रुगड़ा दो प्रकार का होता है, लेकिन स्वाद लगभग एक जैसा ही रहता है। बस रंगों की वजह से इनकी बनावट थोड़ी अलग हो जाती है।
- सफेद रुगड़ा- यह अंदर से पूरी तरह सफेद और काफी सख्त होता है। इसे सबसे स्वादिष्ट माना जाता है। बाजार में इसकी कीमत भी ज्यादा होती है।
- काला रुगड़ा- यह थोड़ा ज्यादा पका हुआ होता है। इसका अंदर वाला हिस्सा काला या मटमैला दिखाई देता है और इसकी बनावट सफेद रुगड़ा से थोड़ी सॉफ्ट होती है।
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इतना महंगा क्यों बिकता है रुगड़ा?
रुगड़ा की कीमत ज्यादा होने के पीछे कई वजहें बताई जाती हैं। जैसे-
- यह साल में सिर्फ एक बार मिलता है।
- इसका सीजन बहुत छोटा होता है।
- इसकी खेती नहीं होती है।
- इसे जंगलों से हाथों से इकट्ठा किया जाता है।
- बाजार में इसकी मांग काफी ज्यादा रहती है।
इन्हीं कारणों से इसकी कीमत 1100 से 1200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है।
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तो अब तो आप जान ही गई होंगी कि मानसून में मिलने वाला रुगड़ा इतना महंगा क्यों मिलता है। साथ ही अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
Image Credit- Jagran
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