करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए सालभर के सबसे खास और बड़े पर्वों में से एक माना जाता है। इस दिन शादीशुदा महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं। व्रत की इस कठिन तपस्या की शुरुआत होती है ब्रह्म मुहूर्त में खाई जाने वाली 'सरगी' से। जी हां, सारगी सूरज निकलने से पहले सास द्वारा अपनी बहू को दी जाती है। सरगी में फेनी, मिठाइयां, ताजे फल और ड्राई फ्रूट्स होते हैं, जो इस दिन के उत्सव को और खास बनाते हैं।

करवा चौथ पर सरगी देने का चलन

क्या आपने कभी सोचा है कि करवा चौथ के खास मौके पर फेनिया और ड्राई फ्रूट्स से सजी ये सारगी देने का चलन कहां से आया? आज इस लेख में हम आपको इस पारंपरिक रस्म के पीछे का इतिहास और वैज्ञानिक कारण बताएंगे। आइए जानते हैं इसके बारे में।

क्या है सरगी और इसे देने की परंपरा?

सरगी खासकर आशीर्वाद या उपहार होता है, जो हर सास अपनी बहू को अखंड सुहाग की कामना के साथ देती है। यह परंपरा सदियों पुरानी है। करवा चौथ के दिन सुबह-सुबह सास खुद उठकर अपनी बहू के लिए प्यार से यह खास थाली तैयार करती है। यह इसीलिए होता है, ताकि बहू बिना किसी परेशानी के पूरे दिन का कठिन निर्जला व्रत रख सके। 

भारत सरकार का डिजिटल सांस्कृतिक मंच और सहपीडिया आर्काइव के अनुसार सरगी की यह खास परंपरा पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे इलाकों में ज्यादा निभाई जाती है। अब धीरे धीरे यह परंपरा पूरे देश में पसंद की जा रही है। सरगी केवल खाने-पीने की चीजें नहीं है, बल्कि यह बड़ों के आशीर्वाद के रूप में बहू को दिया जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव के लिए व्रत रखा था, इस व्रत से पहले पार्वती मां की माता मैना देवी ने उन्हें सरगी दी थी। तभी से यह परंपरा चली आ रही है। वहीं बात करें, वैज्ञानिक कारण की, तो सरगी की थाली में जो चीजें रखी जाती है, वो प्री-फास्टिंग फ्यूल का काम करती है। इन चीजों को खाने के बाद शरीर पूरा दिन एक्टिव रहता है और थकान कम होती है। 

सरगी में खासतौर पर 'फेनिया' क्यों खाई जाती है?

करवा चौथ की सरगी में सास अपनी बहु के लिए थाली में फेनी जरूर रखती है। फेनी मैदे या सूखी सेवइयों से बनी एक खास पारंपरिक मिठाई होती है, जिसे गर्म या ठंडे दूध में भिगोकर खाया जाता है। दूध और फेनी दोनों ही शरीर को कार्बोहाइड्रेट और एनर्जी देने में मदद करता है। करवा चौथ पर बहुएं पूरा दिन बिना पानी के रहती हैं, ऐसे में दूध से बनी फेनी खाने से पेट लंबे समय तक भरा हुआ लगता है।

सरगी में ड्राई फ्रूट्स और मिठाइयों का महत्व क्या है?

सरगी की थाली में फेनी के अलावा बादाम, काजू, किशमिश और मखाने जैसे ड्राई फ्रूट्स भी रखें जाते हैं। इसे स्वस्थ और वैज्ञानिक दोनों कारणों से जोड़ा जाता है। बता दें, कि ड्राई फ्रूट्स में गुड फैट्स, प्रोटीन और विटामिंस होते हैं। ऐसे में सुबह-सुबह ड्राई फ्रूट्स खाने से शरीर को 12 से 14 घंटे तक ताकत मिलती है।इससे चक्कर, कमजोरी या सिरदर्द से भी राहत मिल सकती है।

सरगी से जुड़ी कुछ जरूरी बातें

सरगी खाते समय कुछ खास नियम भी बताएं गए हैं, जैसे -

  • सरगी हमेशा तारों की छांव में यानी सूर्योदय होने से कुछ घंटे पहले खाई जाती है।
  • सूरज निकल जाने के बाद सरगी खाना या पानी पीना भी वर्जित माना जाता है।
  • सरगी में बहुत ज्यादा तली-भुनी या मसालेदार चीजें नहीं रखी जाती है।

निष्कर्ष: करवा चौथ की सरगी रस्म होने के साथ यह भारतीय संस्कृति में रिश्तों की अहमियत को बताती है। करवा चौथ के खास मौके पर हर सास अपनी बहु को आशीर्वाद के रूप में सरगी देती है, जो सभी बहुओं को सूर्योदय से पहले खानी होती है। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से। 

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