देर रात तक स्क्रीन देखते रहना, तनाव, चिंता और अवसाद के कारण आजकल अधिकांश लोग अनिद्रा या इंसोम्निया जैसी समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में नींद के लिए मिलिट्री मेथड को फायदेमंद कहा जा रहा है। क्या आप इस तकनीक के बारे में जानते हैं? आइए एक्सपर्ट से समझें नींद लाने के लिए कितनी कारगर है यह तकनीक …

अनिद्रा के लिए 'Military Method'

आसानी से नींद आ जाए इसके लिए लोग कितने तरह के उपाय अपनाते हैं फिर भी आठ घंटे की सुखद निद्रा उन्हें नसीब नहीं होती। ऐसे में मिलिट्री मेथड उनके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। यह एक ऐसी तकनीक है, जो शोरगुल और तनाव के बीच भी आपको नींद आने में मदद करती है। हालांकि, विशेषज्ञ इसे पूरी तरह से जादुई नहीं मानते, उनके मुताबिक इसके नियमित अभ्यास से दिमाग और शरीर शांत होता है, जिससे नींद आने में मदद मिलती है।

कहां से आई तकनीक?

मूल रूप से यह तकनीक द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिकी नौसेना द्वारा विकसित की गई थी। उस दौरान तनावपूर्ण माहौल और युद्ध के बीच सैनिक और पायलटों को नींद की परेशानी होती थी, तब उन्होंने इस तकनीक को अपनाया और उन्हें फायदा मिला। दरअसल, यह तरीका शरीर के नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) को शांत करता है और दिमाग को यह संकेत देता है कि अब खतरा टल गया है और विश्राम का समय है। ठीक ऐसे ही सामान्य मनुष्य भी रोजाना इस तकनीक का अभ्यास कर सकते हैं।

भारतीय योग से संबंध

विशेषज्ञ ऐसा मानते हैं कि भारतीय योग ऐसी तकनीक सालों पुरानी है, जिसे शवासन कहा जाता है। मिलिट्री मेथड और शवासन में काफी हद तक समानता है। इसलिए भारतीय इस तकनीक को बहुत आसानी और प्राकृतिक रूप से अपनाने में सक्षम हो सकते हैं।

कैसे काम करता है यह तरीका?

इस प्रक्रिया में कुल 120 सेकेंड लगते हैं, जिसमें शरीर के हर हिस्से को क्रमानुसार ढीला छोड़ा जाता है और उसके बाद सांसों पर नियंत्रण से कुछ ही देर में नींद आने लगती है और आपको पता भी नहीं चलता है।

  • चेहरा रिलैक्स करें- आंखें बंद करके धीरे-धीरे सांस लीजिए। अपने माथे, गाल, जबड़े और जीभ की मसल्‍स को पूरी तरह ढीला छोड़ दें।
  • कंधे और हाथ ढीले करें- अपने दोनों कंधों को नीचे की ओर गिराएं और तनाव मुक्त करें। इसके बाद एक-एक करके अपने दोनों हाथों, बाजुओं और हथेलियों को पूरी तरह ढीला छोड़ दें।
  • सांस पर ध्यान दें- एक गहरी सांस लें और धीरे-धीरे छोड़ें। इससे आपकी चेस्‍ट और पेट की मसल्‍स शांत हो जाएंगी।
  • पैरों को रिलैक्स करें- पैरों को पहले खूब खींचें और फिर धीरे-धीरे बिस्तर पर ढीला छोड़ दें।

एम्स, ऋषिकेश के स्लीप मेडिसिन विभाग के डॉक्‍टर रवि गुप्ता, बताते हैं कि कोई भी तकनीक किसी पर एक बार में काम नहीं करती है, उसे रोजाना अभ्यास में लाना होता है। जिन्हें नींद से जुड़ी कोई गंभीर बीमारी है या फिर इंसोमनिया है उन्हें थोड़ा वक्त लग सकता है, लेकिन जो लोग सामान्य कारणों से नींद पूरी नहीं कर पा रहे हैं उन पर यह तकनीक जल्दी काम करती है। हालांकि, आजकल लोग इंटरनेट मीडिया पर देखकर कई तरह के उपाय अपना रहे हैं, जिनका अब तक कोई वैज्ञानिक आधार नहीं मिला है।

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लेखक- सुमन अग्रवाल