आज की पीढ़ी विंटेज चीजों को बहुत पसंद करती है। दादा-दादी की घड़ी हो या फिर मां की पुरानी जरी वाली साड़ी बड़े चाव से पहनती है। ऐसे में त्योहारों पर पुरानी साड़ियों को स्टाइलिश लुक देकर ट्रेंडी आउटफिट्स बनाने का एक बेहतरीन मौका है। आइए फैशन डिजाइनर से जानें, उन साड़ियों से कैसे डिजाइनर आउटफिट्स बन सकते हैं...

मां की पुरानी साड़ियों से बनाएं ट्रेंडी आउटफिट्स

इन दिनों फैशन की दुनिया में अपसाइक्लिंग का ट्रेंड बहुत तेजी से बढ़ रहा है। आज की पीढ़ी पुरानी चीजों से अपने लगाव के कारण उन्हें फेंकती नहीं हैं, बल्कि उनका बेहतरीन तरीके से इस्तेमाल करती हैं। जैसे पुरानी हैवी साड़ियों की बात करें तो उनका आंचल, बॉर्डर, फैब्रिक और कारीगरी इतनी शानदार होती हैं कि उन्हें रीडिजाइन करके ट्रेंडी माडर्न आउटफिट तैयार हो सकते हैं। इस रीडिजाइनिंग को अपसाइक्लिंग कहते हैं। यह एक तरह की कला है, जिसमें पुराने कपड़ों को आधुनिकता का रंग देकर नया बनाया जाता है। दरअसल, पुरानी साड़ियों के साथ केवल मां की यादें या भावनाएं ही नहीं जुड़ी होती हैं बल्कि उस समय की संस्कृति भी झलकती है। साथ ही उन साड़ियों का फैब्रिक और रंग जल्दी खराब भी नहीं होता।

मां की पुरानी साड़ियों से कैसे आउटफिट्स बन सकते हैं?

मां की पुरानी साड़ियों से आप कई तरह के स्टाइलिश और ट्रेंडी आउटफिट्स बनवा सकती हैं। इन साड़ियों से लहंगा, अनारकली सूट, शरारा सेट, लॉन्ग स्कर्ट और इंडो-वेस्टर्न ड्रेस तैयार करवाई जा सकती हैं। आप इन आउटफिट्स को त्योहारों, शादी-पार्टी या किसी खास मौके पर पहन सकती हैं।

लहंगा बनाएं- त्योहारी सीजन में भारी जरी वाली साड़ी के बॉर्डर का इस्तेमाल करके कलियों वाला लहंगा या स्कर्ट सिलवाई जा सकती है। इसके लिए बनारसी, सिल्क या फिर शिफॉन की साड़ियां सबसे बेहतरीन होती हैं।
क्रॉप टॉप- प्लाजो- साड़ियों की बूटी या जरी सबसे कीमती और खूबसूरत होती है। इससे स्टाइलिश हॉल्टर नेक का ब्लाउज या क्रॉप टॉप बनवाया जा सकता है। इसके साथ में जॉर्जेट का प्लाजो या शरारा भी बन सकता है।
ट्रेंच कोट- बनारसी या सिल्क साड़ियों से लॉन्ग ट्रेंच कोट या जैकेट बनवाई जा सकती है या फिर हॉफ कोटी भी अच्छी लगती है। इन्हें आप जींस-टॉप या फिर हल्के लहंगे के ऊपर पहनकर इंडो-वेस्टर्न लुक ला सकती हैं।
वाइड लेग पैंट- अगर साड़ी पर खूबसूरत बॉर्डर बना हुआ है, तो इसे पैंट के नीचे या टॉप की स्लीव्स पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे आउटफिट को डिजाइनर टच मिलता है।
को-ऑर्ड सेट्स- आजकल हर मौकों के लिए को-ऑर्ड सेट्स एक ट्रेंडी और आरामदायक पहनावा है। आप चाहें तो नवरात्र में दिन के समय आप इसे पहन सकते हैं। पुरानी चटक रंग की साड़ियों का को-ऑर्ड सेट्स बहुत अच्छे से तैयार हो सकता है।

सदाबहार फैब्रिक और प्रिंट्स

पुराने जमाने में मांओं के पास जरदोजी, सिल्क, बनारसी और मिरर वर्क की कई साड़ियां हुआ करती थीं। एक से दो बार पहनने के बाद वे शायद आज अलमारी के किसी कोने में रखी हुई होंगी। ऐसी साड़ियों के फैब्रिक, डिजाइन, रंग और प्रिंट इतने लाजवाब होते थे कि आज भी बिल्कुल नए जैसे लगते हैं। पहले कंट्रास्ट वाली एम्ब्रॉयडरी का चलन हुआ करता था, लेकिन आजकल उसी जगह सुनहरे कपड़ों पर सुनहरे धागों से काम की हुई हल्की एम्ब्राॅयडरी पसंद की जाती है। पहले के बांधनी, कोटा और इकत प्रिंट आज भी फैशन की दुनिया में सदाबहार हैं।

फैशन एक्सपर्ट रोजी आहलूवालिया का मानना है कि अपसाइक्लिंग का चलन कुछ समय से काफी चर्चा में है। सस्टेनेबल फैशन को महत्व देते हुए आज के युवा मां की पारंपरिक साड़ियों को आधुनिकता के रंग में ढालकर उस समय की संस्कृति को संजोने का प्रयास कर रहे हैं। वे नहीं चाहते कि वे साड़ियां केवल अलमारी में रखी रहे बल्कि उन्हें जीवंत करना चाहते हैं। दरअसल, ऐसा करने से न केवल संस्कृति को जीवंत रखा जाता है बल्कि भावनाएं और यादें भी जिंदा हो जाती हैं।

इनके मुताबिक सस्टेनेबिलिटी इनकी लाइफस्टाइल का हिस्सा है। ये हमेशा नए कपड़े खरीदने के बजाय पुरानों को रीडिजाइनिंग करके पहनना पसंद करती है। आजकल इंटरनेट मीडिया पर भी विंटेज फैशन खूब लोकप्रिय हो रहा है। डिजाइनर्स और स्टाइलिस्ट भी इस तरह के नए इनोवेशन को बढ़ावा दे रहे हैं। वे पारंपरिक टेक्सटाइल को युवाओं की पसंदीदा स्टाइल में रीडिजाइन करते हैं जो युवाओं का नया फैशन स्टेटमेंट बन जाता है।

आप भी मां की पुरानी साड़ी को नया और मॉडर्न लुक देने के लिए स्‍टाइलिश आउटफिट्स बनवा सकती हैं। साथ ही उससे जुड़ी यादें भी आपके पास हमेशा बनी रहेंगी। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

लेखक- सुमन अग्रवाल