1000 बार नाम जप और फिर मिलेगा गिफ्ट, बच्चों को भगवान से जोड़ने का पेरेंट्स अपना रहे हैं नए तरीके

आज के डिजिटल युग में भारतीय पेरेंट्स बच्चों को अध्यात्म से जोड़ने के लिए एक अनोखा रिवॉर्ड सिस्टम अपना रहे हैं। इसमें बच्चे 1000 बार 'राधा-राधा' या इष्ट देव का नाम जपकर उपहार पाते हैं। डॉ. चांदनी तुगनैत जैसे विशेषज्ञों द्वारा समर्थित यह तरीका बच्चों को स्क्रीन से दूर रखता है, उनमें धैर्य विकसित करता है और उन्हें ध्यान से परिचित कराता है, जो आधुनिक पेरेंटिंग में पारंपरिक मूल्यों को जोड़ता है।
Updated:- 2026-04-06, 13:31 IST
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आज के डिजिटल युग में जहां बच्चों का ज्यादातर समय मोबाइल गेम्स और सोशल मीडिया पर बीतता है, वहीं भारतीय पेरेंट्स उन्हें अपनी जड़ों और अध्यात्म से जोड़ने के लिए रिवॉर्ड सिस्टम का एक अनोखा और दिलचस्प तरीका अपना रहे हैं। बच्चों को 1000 बार 'राधा-राधा' या अपने इष्ट देव का नाम जपने के बदले उनकी मनपसंद चीज उपहार में देना एक नई लहर बन गई है। यहां इस मॉडर्न पेरेंटिंग और आध्यात्मिक जुड़ाव के बारे में समझाया गया है। ऐसे में इनके बारे में पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि आजकल पेरेंट्स कैसे बच्चों को भगवान से जोड़ रहे हैं। इसके लिए हमने कोच और हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट, साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। पढ़ते हैं आगे...

जब मिलेंगे गिफ्ट्स

आजकल के बच्चे फैक्ट्स और फायदों पर ज्यादा यकीन करते हैं। ऐसे में माता-पिता ने भी देखा है कि केवल उपदेश देने से बच्चे अध्यात्म की ओर आकर्षित नहीं होते। 

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इसलिए, उन्होंने 'नाम जप' को एक गोल की तरह पेश करना शुरू किया है। जब बच्चा 1000 बार भगवान का नाम जपता है और उसे बदले में उसकी पसंदीदा चॉकलेट, खिलौना या एक्स्ट्रा गेमिंग टाइम मिलता है, तो वह इसे एक उपलब्धि के रूप में देखता है। इससे न केवल उसका एंटरटेनमेंट होता है, बल्कि अनजाने में ही सही, उसकी जुबां पर पवित्र नाम का वास होने लगता है।

मेडिटेशन भी है जरूरी

1000 बार नाम जपना केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं है, बल्कि यह एक तरह का 'मेडिटेशन' भी है। जब बच्चा एक ही नाम को बार-बार दोहराता है, तो उसका मन शांत होने लगता है। 90 के दशक में जैसे हमारे बड़े हमें श्लोक याद करने पर शाबाशी देते थे, वैसा ही यह तरीका आज के बच्चों की एकाग्रता बढ़ाने में मदद कर रहा है। इससे बच्चों में Patience विकसित होता है, क्योंकि 1000 बार जाप करने के लिए उन्हें एक जगह टिककर बैठना पड़ता है, जो आज के 'इंस्टेंट' युग में एक बड़ी सीख है।

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 गैजेट्स से दूरी और संस्कारों से नजदीकी

स्मार्टफोन की लत आज हर घर की परेशानी है। ऐसे में यह भक्ति रिवॉर्ड बच्चों को स्क्रीन से दूर रखने का एक बेहतरीन जरिया बन गया है। जब बच्चा जाप में बिजी होता है, तो उसका दिमाग डिजिटल दुनिया की आपाधापी से दूर रहता है।

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धीरे-धीरे यह अभ्यास उसे अपनी संस्कृति, त्योहारों और देवी-देवताओं के प्रति जिज्ञासु बनाता है।

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Images: Freepik/shutterstock

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