कच्ची हल्दी दरअसल हल्दी की जड़ होती है, जिसे सुखाकर पाउडर बनाया जाता है और मसाले के तौर पर इसका इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, हल्दी कच्ची हो या सूखी दोनों में मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर होते हैं। कच्ची हल्दी में पोषक तत्वों की मात्रा पाउडर हल्दी की तुलना में ज्यादा होती है, क्योंकि इसमें प्रोसेसिंग नहीं होती। इसमें मैंग्नीज, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, सेलेनियम, सोडियम, जिंक, आयरन, कॉपर, पोटैशियम, फाइबर, विटामिन, कोलीन, फोलेट पाया जाता है, लेकिन इसका सबसे खास तत्व 'करक्यूमिन' को ही माना जाता है। यही कारण है कि इसे नेचुरल मेडिसिन भी कहा जाता है। आज के समय में केवल आयुर्वेद ही नहीं बल्कि आधुनिक विज्ञान में भी कच्ची हल्दी लाभकारी मानी जा रही है।
घी के साथ मिलाकर खाने से इम्यूनिटी बढ़ेगी
कच्ची हल्दी शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत बनाती है और इंफेक्शन से लड़ने में सहायक होती है। इसमें मौजूद करक्यूमिन शरीर में फ्री रेडिकल्स से लड़ता है और इम्यून सेल्स को एक्टिव करता है। सर्दी-खांसी, जुकाम, वायरल बुखार और मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए कच्ची हल्दी का नियमित सेवन फायदेमंद माना जाता है। कच्ची हल्दी को उबालकर एक चम्मच घी के साथ सुबह पिएं। इससे इम्यूनिटी मजबूत होती है।
दूध के साथ कच्ची हल्दी उबालकर पिएं
सीजनल फ्लू, सर्दी-खासी या बुखार से परेशान हैं, तो कच्ची हल्दी को दूध में उबालकर पिएं। इसके लिए कच्ची हल्दी को पीसकर दूध में मिला दें और इसे एक उबाल आने तक गर्म करें और सिप-सिप करके पिएं। ये दूध रोजाना पीने से इम्यूनिटी मजबूत होती है और मौसमी बीमारियों से बचाव होता है। बच्चों को तो कच्ची हल्दी मिलाकर दूध जरूर पिलाना चाहिए। खासकर उन बच्चों को जिनको सांस से जुड़ी परेशानियां हैं।
पाचन तंत्र को दुरुस्त रखे
कच्ची हल्दी पाचन तंत्र के लिए किसी औषधि से कम नहीं है। यह पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करके भोजन को सही तरीके से पचाने में मदद करती है। गैस, अपच, एसिडिटी और पेट की सूजन जैसी समस्याओं में कच्ची हल्दी बेहद कारगर मानी जाती है। यह लिवर को डिटॉक्स करने में भी मदद करती है, जिससे शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलते हैं और मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है।
सूजन और दर्द से राहत
कच्ची हल्दी के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण इसे जोड़ों के दर्द, अर्थराइटिस, मसल्स की अकड़न और सूजन में लाभकारी बनाते हैं। नियमित रूप से सीमित मात्रा में कच्ची हल्दी का सेवन करने से पुराने दर्द में भी राहत मिल सकती है। यही वजह है कि आयुर्वेद में इसे प्राकृतिक पेन रिलीवर माना गया है।
दिल की सेहत के लिए फायदेमंद
कच्ची हल्दी दिल की सेह के लिए भी लाभकारी मानी जाती है। यह खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करती है। इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण ब्लड वेसल्स को स्वस्थ रखते हैं और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाते हैं, जिससे दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है।
डायबिटीज में लाभकारी
कच्ची हल्दी ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में सहायक मानी जाती है। यह इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाती है और शरीर में शुगर के लेवल को संतुलित रखने में मदद करती है। हालांकि, डायबिटीज के मरीजों को इसका सेवन डॉक्टर की सलाह से करना चाहिए।
वजन घटाने में मददगार
जो लोग वजन कम करना चाहते हैं, उनके लिए कच्ची हल्दी एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है। यह मेटाबॉलिज्म को तेज करती है और शरीर में जमा फैट को कम करने में मदद करती है। साथ ही यह पाचन को दुरुस्त रखती है, जिससे वजन नियंत्रण में रहता है।
त्वचा के लिए कच्ची हल्दी के फायदे
कच्ची हल्दी त्वचा को अंदर से साफ और चमकदार बनाने में मदद करती है। इसके एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण मुंहासे, दाग-धब्बे और त्वचा में होने वाले इंफेक्शन कम होते हैं। कच्ची हल्दी खून को शुद्ध करती है, जिससे त्वचा पर नेचुरल ग्लो आता है। इसे फेस पैक के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन आंतरिक सेवन त्वचा के लिए अधिक प्रभावी माना जाता है।
बालों के स्वास्थ्य में सहायक
कच्ची हल्दी बालों की जड़ों को मजबूत करने में मदद करती है। यह स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाती है, जिससे बालों का झड़ना कम होता है। इसके एंटीफंगल गुण डैंड्रफ और स्कैल्प संक्रमण को भी कम करते हैं।
कच्ची हल्दी का सेवन कैसे करें?
- सलाद में कद्दूकस करके
- गुनगुने पानी या दूध के साथ
- चटनी या सब्जियों में मिलाकर
- हल्दी की सब्जी बनाकर
- शहद के साथ छोटे टुकड़े
कच्ची हल्दी का कितनी मात्रा में करें सेवन?
दिन में 5 से 10 ग्राम कच्ची हल्दी पर्याप्त मानी जाती है। ज्यादा मात्रा में सेवन करने से पेट में जलन या अन्य समस्याएं हो सकती हैं।
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सावधानियां
- कच्ची हल्दी बेहद फायदेमंद है, लेकिन इसे ज्यादा खाने से नुकसान हो सकता है।
- गर्भवती महिलाएं खाने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।
- पेट की गंभीर समस्या या पित्त की शिकायत होने पर सावधानी बरतें।
- ब्लड थिनर दवाइयों के साथ इसका सेवन सीमित रखें।
लेखक- दीक्षा प्रियदर्शी
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