इस शहर को कहा जाता है चाय का शैंपेन, क्या आपको पता है इसका नाम?

Champagne Of Tea: भारतीय घरों में सुबह की शुरूआत चाय की चुस्की के साथ होती है। इतना ही नहीं बल्कि शाम के वक्त भी चाय बनती है। वहीं टी लवर्स दिनभर में न जाने कितनी चाय पी जाते हैं। फिर चाहे भीषण गर्मी हो या फिर कड़कड़ाती ठंड। हालांकि चाय में जान डालने का काम चाय की पत्ती का होता है। इसके स्वाद को बेहतर बनाने के लिए लोग बाजार में एक नंबर की पत्ती खरीद कर लाते हैं। चाय की पत्ती पहाड़ी और ढलान वाले क्षेत्रों में उगाई जाती है। असम, पश्चिम बंगाल (दार्जिलिंग और जलपाईगुड़ी), तमिलनाडु (नीलगिरी) और केरल इसकी खेती के लिए प्रसिद्ध है।
दुनियाभर के लोग जो यहां पर घूमने आते हैं वह यहां से चाय पत्ती खरीदकर जरूर ले जाते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि चाय का शैंपेन किस शहर को कहा जाता है? आइए नीचे लेख में जानते हैं-
चाय का शैंपेन किस शहर को कहा जाता है? (Which City Is Called Champagne Of Tea)
पहाड़ों की रानी कहे जाने वाले पश्चिम बंगाल के खूबसूरत हिल स्टेशन दार्जिलिंग को दुनिया भर में चाय का शैंपेन(Champaign of Teas) के नाम से जाना जाता है। जैसे दुनिया की सबसे बेहतरीन और असली शैंपेन सिर्फ फ्रांस के एक खास इलाके में ही बनती है, ठीक वैसे ही दार्जिलिंग की चाय का स्वाद और लाजवाब खुशबू दुनिया में कहीं और नहीं मिल सकती। अपनी इस शाही क्वालिटी और बेमिसाल स्वाद के कारण दार्जिलिंग की चाय को दुनिया भर के चाय प्रेमियों के बीच यह खास नाम मिला है।
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क्यों कहा जाता है इसे 'चाय का शैंपेन'? (Why Is It Called Champagne of Tea)
अब दूसरा सवाल जो मन में आता है कि आखिर दार्जिलिंग को ही क्यों चाय का शैंपने नाम दिया गया है? बता दें कि कंचनजंगा पहाड़ियों की गोद में बसे यहां के चाय बागानों को जो मिट्टी, ऊंचाई, ठंडी हवाएं और हल्की धुंध मिलती है। इस खास मौसम की वजह से यहां की चाय की पत्तियों में एक प्राकृतिक और हल्की मीठी सुगंध आ जाती है, जिसे चाय की भाषा में मस्काटेल फ्लेवर कहते हैं। यह स्वाद काफी हद तक अंगूर के स्वाद जैसा अहसास कराता है।
देश का पहला जीआई टैग पाने वाला शहर (First City In The Country To Get GI Tag)
दार्जिलिंग की चाय के नाम इतिहास में एक बड़ा रिकॉर्ड दर्ज है। यह भारत का सबसे पहला ऐसा प्रोडक्ट था, जिसे साल 2004 में जीआई टैग दिया गया था। इस टैग का मतलब यह है कि दुनिया में कहीं भी और उगाई जाने वाली चाय को दार्जिलिंग चाय कहकर नहीं बेचा जा सकता। यह अधिकार सिर्फ इसी शहर की पहाड़ियों में उगने वाली चाय के पास है, जो इसकी शुद्धता और असली पहचान को बनाए रखता है।
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