Tue Sep 22, 2026 | Updated 08:43 PM IST

Pitru Paksha 2026 में निभाई जाती हैं ये 7 परंपराएं, क्या आप जानती हैं इनका असली मतलब?

Pitru Paksha Ki Paramparayen 2026: पितृपक्ष शुरू होने वाला है और अगर लोगों के मन इससे जुड़ी परंपराओं को लेकर सवाल है तो आइए जानते हैं कि क्या हैं वो और उनका मतलब क्या होता है?
Updated:- 2026-09-22, 19:13 IST
Pitru Paksha 2026

Pitru Paksha Ki Paramparayen 2026: पितृपक्ष का हिंदू धर्म में काफी महत्व है। ये दिन पूर्वजों को याद करने के लिए होते हैं और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का जरूरी समय माना जाता है। साल 2026 में पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू होगा, जो 10 अक्टूबर 2026 को समाप्त होगा। 

पितृपक्ष की 7 परंपराएं

ज्योतिषाचार्य सिद्धार्थ एस कुमार के अनुसार, मुख्य श्राद्ध की शुरुआत 27 सितंबर से होगी। इस दौरान पूर्वजों की शांति के लिए कुछ परंपराएं निभाई जाती हैं। आइए जानते हैं उन 7 परंपराओं के बारे में।

1. श्राद्ध और पिंडदान

श्राद्ध और पिंडदान का मतलब होता है कि जिस दिन आपके पूर्वज की मृत्यु हुई है उस तिथि के मुताबिक उनका श्राद्ध किया जाता है। साथ ही पिंड दान की बात करें तो वो चावल,जौ और काले तिल से करने की परंपरा है।

2. तर्पण

तर्पण का मतलब होता है जल अर्पित करना। दक्षिण दिशा की ओर अपना मुंह करके तांबे या अन्य बर्तन में जल, कुशा और काले तिल मिलाकर पितरों को जल अर्पित किया जाता है.

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Image Credit- (Pinterest-AjuDimple)

3. सात्विक भोजन और तामसिक चीजों से दूरी

इन 15-16 दिनों तक सात्विक भोजन का सेवन किया जाता है। यानी पूरी तरह से लहसुन-प्याज और मांस, मदिरा का सेवन करना मना होता है.

4. पंचबली भोग

पंचबली भोग का मतलब होता है कि जब हम खाना बनाते हैं तो शुरू में पहले खाना गाय, कुत्ते, कौवे, चींटी और देवताओं के लिए निकाला जाता है। ऐसा कहा जाता है इन जीवों को खाना खिलाने से पितरों तक भोजन पहुंच जाता है और वे तृप्त होते हैं।

5. ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन

जिस दिन आपके पितरों का श्राद्ध हो उस दिन ब्राह्मणों, सगे-संबंधियों या भूखों को खाना खिलाया जाता है। साथ ही अगर आपके घर कोई बिना बुलाए आ जाए तो कोई ऐसा काम गलती से भी नहीं करना चाहिए जिससे वो निराश हों।

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6. दान-पुण्य

अपने पितरों की मुक्ति के लिए इन दिनों अन्न, वस्त्र, और जल का दान किया जाता है। कहा जाता है कि ऐसा करने से उन्हें शांति मिलती है।

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Image Credit- (Pinterest/Leelavathi Govindaraj)

7. शांति और संयमपूर्ण माहौल

पितृपक्ष के दिनों में अपने घर के माहौल को अच्छा रखना होता है। साथ ही, घर में क्लेश या किसी भी तरह का विवाद न हो, इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए।

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Main Image Credit- Pinterest-AjuDimple

 

FAQ
Pitru Paksha 2026 कब से शुरू हो रहा है और कब खत्म होगा?
साल 2026 में पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू हो रहा है और 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगा। ज्योतिषाचार्य सिद्धार्थ एस कुमार के अनुसार मुख्य श्राद्ध की शुरुआत 27 सितंबर से होगी।
पितृपक्ष के दौरान क्या नहीं करना चाहिए?
पितृपक्ष के 15-16 दिनों तक सात्विक भोजन ही करना चाहिए। लहसुन-प्याज, मांस-मदिरा का सेवन पूरी तरह वर्जित माना जाता है। साथ ही इस दौरान घर में क्लेश, लड़ाई-झगड़ा नहीं करना चाहिए ।
पितृपक्ष में पंचबली भोग क्या होता है?
पंचबली भोग हिंदू धर्म में श्राद्ध या पितृ पक्ष के दौरान पांच विशेष जीवों और शक्तियों (गाय, कुत्ता, कौआ, देवता और चींटी) को भोजन का अंश अर्पित करने की एक आवश्यक परंपरा है।
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