Sun Oct 11, 2026 | Updated 11:42 AM IST

Maa Durga Aarti Meaning: 'जय अम्‍बे गौरी, मैया जय श्‍यामा गौरी', क्‍या आप जानती हैं मां दुर्गा के आरती का मतलब?

नवरात्रि‍ क माैके पर हम सभी मां दुर्गा की आरती करते हैं, ज‍िसके बोल हैं जय अम्‍बे गौरी, मैया जय श्‍यामा गौरी, लेक‍िन इसका मतलब शायद ही कोई जानता होगा। हम आपको आसान ह‍िंदी में इसका मतलब बता रहे हैं।
Updated:- 2026-10-11, 10:21 IST
maa durga aarti meaning

शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा की जाती है। इस दौरान भक्त सुबह-शाम आरती करते हैं। घर हो या मंदिर, इन नौ दिनों में 'जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी' की गूंज सुनाई देती है। यह आरती हम सभी गाते तो हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस आरती में मां के किस रूप का जिक्र किया गया है और इसमें उनके बारे में क्या बताया गया है?

दरअसल, इस आरती में मां दुर्गा की सुंदरता, उनकी शक्तियों, उनके अलग-अलग रूपों और भक्तों के जीवन में उनके महत्व का जिक्र है। शारदीय नवरात्रि 2026 के मौके पर हम आपको बता रहे हैं मां दुर्गा की इस प्रसिद्ध आरती का पूरा पाठ और इसका आसान मतलब। ताकि अगली बार जब आप आरती गाएं, तो उसके भाव को भी अच्छी तरह समझ सकें। आइए जानते हैं-

maa durga aarti

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मां दुर्गा की आरती 'जय अम्बे गौरी' का सबसे आसान हिंदी मतलब

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥

मतलब: आरती के सबसे पहले लाइन का मतलब है कि हे मां अम्बे, हे मां श्यामा, आपकी जय हो। भगवान विष्णु (हरि), ब्रह्मा जी और भगवान शिव प्रतिदिन आपका ही ध्यान करते हैं।

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्जवल से दोऊ नैना, चंद्रबदन नीको॥

मतलब: इसका मतलब है कि आपकी मांग में सिंदूर सजा हुआ है और माथे पर कस्तूरी (मृगमद) का सुंदर टीका लगा है। आपके दोनों नेत्र बहुत ही चमक रहे हैं। आपका मुख चंद्रमा के जैसा बहुत सुंदर और प्यारा लगता है।

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गलमाला, कंठन पर साजै॥

मतलब: इसका मतलब है कि आपका शरीर सोने (कनक) की तरह चमकता हुआ है और आप लाल रंग के वस्त्र (रक्ताम्बर) धारण किए हुए हैं। आपके गले में लाल फूलों की सुंदर माला सुशोभित हो रही है।

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥

मतलब: इस लाइन का मतलब है कि शेर (केहरि) आपका वाहन है और आपके हाथों में तलवार (खड्ग) और खप्पर है। देव, मनुष्य और मुनिजन आपकी सेवा करते हैं और आप सभी के दुखों को हरने वाली हैं।

कानन कुंडल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योति॥

मतलब: आपके कानों में कुंडल चमक रहे हैं और नाक पर सुंदर मोती सजा हुआ है। आपके तेज से करोड़ों चंद्रमाओं और सूर्यों (दिवाकर) की ज्योति एक साथ चमकती हुई प्रतीत होती है।

चंड-मुंड संहारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥

मतलब: इसका मतलब है कि आपने ही चंड-मुंड जैसे राक्षसों का वध किया और महिषासुर का विनाश किया। आप धूम्रलोचन जैसे असुर का अंत करने वाली हैं और आपके नेत्र हर समय दिव्य तेज और कृपा से भरे रहते हैं।

ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥

मतलब: इस लाइन में बताया गया है कि आप ही ब्रह्मा की शक्ति (ब्रह्माणी), शिव की शक्ति (रुद्राणी) और विष्णु की शक्ति लक्ष्मी (कमला रानी) हैं। वेद और पुराण (आगम-निगम) भी आपकी महिमा का गुणगान करते हैं, आप भगवान शिव की रानी हैं।

चौसठ योगिनी गावत, नृत्य करै भैरू।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजै डमरू॥

मतलब: चौंसठ योगिनियां आपका यश गाती हैं और भैरव प्रसन्न होकर नृत्य करते हैं। इसमें बताया गया है कि आपकी आरती और उत्सव में ताल, मृदंग और डमरू जैसे सुंदर वाद्ययंत्र बज रहे हैं।

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भवानी।
भक्तन की दुख हरता, सुख संपत्ति कानी॥

मतलब: इस लाइन को गाकर हम बता रहे होते हैं कि आप ही इस पूरे संसार की माता हैं और आप ही मां भवानी हैं। आप अपने भक्तों के सभी दुखों को दूर करती हैं और उन्हें सुख, समृद्धि और संपत्ति प्रदान करती हैं।

भुजा चार अति शोभित, खड्ग खप्परधारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर-नारी॥

मतलब: इसका मतलब है कि आपकी चार भुजाएं बहुत ही सुंदर लगती हैं, जिनमें आपने खड्ग और खप्पर धारण किया है। जो भी पुरुष या स्त्री आपकी सच्चे मन से सेवा करता है, उसे मनचाहा फल प्राप्त होता है।

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्री मालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥

मतलब: इसका मतलब है कि सोने (कंचन) की थाली में अगरबत्ती और कपूर की बाती जल रही है। आपकी इस आरती में करोड़ों रत्नों जैसी दिव्य ज्योति जगमगा रही है।

श्री अम्बे जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥

मतलब: आरती की इस आखिरी लाइन में बताया गया है कि स्वामी शिवानंद कहते हैं कि जो भी व्यक्ति मां अम्बे की इस पावन आरती को भक्तिभाव से गाता है, उसे जीवन में सभी तरह के सुख, समृद्धि और संपत्ति की प्राप्ति होती है।

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जय अम्बे गौरी आरती का क्या मतलब है?

मां दुर्गा की आरती में उनके पूरे रूप और शक्तियों के बारे में बताया गया है। आसान शब्दों में समझें तो इसमें मां को सुंदर रूप वाली, बुरी शक्तियों का नाश करने वाली और अपने भक्तों का दुख दूर करने वाली देवी का जिक्र है। आरती में उनके माथे के टीके, आंखों, कपड़ों, गहनों और शेर की सवारी का भी जिक्र है। इसके साथ ही आरती में बताया गया है कि मां दुर्गा की पूजा सिर्फ आम भक्त ही नहीं बल्कि भगवान ब्रह्मा, विष्णु और शिव भी करते हैं। मां को ऐसी शक्ति के रूप में दिखाया गया है, जो बुराई के खिलाफ खड़ी होती हैं और अपने भक्तों को मुश्किल समय में हिम्मत देती हैं।

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इसके अलावा आरती में चंड-मुंड और महिषासुर जैसे राक्षसों के वध का भी जिक्र किया गया है। यह मां दुर्गा की ऐसी शक्ति को दिखाता है, जिसके आगे बुरी ताकतें टिक नहीं पाती हैं। क्योंकि मां दुर्गा ने ही बुराई पर अच्छाई की जीत दिलाने के लिए इनका वध किया था। कुल मिलाकर, इस आरती में मां के सुंदर रूप के साथ-साथ उनकी ताकत, दया और रक्षा करने वाली छवि को भी दिखाया गया है।

नवरात्रि में मां दुर्गा की आरती करने का क्या महत्व है?

नवरात्रि में आरती करना मां दुर्गा के प्रति अपनी श्रद्धा जताने का एक तरीका है। कई घरों में सुबह और शाम पूजा के बाद परिवार के सभी लोग साथ मिलकर आरती गाते हैं। मंदिरों में भी भक्त मां के सामने दीपक जलाकर उनका आशीर्वाद मांगते हैं।

मां दुर्गा की आरती करते समय इन बातों का रखें ध्यान

अगर आप मां दुर्गा की आरती करने जा रही हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

  • आरती से पहले पूजा की जगह साफ कर लें और दीपक के लिए सही जगह चुनें।
  • आरती गाते समय उसके शब्दों को ध्यान से बोलें। अगर कोई शब्द समझ नहीं आता तो उसका मतलब जानने की कोशिश करें।
  • घर में बच्चों के साथ आरती गा रही हैं, तो उन्हें भी मां दुर्गा की कथा और उनके अलग-अलग रूपों के बारे में बताएं।
  • दीपक या कपूर जलाते समय आसपास कपड़े, पर्दे और आग पकड़ने वाली चीजें न रखें।

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FAQ
आरती किस हाथ से करें?
मां दुर्गा की आरती हमेशा दाएं (Right) हाथ से करनी चाहिए। आरती के थाल को माता के चरणों से शुरू करके गोलाकार में घुमाना शुभ माना जाता है।
आरती में कपूर क्यों जलाएं?
पूजा में कपूर जलाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और वातावरण शुद्ध होता है। इससे वातावरण में सकारात्मकता और शांति का संचार होता है।
आरती लेते समय क्या करें?
आरती पूरी होने के बाद दोनों हाथों से उसकी लौ की गरमाहट लें और माथे से लगाएं। इससे मां दुर्गा का दिव्य आशीर्वाद और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
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