आपने अक्सर ऐसे लोगों को देखा होगा जो बाहर से हमेशा खुश, हंसते-मुस्कुराते और एनर्जेटिक नजर आते हैं। ऑफिस में सबसे ज्यादा एक्टिव, दोस्तों में सबसे ज्यादा मजाकिया, लेकिन अकेले में वो अंदर ही अंदर टूट रहे होते हैं। इसी स्थिति को एक्सपर्ट्स Smiling Depression कहते हैं। यह वो डिप्रेशन है जो चेहरे की मुस्कान के पीछे छिपा होता है।
क्या आप भी स्माइलिंग डिप्रेशन से पीड़ित?
स्माइलिंग डिप्रेशन कोई ऑफिशियल मेडिकल डायग्नोसिस नहीं है, यानी इसे DSM-5 जैसी किताबों में अलग बीमारी के तौर पर नहीं गिना जाता है, लेकिन यह एक बेहद खतरनाक हकीकत है। इसमें व्यक्ति अपने दर्द को मास्क करने में माहिर हो जाता है। International Journal of Pharmaceutical sciences की रिसर्च के मुताबिक, स्माइलिंग डिप्रेशन में व्यक्ति कई बार सुसाइड से कुछ घंटे पहले भी बेहद खुश दिखाई देता है और बाद में वह गलत कदम उठा लेता है।
हर मुस्कुराता चेहरा खुश हो, यह जरूरी नहीं है। कई बार लोग परिवार और दोस्तों के सामने खुद को खुश दिखाते हैं, जबकि अकेले होने पर उदासी, खालीपन या निराशा महसूस करते हैं। उन्हें लगता है कि अपनी परेशानी बताने से दूसरे उन्हें कमजोर समझेंगे या उनकी वजह से परेशान होंगे। इसलिए, वे अपनी भावनाएं छुपाकर सामान्य जिंदगी जीने की कोशिश करते हैं।
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स्माइलिंग डिप्रेशन के क्या हैं लक्षण?
इसके संकेत हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। कुछ सामान्य लक्षणों में शामिल हैं।
- बाहर से खुश दिखना, लेकिन अकेले में उदास महसूस करना।
- पहले पसंद आने वाली चीजों में दिलचस्पी कम होना।
- नींद और भूख में बदलाव आना।
- खुद को दूसरों से अलग-थलग महसूस करना।
- लगातार थकान, निराशा या खुद को बेकार समझना।
- अपनी परेशानी किसी से साझा करने से बचना।
सिर्फ मुस्कुराने या कभी-कभी उदास रहने से किसी को डिप्रेशन नहीं कहा जा सकता। लक्षणों की अवधि, उनकी गंभीरता और रोजमर्रा की जिंदगी पर उनके असर को समझना जरूरी है।
कब लेनी चाहिए एक्सपर्ट की मदद?
अगर उदासी, निराशा या किसी काम में दिलचस्पी की कमी आ रही है और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगी है, तो साइकेट्रिस्ट से सलाह लें। साइकेट्रिस्ट की मदद से डिप्रेशन का इलाज संभव है और सही समय पर मदद मिलने से स्थिति बेहतर हो सकती है।
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मुस्कान के पीछे छिपे दर्द को समझना जरूरी
किसी व्यक्ति की मुस्कान देखकर उसकी मानसिक स्थिति का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। इसलिए, अपनों से खुलकर बात करना, उनकी भावनाओं को बिना जज किए सुनना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है। याद रखें, हमेशा मजबूत दिखना जरूरी नहीं है। अपनी परेशानी स्वीकार करना और मदद मांगना भी हिम्मत की बात है।
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अगर कोई हमेशा हंसता है, इसका मतलब ये नहीं कि वह अंदर से खुश है। कभी-कभी सबसे ज्यादा मुस्कुराने वाले इंसान को ही सबसे ज्यादा गले लगाने की जरूरत होती है। इसलिए अपने आस-पास के लोगों से दिल से पूछिए, 'तुम सच में कैसे हो?' अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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