भारतीय रेलवे में लंबी दूरी का सफर करना हो या दो बड़े शहरों के बीच कम समय में टाइम पर पहुंचना हो, सही ट्रेन का चुनाव यात्रा को काफी आसान बना देता है। वंदे भारत और शताब्दी एक्सप्रेस ऐसी ही दो प्रीमियम ट्रेनें हैं, जिन्हें आरामदायक और तेज सफर के लिए जाना जाता है। दोनों में एसी कोच, बैठने की बेहतर व्यवस्था और यात्रा के दौरान खाने-पीने की सुविधा मिलती है। जब बात मॉडर्न फीचर्स, ट्रेन की स्पीड, टिकट के रेट और यात्रियों के आराम की आती है तो दोनों में कई अंतर सामने आते हैं। ऐसे में सवाल है कि आपके सफर के लिए कौन सी ट्रेन बेहतर रहेगी?

वंदे भारत या शताब्दी एक्सप्रेस, कौन सी ट्रेन है बेहतर?

ट्रेन से सफर करते समय ज्यादातर लोग तीन चीजों पर ध्यान देते हैं, कम समय में डेस्टिनेशन तक पहुंचना, बढ़िया सीट और टिकट की कीमत। भारतीय रेलवे की वंदे भारत और शताब्दी एक्सप्रेस इन जैसी सुविधाओं के लिए जानी जाती है। हालांकि, दोनों ट्रेनों का डिजाइन, टेक्नोलॉजी, स्पीड और कुछ सुविधाएं एक-दूसरे से एकदम अलग है। आइए IRCTC से जानते हैं कि इन दोनों ट्रेनों में क्या अंतर है और टिकट बुक करने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

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वंदे भारत और शताब्दी एक्सप्रेस की रफ्तार में कितना अंतर है?

वंदे भारत एक्सप्रेस और शताब्दी एक्सप्रेस के बीच सबसे बड़ा अंतर इनकी स्पीड और टेक्नोलॉजी का है। वंदे भारत को मॉडर्न सेमी हाई स्पीड ट्रेन के तौर पर तैयार किया गया है। इसकी स्पीड 160 किमी. प्रति घंटा है। इसकी एक खासियत यह भी है कि यह कम समय में रफ्तार पकड़ सकती है।

वहीं, शताब्दी एक्सप्रेस की ज्यादा रफ्तार संबंधित रेलखंडों पर 130 किमी. प्रति घंटे तक है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर रूट पर वंदे भारत ही सबसे पहले पहुंचती है। यात्रा का समय ट्रैक की स्थिति, रास्ते में पड़ने वाले स्टेशनों और ट्रैफिक पर भी निर्भर करता है।

जैसे, नई दिल्ली से चंडीगढ़ के बीच करीब 266 किमी. की दूरी वंदे भारत लगभग 2 घंटे 48 मिनट में तय करती है, जबकि शताब्दी को इसी सफर में करीब 3 घंटे 19 मिनट लगते हैं। हालांकि, अलग-अलग ट्रेनों के शेड्यूल में बदलाव संभव है।

दोनों ट्रेनों में बैठने की व्यवस्था कैसी है?

वंदे भारत और शताब्दी एक्सप्रेस दोनों मुख्य रूप से दिन के सफर के लिए बनाई गई हैं। इनमें यात्रियों को एसी चेयर (CC) और एग्जीक्यूटिव चेयर कार (EC) का आप्शन मिलता है। चेयर कार उन यात्रियों के लिए है, जो नॉर्मल एसी सीटिंग में सफर करना चाहते हैं। वहीं, एग्जीक्यूटिव चेयर कार में बैठने की व्यवस्था ज्यादा प्रीमियम होती है।

वंदे भारत में आधुनिक डिजाइन वाली रिक्लाइनिंग सीटें, चार्जिंग पॉइंट और अलग-अलग रीडिंग लाइट जैसी सुविधाएं मिलती हैं। कुछ कोचों में एग्जीक्यूटिव क्लास की सीटों को घुमाने की सुविधा भी होती है। इससे यात्री सफर के दौरान बाहर के नजारे बेहतर तरीके से देख सकते हैं।

शताब्दी में भी एसी सीटिंग की सुविधा मिलती है। हालांकि, कोच की बनावट ट्रेन के हिसाब से अलग हो सकती हैं। इसलिए टिकट बुक करते समय संबंधित ट्रेन की जानकारी देखना बेहतर रहता है।

मॉडर्न फीचर्स में कौन आगे है?

अगर आप ट्रेन में नई तकनीक और आधुनिक सुविधाओं को देखेंगे तो वंदे भारत आपको ज्यादा पसंद आ सकती है। इसे यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। दूसरी ओर, शताब्दी एक्सप्रेस भी समय के साथ मॉर्डन हुई है। इसमें एलएचबी कोचों का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, वंदे भारत की नई डिजाइन और तकनीक उसे अलग पहचान देती है।

वंदे भारत और शताब्दी में किसका टिकट सस्ता है?

ट्रेन चुनते समय किराया भी एक अहम पहलू होता है। वंदे भारत और शताब्दी के टिकट की कीमत रूट, यात्रा की तारीख और क्लास के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।

नई दिल्ली से चंडीगढ़ के उदाहरण को देखें तो किराया जानकारी के अनुसार, वंदे भारत की चेयर कार का शुरुआती किराया करीब 714 रुपये और शताब्दी की चेयर कार का शुरुआती किराया करीब 715 रुपये है। यानी इस उदाहरण में दोनों के किराये में बहुत कम अंतर है। एग्जीक्यूटिव क्लास में तस्वीर बदल जाती है। इसी रूट पर वंदे भारत का शुरुआती किराया करीब 1,411 रुपये, जबकि शताब्दी का करीब 1,120 रुपये बताया गया है।

इससे स्पष्ट है कि केवल ट्रेन के नाम के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि कौन सी ज्यादा महंगी है। सही तुलना के लिए अपने रूट और यात्रा की तारीख के अनुसार दोनों ट्रेनों का किराया देखना जरूरी है। टिकट की कीमतों में बदलाव भी हो सकता है।

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खाने-पीने की सुविधा में कौन बेहतर है?

वंदे भारत और शताब्दी एक्सप्रेस दोनों में यात्रा के समय के हिसाब से चाय, नाश्ता, दोपहर या रात का खाना दिया जाता है। हालांकि, खाना मिलना टिकट पर निर्भर करता है। इसलिए, खाने के मामले में किसी एक ट्रेन को बेहतर कहना सही नहीं होगा। यात्रा के टाइ और मेन्यू के आधार पर दोनों की तुलना की जा सकती है।

ट्रेन टिकट बुक करने से पहले किन बातों का ध्यान रखें

  • सफर की तारीख, ट्रेन का समय और जहां से ट्रेन पकड़नी है उस बोर्डिंग स्टेशन की सही जांच अवश्य करें।
  • टिकट बुक करने से पहले कैंसिलेशन और रिफंड के नियमों को जरूर देख लें ताकि यात्रा रद्द होने पर नुकसान न हो।

वंदे भारत मॉडर्न टेक्नोलॉजी, तेज स्पीड और नए डिजाइन के मामले में आगे है। वहीं, शताब्दी एक्सप्रेस अपनी सेवा और कई रूट पर सुविधाजनक यात्रा के कारण आज भी जरूरी है। दोनों में से किसी एक को हर बेहतर नहीं कहा जा सकता है। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।