Tue Sep 22, 2026 | Updated 06:24 PM IST

Positive Discipline: बिना चिल्लाए और मारे कैसे सुधारें बच्चों की आदतें? एक्सपर्ट से जानें पॉजिटिव डिसिप्लिन के 4 तरीके

बता दें, मारने या चिल्लाने से बच्चे थोड़े समय के लिए डर जरूर जाते हैं, लेकिन लंबे समय में वे विद्रोही बन जाते हैं या उनका आत्मविश्वास कम हो जाता है। ऐसे में ये जानें कि पॉजिटिव डिसिप्लिन बच्चों के लिए क्यों जरूरी है। जानते हैं इस लेख के माध्यम से...
Updated:- 2026-01-16, 19:32 IST
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अक्सर माता-पिता को लगता है कि बच्चों को सुधारने के लिए उन पर चिल्लाना या हाथ उठाना ही एक तरीका है, लेकिन इससे जुड़े कुछ शोध हुए हैं जो बताते हैं कि मारने या चिल्लाने से बच्चे थोड़े समय के लिए तो डर जाते हैं, पर लंबे समय में वे विद्रोही बन जाते हैं या उनका आत्मविश्वास कम हो जाता है। साथ ही आपके साथ रिश्ता कमजोर होने लगता है। ऐसे समय में काम आता है पॉजिटिव डिसिप्लिन। यह पेरेंट्स को सजा देने के बजाय सिखाने और सुधारने पर जोर देता है। इसका मकसद बच्चे को यह समझाना है कि उनका व्यवहार क्यों गलत था और वे इसे कैसे सुधार सकते हैं। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि पॉजिटिव डिसिप्लिन बच्चों के लिए क्यों जरूरी है।  जानते हैं इस लेख के माध्यम से...

पॉजिटिव डिसिप्लिन बच्चों के लिए क्यों जरूरी है?

जब आपका बच्चा कोई गलती करे, तो उसे मारने की बजाय उस गलती के रिजल्ट को बच्चे को खुद फेस करने दें। जैसे - यदि आपका बच्चा खाना फेंक रहा है, तो उसे चिल्लाएं नहीं बल्कि शांति रहें और कहें, अगर तुम खाना फेंकोगे, तो खाना नहीं बचेगा और तुम्हें भूखा रहना पड़ेगा। जब उसे खुद भूख लगेगी, तो वह अगली बार खाना नहीं फेंकेगा।

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बच्चे अक्सर तब बुरा व्यवहार करते हैं जब वे अपनी फीलिंग्स आपके सामने पेश नहीं कर पाते हैं। यदि आपका बच्चा खिलौना न मिलने पर रोता है, तो उसे चुप नहीं कराएं बल्कि कहें कहें, मैं समझ सकता हूं कि तुम दुखी हो क्योंकि तुम्हें वह खिलौना चाहिए था, लेकिन हम इसे आज नहीं खरीदेंगे। जब बच्चों को लगता है कि आप उन्हे सुन रहे हैं, तो उनका गुस्सा जल्दी शांत हो जाता है।

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बच्चे अपनी Autonomy बेहद पसंद करते हैं। उन्हें सीधे आदेश देने के बजाय उन्हें आप दो ऑप्शंस दें जैसे- तुम्हें लाल वाले जूते पहनने हैं या नीले वाले? इससे उन्हें महसूस होता है कि स्थिति उनके नियंत्रण में है और वे खुशी-खुशी आपकी बात मान लेते हैं।

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हम अक्सर बच्चों की गलतियों पर उन्हें बिना किसी देरी के तुरंत टोक देते हैं, लेकिन जब वे कुछ अच्छा करते हैं, तो उसे नजरअंदाज कर देते हैं और तारीफ करना भूल जाते हैं। यदि बच्चा अपना खिलौना खुद समेट कर रखता है, तो उसकी तुरंत तारीफ करें। आज तुमने अपना रूम अच्छे से साफ किया, मुझे खुशी है। यह शब्द उन्हें आगे भी अच्छा व्यवहार करने के लिए प्रेरित करती है।

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Images: Freepik/pinterest

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