आज के आधुनिक दौर में जहां पिज्जा, बर्गर और मोमोज जैसे फास्ट फूड ने लोगों की रसोई और जुबान पर कब्जा कर लिया है। वहीं हमारी पारंपरिक डिशेज धीरे-धीरे पीछे छूटती जा रही हैं। उत्तर प्रदेश के गांवों में एक समय ऐसा था जब घर पर बनने वाला 'भकोसा' हर किसी का पसंदीदा नाश्ता हुआ करता था। समय के साथ यह लजीज और सेहतमंद डिश लगभग विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गई है। गुमनाम जायका के इस सीरीज में हम आपको यूपी के इस पारंपरिक व्यंजन की खासियत के बारे में बताने जा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश का पारंपरिक भकोसा क्या है?
भकोसा उत्तर प्रदेश की पारंपरिक रेसिपी है। यह देखने में दक्षिण भारत के मोमोज या फरा जैसी थोड़ी बहुत लगती हो, लेकिन इसका स्वाद और बनाने का तरीका बिल्कुल अलग होता है। इसे मुख्य रूप से गेहूं के आटे और चने की दाल से तैयार किया जाता है। खास बात यह है कि इसे पकाने के लिए तेल या घी का इस्तेमाल न के बराबर होता है, जिससे यह स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद माना जाता है।
भकोसा बनाने की विधि
भकोसा बनाने की प्रक्रिया आसान है। इसके लिए सबसे पहले गेहूं के आटे को गूंथकर उसकी छोटी-छोटी पूरियां या रोटियां जैसी लोइयां बनाई जाती हैं। इसके बाद चने की दाल को रातभर भिगोकर पीस लिया जाता है। इसमें अदरक, हरी मिर्च, लहसुन, हींग और मसालों का भरपूर इस्तेमाल किया जाता है।
अब पिसी हुई मसालेदार दाल को आटे की पूरियों के अंदर भरकर आधे चांद के आकार में मोड़ दिया जाता है। इसे तेल में तलने के बजाय पानी की भाप यानी स्टीम में पकाया जाता है। इसके बाद इसे छोटे टुकड़ों में काटकर राई, करी पत्ता और हरी मिर्च से तड़का लगाया जाता है।
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भकोसा डिश की खासियत
भकोसा पारंपरिक डिश सिर्फ स्वाद ही नहीं बल्कि कई गुणों से भरपूर होती है। इसमें तेल का इस्तेमाल न होने के कारण यह पेट के लिए बहुत हल्की और आसानी से पचने वाली डिश है। गेहूं का आटा फाइबर और चने की दाल प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत है, जो बच्चों और बुजुर्गों दोनों के लिए सेहतमंद है। हींग, लहसुन और मसालों का तड़का इसके स्वाद को और भी ज्यादा बढ़ा देता है। इसे हरी धनिया की तीखी चटनी के साथ खाने का अलग ही मजा है।
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संस्कृति और यादों से जुड़ा है रिश्ता
भकोसा सिर्फ एक व्यंजन नहीं है बल्कि यह यूपी की ग्रामीण संस्कृति और पुरानी यादों का एक अहम हिस्सा है। सर्दियों के मौसम में या जब कभी घर पर कुछ हल्का और स्वादिष्ट खाने का मन होता था, तो मां और दादी मिलकर इसे तैयार करती थीं। आज के दौर में लोग अन-हेल्थी फास्ट फूड की तरफ भाग रहे हैं।
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अगर आप भी दादी-नानी के जमाने के खोए और बिसरे व्यंजनों के बारे में पढ़ना और पसंद करते हैं, तो गुमनाम जायका सीरीज इसी पर आधारित है। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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