भारत में ऐसी कई जगहें हैं, जहां पहुंचकर पहली नजर में अपनी आंखों पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है। कहीं पहाड़ों के बीच बादल उतर आते हैं, तो कहीं झरने और हरियाली आपका मन मोह लेते हैं। ऐसे में नजारा इतना खूबसूरत होता है क‍ि कोई भी यहां से वापस ही नहीं जाना चाहता है। महाराष्ट्र का नाणेघाट भी ऐसा ही है। वेस्‍टर्न घाट की पहाड़ियों में मौजूद यह जगह अपनी खूबसूरती के ल‍िए जानी जाती है।

हालांक‍ि, यहां आने वाले लोगों के लिए सबसे हैरान करने वाली चीज कोई आम झरना नहीं है बल्‍क‍ि उसका पानी है। बताया जाता है क‍ि इरने का पानी नीचे ग‍िरने के बजाय बादलों में उड़ जाता है। इसी वजह से इसे रिवर्स वॉटरफॉल कहा जाता है। सोशल मीडिया पर भी इसके वीडियो खूब देखने को मिलते हैं। आज हम आपको इसके बारे में व‍िस्‍तार से जानकारी दे रहे हैं। आइए जानते हैं-

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महाराष्ट्र में कहां है नाणेघाट?

आपको बता दें क‍ि नाणेघाट महाराष्ट्र की पहाड़ियों में मौजूद एक पुराना पहाड़ी दर्रा है। यह पुणे और ठाणे के बीच है। इसका इतिहास करीब 2,000 साल पुराना है। बताया जाता है क‍ि सातवाहन टाइम में नाणेघाट का इस्तेमाल बिजनेस रूट के रूप में होता था, लेकिन आज के समय में यह स्पॉट ट्रैकिंग के लिए काफी फेमस है। मॉनसून में तो यहां पर गजब की हर‍ियाली देखने को म‍िलती है। पहाड़ों पर धुंध-बादल छा जाते हैं और झरने के पानी का फ्लो भी बढ़ जाता है। जुलाई से स‍ितंबर के बीच रिवर्स वॉटरफॉल सबसे बड़ा अट्रैक्शन बनता है, जिसे देखने लोग दूर-दूर से आते हैं।

आखिर पानी ऊपर क्यों उड़ता है?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पानी नीचे गिरता है, तो नाणेघाट में ऊपर क्यों जाता दिखता है? इसका सिंपल रीजन है यहां की तेज हवा। पानी यहां कोई ग्रेविटी का रूल नहीं तोड़ती है। जब वॉटरफॉल का पानी नीचे गिरता है, तो छोटी बूंदों में बंट जाता है। ऐसा कहा जाता है क‍ि मानसून के समय पहाड़ों पर हवा 40 से 60 km per hour की स्पीड से चलती है। यह तेज हवा पानी की बूंदों को नीचे गिरने से पहले ही ऊपर की तरफ ढकेल कर देती है। इसलिए देखने में लगता है कि झरना उल्टा बह रहा है।

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हर मौसम में नहीं दिखता रिवर्स वॉटरफॉल

अगर आप नाणेघाट जाकर इस अनोखे नजारे को देखना चाहती हैं, तो मौसम का सही होना जरूरी है। रिवर्स वॉटरफॉल पूरे साल इसी तरह दिखाई नहीं देता है। यह नजारा आपको जुलाई से सितंबर के बीच ही द‍ि‍खेगा। इस समय झरने में पानी भी अच्‍छा खासा होता है। अगर बारिश कम हो जाए या हवा की स्‍पीड स्‍लो हो जाए, तो पानी नॉर्मल तरीके से नीचे ही ग‍िरेगा।

मानसून में हजारों लोग पहुंचते हैं यहां

मानसून में नाणेघाट की वाइब्स एकदम नेक्स्ट लेवल होती हैं। यहां चारों तरफ हरी-भरी वैली, बादलों से ढके पहाड़ और यह अनोखा झरना देखने हर साल हजारों ट्रैवलर्स और ट्रैकर्स यहां आते हैं।

नाणेघाट को रिवर्स वॉटरफॉल क्यों कहते हैं?

आप सभी जानती हैं क‍ि झरने का पानी तो आमतौर पर नीचे ही गिरता है, लेकिन नाणेघाट में मानसून की तेज हवा पानी की बूंदों को नीचे गिरने ही नहीं देती और ऊपर की तरफ उड़ा देती है। पहली बार देखने पर यह किसी मैजिक जैसा लगता है। इसील‍िए इसे र‍िवर्स वॉटरफाॅल कहते हैं।

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