हम सभी ट‍िफ‍िन पैक करते समस एल्‍युम‍िन‍ियम फॉयल का इस्‍तेमाल करते हैं। रोटी, पराठा, सैंडव‍िच या और भी काेई ड्राई चीज होती है तो इन्‍हें फ्रेश रखने का काम ये एल्‍युम‍िन‍ियम फॉयल ही करता है, ले‍क‍िन क्‍या आपने कभी ध्‍यान द‍िया है क‍ि फॉयल का एक ह‍िस्‍सा ज्‍यादा शाइनी होता है जबक‍ि दूसरा थोड़ा फेड नजर आता है? इसे देखकर ज्‍यादातर लोगों के मन में ये सवाल आता है क‍ि आख‍िर ऐसा क्‍यों होता है?

असल में इसके पीछे कोई खास टेक्‍न‍िक, ट्र‍िक या कंपनी का मार्केट‍िंग स्‍ट्रैटेजी नहीं है। ऐसा स‍िर्फ फाॅयल बनाने के प्रॉसेस की वजह से ही होता है। आइए इसके बारे में जानते हैं व‍िस्‍तार से-

आखिर कैसे बनता है एल्युमिनियम फॉयल?

एल्युमिनियम फॉयल बनाने की शुरुआत पिघले हुए एल्युमिनियम से ही होती है। इसे पहले बड़े-बड़े टुकड़ों में तैयार किया जाता है। इसके बाद मशीनों से इसे बार-बार दबाकर और पतला किया जाता है। यह तरीका कई बार र‍िपीट क‍िया जाता है ताकि फॉयल बहुत पतली बन सके। आपने तो देखा ही होगा क‍ि रसोई में इस्तेमाल होने वाली फॉयल बहुत पतली होती है।

एक साथ चलती हैं दो शीट

फॉयल बनाने के आख‍िरी स्‍टेप में दो शीटों को एक साथ रखा जाता है और मशीन के रोलर्स के बीच से ये शीट चलती है। बाद में इन दोनों शीटों को अलग कर दिया जाता है। यहीं से चमकदार और फीके हिस्से का अंतर मालूम चलने लगता है। जो हिस्सा सीधे मशीन के स्टील रोलर को डायरेक्‍ट टच होता है, वही ज्यादा शाइनी हो जाता है।

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कब जरूरी है क‍ि सही साइड चुनें?

नॉर्मल एल्युमिनियम फॉयल में किसी स्‍पेशल साइड को चुनने की जरूरत नहीं होती है, लेकिन बाजार में कुछ कंपनियां नॉन-स्टिक फॉयल भी बेचती हैं। ऐसी फॉयल में एक तरफ खास नॉन-स्टिक लेयर लगाई जाती है। आमतौर पर ये लेयर कम चमक वाले साइड होती है। उस पर अक्सर Non-Stick Side भी लिखा होता है, ताकि लोग पहचान सकें कि खाने की तरफ कौन-सा हिस्सा रखना है।

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खाना पैक करते समय किन बातों का रखें ध्यान?

अगर आप खाने को गर्म रखना चाहती हैं तो बेहतर होगा क‍ि शाइनी साइड बाहर की ताफ रखें। इससे हीट अंदर पूरी तरह से बनी रहेगी। वहीं, अगर आप खाने को ठंडा रखना चाहती हैं, तो दूसरा साइड बाहर की तरफ रखें। सबसे ज्‍यादा जरूरी है क‍ि फॉयल साफ और सही हालत में होना चाह‍िए। ध्‍यान रहे क‍ि बहुत गर्म और ज्यादा खट्टी चीजों को लंबे समय तक फॉयल में न रखें। साथ ही फटी हुई या बहुत पुरानी फॉयल का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए।

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