45 की उम्र के बाद महिलाओं की जिंदगी में एक बड़ा हार्मोनल बदलाव आता है- मेनोपॉज। आमतौर पर महिलाएं इसे सिर्फ पीरियड्स बंद होना, गर्मी लगना और मूड स्विंग जैसे संकेतों से जोड़ते हैं। असल में पेट खराब होना और बिगड़ना मेनोपॉज के शुरुआती लक्षणों में से एक है। ऐसे में रोजाना अचानक गैस बनना, पेट फूलना और कब्ज जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
क्या मेनोपॉज से बिगड़ जाती है गट हेल्थ?
क्या आप मेनोपॉज की स्टेज में हैं और आपको लग रहा है कि आपका पाचन पहले जैसा नहीं रहा? आप अकेली नहीं हैं। मेनोपॉज का सीधा कनेक्शन हमारे गट हेल्थ से होता है। तो आइए दिल्ली के श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट की डॉक्टर प्रिया पालीवाल से जानते हैं कि कैसे मेनोपॉज से गट हेल्थ खराब हो जाती है?
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मेनोपॉज और डाइजेशन का क्या कनेक्शन है?
हमारा पाचन तंत्र सिर्फ खाने से नहीं, बल्कि हार्मोन्स से भी चलता है। एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन दो ऐसे हार्मोन होते हैं, जो आंतों की हलचल को सही रखते हैं, अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं और सूजन को कम करते हैं। मेनोपॉज में जब ये हार्मोन तेजी से कम होते हैं, तो-
- आंतों की मूवमेंट स्लो हो जाती है।
- शरीर में कोर्टिसोल यानी स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाता है।
- गट माइक्रोबायोम का बैलेंस बिगड़ जाता है।
इसी वजह से खाना देर से पचता है और पेट की समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
मेनोपॉज में होने वाले पेट से जुड़े 5 बड़े बदलाव
1. ब्लोटिंग और गैस बनना
ये सबसे बड़ा बदलाव है। हार्मोनल बदलाव से शरीर पानी रोकने लगता है और आंत में गैस ज्यादा बनती है। कई महिलाओं को शाम होते-होते पेट इतना फूल जाता है, जैसे गुब्बारा बन गया हो।
2. क्रॉनिक कब्ज
प्रोजेस्टेरोन कम होने से बड़ी आंत की मांसपेशियां सुस्त हो जाती हैं। खाना आंत में ज्यादा समय तक पड़ा रहता है, जिससे पानी पूरी तरह सोख लिया जाता है और स्टूल सख्त हो जाता है।
3. एसिड रिफ्लक्स और सीने में जलन
एस्ट्रोजन कम होने से खाने की नली का वाल्व कमजोर हो जाता है। ऊपर से स्ट्रेस बढ़ने से पेट में एसिड ज्यादा बनता है, जिससे खट्टी डकार और सीने में जलन होती है।
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4. गट बैक्टीरिया का असंतुलन
एस्ट्रोजन अच्छे गट बैक्टीरिया का खाना है। इसके कम होते ही बैड बैक्टीरिया बढ़ने लगते हैं। इससे न सिर्फ पाचन खराब होता है, बल्कि इम्यूनिटी, नींद और मूड पर भी असर पड़ता है।
5. मेटाबॉलिज्म स्लो और बेली फैट बढ़ना
डाइजेशन धीमा होने से कैलोरी बर्न होना कम हो जाता है। शरीर में इंसुलिन सेंसिटिविटी भी घटने लगती है, इसलिए खाना फैट में बदलकर सीधा पेट के आसपास जमा होने लगता है।
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पाचन को दुरुस्त रखने के असरदार तरीके
1. फाइबर और पानी बढ़ा दें
रोज 25-30 ग्राम फाइबर जरूर लें। इसमें ओट्स, रागी, दालें, पपीता, सेब, पालक जैसी चीजें शामिल करें। साथ में दिन भर में 8-10 गिलास गुनगुना पानी पिएं। ये कॉम्बिनेशन कब्ज का सबसे अच्छा इलाज है।
2. प्रोबायोटिक और प्रीबायोटिक लें
रोज एक कटोरी घर का जमा दही, छाछ या इडली-डोसा जैसे फर्मेंटेड फूड लें। ये पेट में अच्छे बैक्टीरिया वापस लाते हैं और ब्लोटिंग कम करते हैं।
3. खाने का पैटर्न बदलें
एक साथ खाने की बजाय दिन में 4-5 बार थोड़ा-थोड़ा खाएं। रात का खाना हल्का और सोने से 2 घंटे पहले खा लें। मैदा, तला-भुना, कोल्ड ड्रिंक और ज्यादा कैफीन से बचें।
4. ज्यादा से ज्यादा वॉक करें
रोज 30 मिनट की तेज वॉक, योग में पवनमुक्तासन, वज्रासन, भुजंगासन और अनुलोम-विलोम गट हेल्थ के लिए बहुत फायदेमंद है। इससे आंतें एक्टिव रहती हैं।
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मेनोपॉज कोई बीमारी नहीं बल्कि शरीर का एक नया फेज होता है। इस दौरान पाचन का बिगड़ना हार्मोन्स का नेचुरल असर है, इसलिए इसे इग्नोर न करें। छोटी-छोटी आदतें जैसे फाइबर वाला खाना, रोज चलना, प्रोबायोटिक लेना और स्ट्रेस कम करना आपके गट को फिर से हेल्दी बना सकती हैं। अगर इससे परेशानी ज्यादा हो रही है, तो खुद से दवा लेने के बजाय गायनेकोलॉजिस्ट और गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट दोनों से सलाह जरूर लें। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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