बारिश का मौसम आते ही कई लोग यह सोचकर सनस्क्रीन लगाना छोड़ देते हैं कि धूप तो कम निकल रही है। लेकिन यह एक बड़ी गलती हो सकती है। बादलों के पीछे छिपी यूवी किरणें भी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए मानसून में भी सनस्क्रीन लगाना उतना ही जरूरी है, जितना गर्मियों में। आपको बता दें, उमस भरे मौसम में हमेशा हल्का, नॉन-स्टिकी और वॉटर-रेज़िस्टेंट Sunscreens चुनना सही माना जाता है। जेल-बेस्ड टेक्सचर वाले सनस्क्रीन त्वचा पर भारी महसूस नहीं होते और पसीने के बावजूद बेहतर सुरक्षा देते हैं। यहां Deconstruct, प्लम, The Derma Co, न्यूट्रोजेना और RE' EQUIL ब्रांड के सनस्क्रीन दिए गए हैं जो सूरज की हानिकारक किरणों से त्वचा की रक्षा करने में मदद करते हैं और साथ ही, लंबे समय तक चेहरे पर टिके रहते हैं।
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क्या बारिश के मौसम में भी सनस्क्रीन लगाना जरूरी है?
आपको बता दें, बारिश के दिनों में बादलों के बावजूद यूवी किरणें त्वचा तक पहुंच सकती हैं, इसलिए मानसून में भी सनस्क्रीन लगाना जरूरी माना जाता है, जो हानिकारक किरणों से त्वचा की रक्षा करता है।
मानसून में किस तरह का सनस्क्रीन अच्छा रहता है?
उमस और पसीने वाले मौसम में जेल-आधारित, मैट फ़िनिश और वॉटर-रेसिस्टेंट सनस्क्रीन सबसे उपयुक्त होते हैं क्योंकि वे चिपचिपे नहीं होते है और हल्का व नॉन-स्टिकी होने की वजह से त्वचा पर चिपचिपाहट नहीं छोड़ते हैं।
क्या वॉटरप्रूफ सनस्क्रीन पसीने या बारिश में हट जाता है?
बता दें, वॉटरप्रूफ सनस्क्रीन बेहतर सुरक्षा प्रदान करते हैं, लेकिन अधिकतम प्रभावशीलता के लिए उन्हें हर 2-3 घंटे में दोबारा लगाना चाहिए, खासकर अगर आप भीग गए हों तो। आप अपने चेहरे को सही से पोंछ कर दुबारा से इसे लगा सकत हैं।
ऑयली त्वचा वाले लोग बारिश में कौन सा सनस्क्रीन चुन सकते हैं?
जिनकी त्वचा ऑइली है उनको बरसात के मौसम में जेल-बेस्ड, वाटर-बेस्ड या मैट फिनिश वाला सनस्क्रीन लगाना चाहिए। आप ध्यान रखें कि आपका क्रीम नॉन-कॉमेडोजेनिक हो ताकि यह रोमछिद्र को बंद न करे ताकि चिपचिपाहट और मुंहासों की समस्या न हो।