Tue Sep 22, 2026 | Updated 05:34 PM IST

मुझे पलटकर थप्पड़ मार देगी! बेटी आदिरा को लेकर रानी मुखर्जी का डर, क्या वाकई 'Gen Alpha' के सामने बेबस हैं पेरेंट्स? जानें

अभी हाल ही में रानी मुखर्जी के बयान ने पेरेंट्स के मन में उथल-पुथल पैदा कर दी है। उन्होंने जनरेशन अल्फा बच्चों की परवरिश को लेकर एक ऐसी बात कही है जो सोचने पर मजबूर कर देती है। जानते हैं क्या है पूरा मामला...
Updated:- 2026-01-19, 17:13 IST
 rani mukerji is jokingly afraid of her daughter adira

अभिनेत्री रानी मुखर्जी ने अभी हाल ही में अपनी 10 साल की बेटी आदिरा चोपड़ा के बारे में एक ऐसी बात कही है जो शायद हर माता-पिता के मन में डर बैठा सकती है। बता दें कि उन्होंने जेनरेशन अल्फा के बारे में बताया है। उन्होंने बताया है कि जनरेशन अल्फा की मां होने के नाते उनका पालन पोषण का तरीका हमारी परवरिश से एकदम अलग है। उन्होंने एक इंटरव्यू में मजाकिया अंदाज में कहा है कि वह मुझे डांट भी देती है, वह अल्फा जनरेशन है इसलिए वह मुझे सुना देती है और मुझे उसकी बातें सुननी भी पड़ती हैं। हर पीढ़ी में बदलाव आता है। मैनें अपनी मां से थप्पड़ खाए हैं, लेकिन मैं अदिरा के साथ ऐसा करने की सोच भी नहीं सकती, वह मुझे पलटकर थप्पड़ मार देगी। उन्होंने हंसते हुए कहा कि जब नेशनल अवार्ड चल रहे थे तब वह घर में कूद रही थी, वह बहुत प्यारी है, लेकिन वह एक अल्फा किड है इसलिए मैं उससे बहुत ज्यादा डरती हूं।

rani mukhraji (2)

हालांकि, ये बात इस सवाल को उठाती है कि क्या अल्फा जेनरेशन से सभी माता-पिता को सतर्क रहने की जरूरत है? क्या बाकई अल्फा जनरेशन के सामने पेरेंट्स बेबस हैं? इसके लिए हमने कोच और हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट, साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की, तो उन्होंने भी कुछ पॉइंट सामने रखें, ऐसे में इनके बारे में आपको पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि क्या बाकई अल्फा जनरेशन के आगे माता-पिता बेबस हैं या नहीं। पढ़ते हैं आगे...

क्यों अलग है जेनरेशन अल्फा?

साल 2010 के बाद जन्में बच्चों को जेन अल्फा कहते हैं। ये बच्चे पूरी तरह से डिजिटल दौर में पैदा हुए हैं और इन्हें काफी जागरूक भी माना जाता है। ये बच्चे हर काम के पीछे का कारण जानना चाहते हैं।

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क्या वाकई बेबस हैं आज के पेरेंट्स?

एक्सपर्ट के मुताबिक यह बेबसी नहीं, बल्कि पेरेंटिंग स्टाइल में बदलाव है। अब अनुशासन के लिए डंडे या थप्पड़ का सहारा नहीं, बल्कि Communication की मदद ली जाती है।

rani mukhraji (3)

आज के पेरेंट्स बच्चों को एक अलग तरीके से सम्मान देते हैं, जिससे बच्चे निडर और आत्मविश्वासी बनते हैं। रानी और आदिरा का रिश्ता यह बताता है कि आधुनिक पेरेंटिंग में अथॉरिटी से ज्यादा बॉन्डिंग पर जोर दिया जाता है।

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Images: Freepik/pinterest

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