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दिनभर किताबों में डूबा रहता है बच्चा? इन 5 मजेदार तरीकों से उसे ले जाएं खेल के मैदान तक

यह लेख उन माता-पिता के लिए है जो बच्चों के लगातार पढ़ाई या स्क्रीन पर रहने से चिंतित हैं। यह शारीरिक गतिविधियों के महत्व पर जोर देता है। इसमें 5 मजेदार तरीके बताए गए हैं जिनसे आप किताबी बच्चों को खेल के मैदान तक ले जा सकते हैं। 
Updated:- 2026-04-03, 16:00 IST
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आज के डिजिटल और कॉम्पिटिशन युग में बच्चों का बिहेवियर तेजी से बदल रहा है। कई माता-पिता इस बात से परेशान रहते हैं कि उनका बच्चा खेल-कूद के बजाय दिनभर किताबों या स्क्रीन में खोया रहता है। पढ़ाई जरूरी है, लेकिन शारीरिक गतिविधियों के बिना बच्चे का सही विकास अधूरा है। ऐसे में अगर आपका बच्चा भी पूरे दिन किताबों में डूबा रहता है तो अब परेशान होने की जरूरत नहीं है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि अगर दिनभर किताबों में डूबा रहता है बच्चा तो कैसे 5 मजेदार तरीकों से उसे खेल के मैदान तक लेकर जाएं। इसके लिए हमने कोच और हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट, साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। पढ़ते हैं आगे...

बच्चे हर वक्त किताबों में क्यों डूबे रहते हैं?

आजकल स्कूलों और दोस्तों के बीच अच्छे नंबरों को ही सफलता का एकमात्र पैमाना मान लिया गया है। इससे बच्चे तनाव में रहते हैं और खेल को समय की बर्बादी समझने लगते हैं।

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किताबी कीड़ा बन चुके बच्चे को खेल के मैदान तक ले जाने के 5 तरीके

  • लगातार घंटों तक बैठकर पढ़ने से दिमाग थक जाता है। बच्चे को समझाएं कि हर एक घंटे की पढ़ाई के बाद 15 मिनट का फिजिकल ब्रेक जरूरी है। इस दौरान उसे बालकनी में टहलने, रस्सी कूदने या सीढ़ियां चढ़ने-उतरने के लिए प्रोत्साहित करें। इससे उसका मूड फ्रेश होगा और एकाग्रता बढ़ेगी।
  • हर बच्चा क्रिकेट या फुटबॉल पसंद करे, यह जरूरी नहीं है। ऐसे में आप अपने बच्चे की पसंद पहचानें। उसे बैडमिंटन, स्केटिंग, तैराकी या मार्शल आर्ट्स की क्लासेज में ले जाएं। जब बच्चा अपनी पसंद का काम करता है, तो उसे बाहर जाने के लिए कहना नहीं पड़ता।

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  •  बच्चे अक्सर अपने माता-पिता की नकल करते हैं। यदि आप खुद फोन पर लगे रहेंगे, तो बच्चा भी बाहर नहीं जाएगा। रविवार या शाम के समय पूरे परिवार के साथ पार्क जाएं। वहां पकड़म-पकड़ाई, छुपम-छुपाई या साइकिलिंग जैसे खेल खेलें। जब वह आपको खेलते देखेगा, तो उसका उत्साह दोगुना हो जाएगा।

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  • बच्चे को अकेलापन महसूस न हो, इसके लिए उसके क्लास के दोस्तों या पड़ोस के बच्चों के साथ मिलें। ग्रुप में खेलने से बच्चों में सोशल गुण एक्टिव होते हैं और वे टीम वर्क सीखते हैं।

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Images: Freepik/shutterstock

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