पहाड़ और हसीन वादियों को पसंद करने वालों की सूची में उत्तराखंड सबसे ऊपर आता है। यह जगह न केवल प्राकृतिक खूबसूरती, बल्कि अपने प्रसिद्ध मंदिरों के लिए भी जानी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यहां एक ऐसी जगह भी है, जिसकी चर्चा दुनियाभर में हो रही है? जी हां, हम बात कर रहे हैं लेखक गांव की। वैसे तो भारत में कई ऐसे गांव हैं जो अपनी अलग पहचान के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस विलेज की अपनी एक खास बात है। आज के इस लेख में हम आपको इस गांव की प्रमुख विशेषताओं के बारे में बताने जा रहे हैं।
लेखक गांव कहां है?
देश का पहला लेखक गांव उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के पास थानो नाम के इलाके में स्थित है। देहरादून मुख्य शहर से इस जगह की दूरी लगभग 24 किलोमीटर है। यह पहला ऐसा गांव है, जिसे खासतौरसे साहित्य, कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए बसाया गया है।
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10 लाख किताबों वाला पुस्तकालय
लेखक गांव की खासियत में मुख्य बिंदु हिमालय लाइब्रेरी है। इस पुस्तकालय में आने वाले समय में 10 लाख किताबों को इकट्ठा करने का एक बड़ा लक्ष्य रखा गया है। फिलहाल यहां हजारों किताबें मौजूद हैं। यह लाइब्रेरी प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय से प्रेरित है। हालांकि, वर्तमान में यहां पर 24,300 किताबें मौजूद हैं। यह जानकारी
लेखकों के लिए खास लेखक कुटीर
लिखने का कार्य हमेशा शांति और सुकून वाली जगह पर हो पाता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए यहां लगभग 50 बीघा जमीन पर खूबसूरत लेखक कुटीर बनाए गए हैं। इन कुटीरों को पहाड़ी शैली में बहुत ही खूबसूरती से ढाला गया है। यहां लेखक, चित्रकार या कोई भी कलाकार आकर ठहर सकते हैं। बॉलीवुड के कई मशहूर कलाकार और देश-विदेश के लेखक यहां आकर समय बिता चुके हैं।
सांस्कृतिक धरोहर का अनूठा संगम
लेखक गांव में न केवल किताबे बल्कि यहां भारत की क्षेत्रीय भाषाओं, लोक कलाओं, शास्त्रीय संगीत और विविध सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को भी सहेजकर रखा गया है। यहां देश के अलग-अलग कोनों से आने वाले कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं, जिससे यह गांव हमारी प्राचीन और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने का केंद्र बन गया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली लेखक गांव को पहचान
लेखक गांव को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए यहां स्पर्श हिमालय महोत्सव जैसे अंतरराष्ट्रीय साहित्य सम्मेलनों का आयोजन किया जाता है। दुनिया के 40 से 65 से भी अधिक देशों के सैकड़ों लेखक, कवि और शिक्षाविद एक मंच पर आ चुके हैं। यह गांव अब वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति, हिंदी भाषा और कला को बढ़ावा देने का एक बहुत बड़ा केंद्र बन चुका है।
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Image Credit- Lekhak village
