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Gudi Padwa 2024: जानिए गुड़ी पड़वा को अन्य राज्यों में किन-किन नामों से जाना जाता है?

गुड़ी पड़वा का त्योहार 9 अप्रैल, 2024 को है। इसे देशभर में बड़े धूमधाम से मनाया जाता हैं। तो चलिए जानते हैं कि गुड़ी पड़वा का पर्व कौन से राज्य में किस नाम से जाना जाता है। 
Updated:- 2024-04-08, 15:01 IST
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Gudi Padwa 2024: विविधता के देश भारत में लगभग हर दिन कोई न कोई व्रत या त्योहार अवश्य ही होता है। इन्हीं में से एक है- गुड़ी पड़वा का पर्व, जो कि आमतौर पर महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर सेलिब्रेट किया जाता है। गुड़ी पड़वा का त्योहार हर साल चैत्र नवरात्रि के प्रतिपदा के दिन से मनाया जाता है। वहीं, इस साल यह पर्व 9 अप्रैल, दिन मंगलवार को है। गुड़ी पड़वा से ही विक्रम संवत का नव वर्ष भी कहा जाता है। भले ही यह मराठी समुदाय में प्रचलित है। पर, आपको बता दें, गुड़ी पड़वा भारत के विभिन्न क्षेत्रों में भी मनाया जाता है, जिसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है। जी हां, यह एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो नए साल की शुरुआत को चिह्नित करता है और उम्मीद व खुशियों का प्रतीक माना जाता है। इसी के साथ आइए जानते हैं कि गुड़ी पड़वा को अन्य राज्यों में किन-किन नामों से जाना जाता है।

गुड़ी पड़वा को अन्य राज्यों में क्या कहा जाता है?

what is gudi padwa called in kerala

  • गुड़ी पड़वा को आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में उगादी के नाम से जानते हैं। 
  • इस त्योहार का नाम कश्मीर में नवरेह से प्रसिद्ध है।
  • बात मणिपुर की करें तो गुड़ी पड़वा को यहां साजिबू नोंगमा पानबा के रूप में मनाया जाता है।
  • गोवा और केरल में कोंकणी समुदाय के लोग इस त्योहार को संवत्सर पड़वा के नाम से जानते हैं।
  • गुड़ी पड़वा का त्योहार गुजरात में नवरात्रि के तौर पर सेलिब्रेट किया जाता है।

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गुड़ी पड़वा का महत्व 

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गुड़ी पड़वा  के अवसर पर लोग अपने घरों को साफ-सफाई करके रंगोली बनाते हैं। नए-नए कपड़े पहनते हैं और महाराष्ट्र में लोग इस दिन अपने घर के बाहर गुड़ी लगाते हैं। गुड़ी पड़वा पर लोग नए साल की शुरुआत का जश्न मनाते हैं। माना जाता है कि ब्रह्मा जी ने आज ही के दिन ब्रह्मांड की रचना की थी। इसलिए गुड़ी को ब्रह्मध्वज भी कहा जाता है। कुछ लोग छत्रपति शिवा जी की विजय को याद करते हुए भी घरों में गुड़ी लगाते हैं। वहीं, किसान इसे रबी फसल के कटने के बाद दोबारा बुवाई की खुशी में मनाते हैं। साथ ही, अच्छी फसल की कामना के लिए इस दिन वे अपने खेतों की जुताई भी करते हैं।

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Image credit- Herzindagi

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