मेनोपॉज यानी माहवारी का बंद होना हर महिला के जीवन का एक ऐसा कुदरती मोड़ है, जो उनके शरीर को अंदर से पूरी तरह रीसेट कर देता है। यह सिर्फ पीरियड्स का रुकना नहीं है बल्कि यह वह समय है, जब शरीर के मुख्य हार्मोंंस का लेवल गिरता है और इसका असर सिर से लेकर पांव तक पड़ता है। इस समय में महिला के शरीर के अंदर किस तरह के बड़े और अचानक बदलाव आते हैं, इसे समझने के लिए वैज्ञानिकों ने एक स्टडी की है। आइए जानते हैं कि इस स्टडी में क्या लिखा है?
मेनोपॉज की शुरुआत में दिखते हैं ये लक्षण
महिलाओं के जीवन में मेनोपॉज एक ऐसा पड़ाव है, जिसे अक्सर सिर्फ उम्र ढलने की एक सामान्य प्रक्रिया मान लिया जाता है, लेकिन वास्तव में मेनोपॉज शरीर के अंदर एक बहुत बड़ा फिजियोलॉजिकल ट्रांसफॉर्मेशन है। एक ऐसा समय है जब ओवरीज का काम खत्म हो जाता है और शरीर के बाकी सभी अंग इस नए बदलाव के हिसाब से खुद को ढालने की कोशिश करते हैं। हाल ही में आई एक नई रिसर्च ने मेनोपॉज के दौरान शरीर में होने वाले इन्हीं अचानक बदलावों पर से पर्दा उठाया है।
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मेनोपॉज के साथ शरीर में अचानक आने वाले बड़े बदलाव
अगर प्यूबर्टी यानी किशोरावस्था शरीर के बदलने की शुरुआत है, तो मेनोपॉज शरीर में अचानक आने वाला एक बड़ा मोड़ होता है। नेचर मेडिसिन में छपी एक नई स्टडी का दावा है कि माहवारी यानी पीरियड्स का बंद होना उम्र ढलने का कोई धीमा या धीरे-धीरे होने वाला हिस्सा नहीं है, यह शरीर में होने वाला एक बहुत बड़ा बदलाव है। इसमें सबसे साफ दिखने वाले बदलाव सेक्स हार्मोन्स से जुड़े हैं, जिन्हें ओवरीज बनाने में मदद करती हैं। इसके अलावा, हड्डियों में बदलाव, लिवर और किडनी फंक्शन के साथ ही खून में अजीब बदलाव दिखते हैं। दरअसल, मेनोपॉज महिला के पूरे शरीर को नए सिरे से बदलाव करता है।
विशेषज्ञों ने बताए अलग-अलग हार्मोनल संकेत
हालांकि, हर कोई इन बदलावों को अचानक आने वाला झटका या गिरावट कहने से सहमत नहीं है। ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न में ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी की प्रोफेसर मार्था हिकी, जो इस स्टडी में शामिल नहीं थीं, उनका कहना है कि यह महिलाओं के लिए डरावना हो सकता है और यह शरीर व दिमाग में एक भारी गिरावट का इशारा करता है, जिसे यह स्टडी साबित नहीं करती है।
दरअसल, रीप्रोडक्टिव सिस्टम कई सालों में ओवरीज अंडे बनाने और रिलीज करने का काम करता है, लेकिन सिर्फ यही उनका रोल नहीं है। ये अंग, जो हार्मोन्स रिलीज करते हैं, जैसे एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन और टेस्टोस्टेरोन, उनका पूरे शरीर पर गहरा असर होता है और उम्र बढ़ने के साथ महिला की सेहत के लिए इसके बड़े मायने होते हैं। मेनोपॉज के समय एक हार्मोन खासतौर पर सबसे बड़ा रोल निभाता है और वह है एस्ट्रोजन।
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यूनिवर्सिटी ऑफ द सनशाइन कोस्ट की फिजियोलॉजिस्ट मिया शॉमबर्ग बताती हैं कि जिन सिस्टम्स में सबसे बड़े बदलाव देखे गए वे एस्ट्रोजन के प्रति बहुत सेंसिटिव होते हैं और जिन सिस्टम्स में कोई बदलाव नहीं दिखा, उनका एस्ट्रोजन से रिश्ता बहुत कमजोर है। शॉमबर्ग को एक और नतीजा लगा कि स्टडी में पीरियड्स खत्म होने से करीब 15 और 12 साल पहले ही एंटी-मुलैरियन हार्मोन (AMH) और एस्ट्राडियोल कम होने के लक्षण दिखते हैं, जबकि मेनोपॉज से करीब 14 साल पहले फॉलिकल-स्टिमुलेटिंग हार्मोन (FSH) बढ़ने लगता है। शॉमबर्ग का कहना है कि मेनोपॉज के दौरान होने वाले बदलावों का अंदाजा पहले से ही लगाया जा सकता है।
मेनोपॉज के लक्षण कब से दिखने लगते हैं
ये नतीजे चूहों पर हुई हालिया रिसर्च से भी मेल खाते हैं, जो बताती है कि मेनोपॉज शुरू होने से सालों पहले ही ओवरीज में उम्र ढलने के लक्षण शुरू हो जाते हैं, लेकिन यह स्टडी सिर्फ एक ऑब्जर्वेशनल स्टडी है और न्यूजीलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ ऑकलैंड के हेल्थ साइंटिस्ट एंड्रयू शेलिंग ने चेतावनी दी है कि ये नतीजे दिलचस्प भले ही हों, लेकिन आखिरी नहीं हैं। दरअसल, मेनोपॉज इंसानी सेहत का एक बहुत बड़ा बदलाव है जिसके बारे में हम अभी भी बहुत कम जानते हैं।
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उम्र के साथ महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव आना बेहद स्वाभाविक है। सबसे जरूरी बात यह है कि इन बदलावों से घबराने के बजाय इन्हें सही तरीके से समझा जाए। सही खान-पान, एक्टिव लाइफस्टाइल और समय पर डॉक्टर की सलाह लेकर हर महिला इस दौर में भी पूरी तरह सेहतमंद और फिट रह सकती है। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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